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Karnal News: एलोवेरा का गलत इस्तेमाल बढ़ा रहा झाइयां
Sat, 05 Apr 2025 01:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sat, