{"_id":"5a1c649a4f1c1b156b8b8bb3","slug":"101511810202-kurukshetra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गोलमाल : यहां ‘राम नाम’ नहीं दाम की मची है लूट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गोलमाल : यहां ‘राम नाम’ नहीं दाम की मची है लूट
Updated Tue, 28 Nov 2017 12:46 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोलमाल : यहां ‘राम नाम’ नहीं दाम की मची है लूट
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
लूट सके तो लूट ले, राम नाम की लूट...। 15वीं सदी के रहस्यवादी कवि संत कबीर की यह रचना सैकड़ों साल बाद कुरुक्षेत्र में गीता जयंती के दौरान दिख रही है। फर्क इतना है कि उसमें राम का नाम लूटने की बात कही गई है, जबकि कुरुक्षेत्र में गीता जयंती के दौरान ‘दाम’ लूटे जा रहेे हैं। देश, प्रदेश के राजनैतिक दलों के नेता ही नहीं, बल्कि संत समाज और स्थानीय नागरिक भी गीता के नाम पर लूट की बात कह रहे हैं। यह ‘लूट’ लाइट के साथ केडीबी में किए गए निर्माण में भी दिख रही है। घपले की आशंका को इसी से बल मिलता है कि इन दोनों मुद्दों पर कोई भी अधिकारी खुलकर बोलने के लिए राजी नहीं है। एक अधिकारी केवल इतना ही कह रहे हैं, कि मामले की जांच कराई जाएगी।
पिछले दिनों अमर उजाला ने गीता जयंती की टेंडर प्रक्रिया के अलावा सरकारी गीता केंद्र को बंद कर स्वामी ज्ञानानंद की संस्था को मेला क्षेत्र की बेशकीमती नौ एकड़ भूमि देने का मामला उजागर किया था। अब ताजा मामला अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में टेंपरेरी इलेक्ट्रिफिकेशन वर्क में धांधली, प्रचार के लिए लगाए गए फ्लेक्स के अलावा बिना अनुमति के कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ऑफिस के फ्रंट एरिया को लाखों रुपये खर्च कर नया लुक देने का सामने आया है। हालांकि, पूछताछ शुरू होने पर उच्च अधिकारियों ने केडीबी के फ्रंट एरिया का काम रुकवा दिया। साथ ही नए स्ट्रक्चर का काम रोकने के आदेश दे दिए। यह बात कोई भी अधिकारी नहीं बता रहा कि नया स्ट्रक्चर किसके कहने पर लगाया गया था और किसके कहने पर इसे नीचे उतारा गया। इस सबकी वजह से केडीबी भवन को कई जगह से बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है। गौरतलब कि गीता जयंती की भव्य तैयारियों के बीच केडीबी ऑफिस के एंट्री गेट और फ्रंट एरिया को नया लुक देने का काम चार दिन पहले युद्ध स्तर पर शुरू हुआ था। इस निर्माण का ज्यादातर काम लोहे और एल्यूमीनियम शीट से होना था। इस वजह से केडीबी ऑफिस के फ्रंट एरिया में लगे लाल पत्थरों पर दर्जनों नट बोल्ट गाड़ कर इन पर लोहे की कई एंगल लगा दी गई थीं। इन पर वेल्डिंग भी की गई थी। करीब 70 प्रतिशत काम पूरा होने के बाद यह पूरा मामला उच्च अधिकारी के संज्ञान में आ गया। बताया जा रहा है कि उनके एतराज के बाद इस स्ट्रक्चर को उखाड़ दिया गया। हालांकि, साइट पर निर्माण के लिए पूरी सामग्री पहुंच चुकी थी। नए लुक के लिए केडीबी ऑफिस के एंट्री गेट पर लगे पुराने ग्लोसाइन बोर्ड को भी उखाड़ दिया गया था। इस बारे में केडीबी की सीईओ पूजा चांवरिया से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वह कार्यक्रम में हैं। हालांकि, मानद सचिव ने पूरे मामले की जांच का आश्वासन दिया है।
टेंडर की शर्तों पर यहां नहीं हुआ काम
1- मेला क्षेत्र में ब्रह्मसरोवर की सभी स्टालों पर चार हजार एलईडी लगाई जानी थीं। आधे से भी कम संख्या में लगाई गई हैं।
2- इंडियन फ्लूड एलईडी लाइट 50 वॉट के 100 पीस लगाए जाने थे, लेकिन सिर्फ 50 पीस लगाए गए।
3- एलईडी पैनल आठ फुट बाई चार फुट के 100 पीस लगाए जाने थे, लेकिन यह भी करीब 30 ही लगाए गए हैं।
4- ब्रह्मसरोवर के मेन गेट और किरमिच रोड वाले मेन गेट पर आठ फुट चौड़े और चार फुट लंबे दो डिजिटल एलईडी पैनल लगने थे। इनमें से एक भी नहीं लगा।
5- टेंडर की शर्तों के तहत छह नंबर पर 10 हजार लड़ियां लगाई जानी थीं। यह सरकारी भवनों और शहर के 18 मुख्य चौराहों पर लगानी थी। इनमें से चुनिंदा स्थानों को छोड़ कर लगभग सभी खाली हैं।
विज्ञापन
6-लड़िया लगाने की शर्तों में दो लड़ियों के बीच में अंतर सिर्फ छह इंच का तय किया गया था, लेकिन वास्तव में दो से तीन फुट की दूरी पर लड़ियां लगाई गई हैं।
प्रशासन की आंखों के सामने चोरी
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव-2017 में टेंपरेरी इलेक्ट्रिफिकेशन के टेंडर की शर्तों में ठेकेदार को कुरुक्षेत्र के चुनिंदा तीर्थों के अलावा 18 मुख्य चौराहों, सरकारी भवनों पर 17 नवंबर से तीन दिसंबर तक लाइटिंग करनी थीं। इनमें से अधिकांश जगहों पर इंडियन एलईडी लड़ियां लगनी थीं। ये स्थान रात में अब भी अंधेरे में डूबे हुए हैं। इनमें जीटीरोड से कुरुक्षेत्र में प्रवेश द्वार पर स्थित गीता द्वार से लेकर सन्निहित तीर्थ का सूर्य द्वार, मुख्य चौराहे, सरकारी भवन और तीर्थ शामिल हैं।
इन चौराहों और भवनों पर नहीं हुई लाइटिंग
महाराणा प्रताप चौक, वाल्मीकि चौक, धन्ना भगत चौक, ब्रह्मकुमारी चौक, जगद्गुरु ब्रह्मानंद चौक पर चार लड़ियां लगाई गई हैं। राव तुलाराम चौक पर नहीं हैं। विश्वकर्मा चौक पर लगी है। अंबेडकर चौक पर लगी हैं। मीरी पीरी चौक, श्रद्धा चौक, अग्रसेन चौक, जिंदल चौक, शहीद ऊधम सिंह चौक, जेसीआई चौक, सेक्टरों के तीन चौराहों, गीता द्वार, सूर्य द्वार पर लड़ियां नहीं लगाई गई हैं। हरियाणा टूरिज्म पिपली पैराकीट, पुलिस लाइन, हुडा ऑफिस, जिमखाना क्लब, पोस्ट ऑफिस, रेलवे स्टेशन पर भी लड़ियां नहीं लगाई गईं। दयालपुर बाण गंगा तीर्थ और अभिमन्यु पुर अमीन के अदिति तीर्थ पर भी लाइटिंग नहीं कराई गई।
कौन कर रहा है निगरानी
प्रशासन टेंडर प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता के दावे कर रहा है। जिस प्राइवेट एजेंसी ने करीब 38 लाख रुपये में टेंपरेरी इलेक्ट्रिफिकेशन का ठेका लिया था। कम दाम में यह काम करने के लिए प्राइवेट फर्म के विरोध का मामला उजागर होने के बाद इस ठेके को रदद् कर रीटेंडर कराए गए थे। लेकिन, ठेका उसी एजेंसी को करीब 19 लाख में मिला। जो एजेंसी पहले यह कार्य करीब 38 लाख में करने का टेंडर भर चुकी थी। आरोप लगाए जा रहे है कि मिलीभगत के चलते उसी प्राइवेट एजेंसी ने खानापूर्ति के लिए लाइटिंग की और अधिकांश चौराहों, प्रवेश द्वारों और मुख्य चौराहे बगैर लाइटिंग के नजर आ रहे हैं।
इस एजेंसी को दिया था ठेका
गीता महोत्सव में इलेक्ट्रिफिकेशन का करनाल की एक एजेंसी ठेका पहले 37 लाख 38 हजार 876 रुपये में मिला था, अमर उजाला की खबर के बाद यह टेंडर रद हुआ और रीटेंडर काल किये जाने के बाद यह ठेका दुबारा इसी फर्म को करीब 19 लाख 27 हजार रुपये दिया गया।
केडीबी के मानद सचिव की प्रतिक्रिया
केडीबी के मानद सचिव अशोक सुखीजा ने इन मामलों की जांच कराने और टेंडर की शर्तों की फाइल मंगाकर उनकी जांच कराने की बात कही है। उन्होंने माना कि प्रचार सामग्री के लिए जो फ्लेक्स बनाए गए थे, उसमें ठेका स्टार कंपनी की सामग्री का था। उसकी जगह दोयम दर्जे की सामग्री उपयोग की गई है। उन्होंने बताया कि केडीबी ऑफिस के फ्रंट को नया कलेवर देने के लिए डिजाइन दिखाया गया था। इसी के बाद काम शुरू हुआ था। दफ्तर पर केडीबी का बोर्ड तक नहीं है।
केडीबी के पूर्व मेंबर बोले, ऐसी लूट पहले कभी नहीं मची
केडीबी के पूर्व मेंबर एवं अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के पूर्व अध्यक्ष श्रीप्रकाश मिश्रा और केडीबी के पूर्व मेंबर परीक्षित मदान का कहना है कि वह लंबे समय तक बोर्ड के मेंबर रहे हैं, लेकिन, केडीबी के इतिहास में इतने घपले और बोर्ड में जमीन से लेकर टेंडरों तक ऐसी लूट पहले कभी नहीं देखी। इन्होंने कहा कि मेला क्षेत्र की भूमि नियम कायदों को ताक पर रखकर स्वामी ज्ञानानंद की संस्था को देना सरासर गलत है।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
लूट सके तो लूट ले, राम नाम की लूट...। 15वीं सदी के रहस्यवादी कवि संत कबीर की यह रचना सैकड़ों साल बाद कुरुक्षेत्र में गीता जयंती के दौरान दिख रही है। फर्क इतना है कि उसमें राम का नाम लूटने की बात कही गई है, जबकि कुरुक्षेत्र में गीता जयंती के दौरान ‘दाम’ लूटे जा रहेे हैं। देश, प्रदेश के राजनैतिक दलों के नेता ही नहीं, बल्कि संत समाज और स्थानीय नागरिक भी गीता के नाम पर लूट की बात कह रहे हैं। यह ‘लूट’ लाइट के साथ केडीबी में किए गए निर्माण में भी दिख रही है। घपले की आशंका को इसी से बल मिलता है कि इन दोनों मुद्दों पर कोई भी अधिकारी खुलकर बोलने के लिए राजी नहीं है। एक अधिकारी केवल इतना ही कह रहे हैं, कि मामले की जांच कराई जाएगी।
पिछले दिनों अमर उजाला ने गीता जयंती की टेंडर प्रक्रिया के अलावा सरकारी गीता केंद्र को बंद कर स्वामी ज्ञानानंद की संस्था को मेला क्षेत्र की बेशकीमती नौ एकड़ भूमि देने का मामला उजागर किया था। अब ताजा मामला अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में टेंपरेरी इलेक्ट्रिफिकेशन वर्क में धांधली, प्रचार के लिए लगाए गए फ्लेक्स के अलावा बिना अनुमति के कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ऑफिस के फ्रंट एरिया को लाखों रुपये खर्च कर नया लुक देने का सामने आया है। हालांकि, पूछताछ शुरू होने पर उच्च अधिकारियों ने केडीबी के फ्रंट एरिया का काम रुकवा दिया। साथ ही नए स्ट्रक्चर का काम रोकने के आदेश दे दिए। यह बात कोई भी अधिकारी नहीं बता रहा कि नया स्ट्रक्चर किसके कहने पर लगाया गया था और किसके कहने पर इसे नीचे उतारा गया। इस सबकी वजह से केडीबी भवन को कई जगह से बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है। गौरतलब कि गीता जयंती की भव्य तैयारियों के बीच केडीबी ऑफिस के एंट्री गेट और फ्रंट एरिया को नया लुक देने का काम चार दिन पहले युद्ध स्तर पर शुरू हुआ था। इस निर्माण का ज्यादातर काम लोहे और एल्यूमीनियम शीट से होना था। इस वजह से केडीबी ऑफिस के फ्रंट एरिया में लगे लाल पत्थरों पर दर्जनों नट बोल्ट गाड़ कर इन पर लोहे की कई एंगल लगा दी गई थीं। इन पर वेल्डिंग भी की गई थी। करीब 70 प्रतिशत काम पूरा होने के बाद यह पूरा मामला उच्च अधिकारी के संज्ञान में आ गया। बताया जा रहा है कि उनके एतराज के बाद इस स्ट्रक्चर को उखाड़ दिया गया। हालांकि, साइट पर निर्माण के लिए पूरी सामग्री पहुंच चुकी थी। नए लुक के लिए केडीबी ऑफिस के एंट्री गेट पर लगे पुराने ग्लोसाइन बोर्ड को भी उखाड़ दिया गया था। इस बारे में केडीबी की सीईओ पूजा चांवरिया से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वह कार्यक्रम में हैं। हालांकि, मानद सचिव ने पूरे मामले की जांच का आश्वासन दिया है।
विज्ञापन
टेंडर की शर्तों पर यहां नहीं हुआ काम
1- मेला क्षेत्र में ब्रह्मसरोवर की सभी स्टालों पर चार हजार एलईडी लगाई जानी थीं। आधे से भी कम संख्या में लगाई गई हैं।
2- इंडियन फ्लूड एलईडी लाइट 50 वॉट के 100 पीस लगाए जाने थे, लेकिन सिर्फ 50 पीस लगाए गए।
3- एलईडी पैनल आठ फुट बाई चार फुट के 100 पीस लगाए जाने थे, लेकिन यह भी करीब 30 ही लगाए गए हैं।
4- ब्रह्मसरोवर के मेन गेट और किरमिच रोड वाले मेन गेट पर आठ फुट चौड़े और चार फुट लंबे दो डिजिटल एलईडी पैनल लगने थे। इनमें से एक भी नहीं लगा।
5- टेंडर की शर्तों के तहत छह नंबर पर 10 हजार लड़ियां लगाई जानी थीं। यह सरकारी भवनों और शहर के 18 मुख्य चौराहों पर लगानी थी। इनमें से चुनिंदा स्थानों को छोड़ कर लगभग सभी खाली हैं।
विज्ञापन
6-लड़िया लगाने की शर्तों में दो लड़ियों के बीच में अंतर सिर्फ छह इंच का तय किया गया था, लेकिन वास्तव में दो से तीन फुट की दूरी पर लड़ियां लगाई गई हैं।
प्रशासन की आंखों के सामने चोरी
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव-2017 में टेंपरेरी इलेक्ट्रिफिकेशन के टेंडर की शर्तों में ठेकेदार को कुरुक्षेत्र के चुनिंदा तीर्थों के अलावा 18 मुख्य चौराहों, सरकारी भवनों पर 17 नवंबर से तीन दिसंबर तक लाइटिंग करनी थीं। इनमें से अधिकांश जगहों पर इंडियन एलईडी लड़ियां लगनी थीं। ये स्थान रात में अब भी अंधेरे में डूबे हुए हैं। इनमें जीटीरोड से कुरुक्षेत्र में प्रवेश द्वार पर स्थित गीता द्वार से लेकर सन्निहित तीर्थ का सूर्य द्वार, मुख्य चौराहे, सरकारी भवन और तीर्थ शामिल हैं।
इन चौराहों और भवनों पर नहीं हुई लाइटिंग
महाराणा प्रताप चौक, वाल्मीकि चौक, धन्ना भगत चौक, ब्रह्मकुमारी चौक, जगद्गुरु ब्रह्मानंद चौक पर चार लड़ियां लगाई गई हैं। राव तुलाराम चौक पर नहीं हैं। विश्वकर्मा चौक पर लगी है। अंबेडकर चौक पर लगी हैं। मीरी पीरी चौक, श्रद्धा चौक, अग्रसेन चौक, जिंदल चौक, शहीद ऊधम सिंह चौक, जेसीआई चौक, सेक्टरों के तीन चौराहों, गीता द्वार, सूर्य द्वार पर लड़ियां नहीं लगाई गई हैं। हरियाणा टूरिज्म पिपली पैराकीट, पुलिस लाइन, हुडा ऑफिस, जिमखाना क्लब, पोस्ट ऑफिस, रेलवे स्टेशन पर भी लड़ियां नहीं लगाई गईं। दयालपुर बाण गंगा तीर्थ और अभिमन्यु पुर अमीन के अदिति तीर्थ पर भी लाइटिंग नहीं कराई गई।
कौन कर रहा है निगरानी
प्रशासन टेंडर प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता के दावे कर रहा है। जिस प्राइवेट एजेंसी ने करीब 38 लाख रुपये में टेंपरेरी इलेक्ट्रिफिकेशन का ठेका लिया था। कम दाम में यह काम करने के लिए प्राइवेट फर्म के विरोध का मामला उजागर होने के बाद इस ठेके को रदद् कर रीटेंडर कराए गए थे। लेकिन, ठेका उसी एजेंसी को करीब 19 लाख में मिला। जो एजेंसी पहले यह कार्य करीब 38 लाख में करने का टेंडर भर चुकी थी। आरोप लगाए जा रहे है कि मिलीभगत के चलते उसी प्राइवेट एजेंसी ने खानापूर्ति के लिए लाइटिंग की और अधिकांश चौराहों, प्रवेश द्वारों और मुख्य चौराहे बगैर लाइटिंग के नजर आ रहे हैं।
इस एजेंसी को दिया था ठेका
गीता महोत्सव में इलेक्ट्रिफिकेशन का करनाल की एक एजेंसी ठेका पहले 37 लाख 38 हजार 876 रुपये में मिला था, अमर उजाला की खबर के बाद यह टेंडर रद हुआ और रीटेंडर काल किये जाने के बाद यह ठेका दुबारा इसी फर्म को करीब 19 लाख 27 हजार रुपये दिया गया।
केडीबी के मानद सचिव की प्रतिक्रिया
केडीबी के मानद सचिव अशोक सुखीजा ने इन मामलों की जांच कराने और टेंडर की शर्तों की फाइल मंगाकर उनकी जांच कराने की बात कही है। उन्होंने माना कि प्रचार सामग्री के लिए जो फ्लेक्स बनाए गए थे, उसमें ठेका स्टार कंपनी की सामग्री का था। उसकी जगह दोयम दर्जे की सामग्री उपयोग की गई है। उन्होंने बताया कि केडीबी ऑफिस के फ्रंट को नया कलेवर देने के लिए डिजाइन दिखाया गया था। इसी के बाद काम शुरू हुआ था। दफ्तर पर केडीबी का बोर्ड तक नहीं है।
केडीबी के पूर्व मेंबर बोले, ऐसी लूट पहले कभी नहीं मची
केडीबी के पूर्व मेंबर एवं अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के पूर्व अध्यक्ष श्रीप्रकाश मिश्रा और केडीबी के पूर्व मेंबर परीक्षित मदान का कहना है कि वह लंबे समय तक बोर्ड के मेंबर रहे हैं, लेकिन, केडीबी के इतिहास में इतने घपले और बोर्ड में जमीन से लेकर टेंडरों तक ऐसी लूट पहले कभी नहीं देखी। इन्होंने कहा कि मेला क्षेत्र की भूमि नियम कायदों को ताक पर रखकर स्वामी ज्ञानानंद की संस्था को देना सरासर गलत है।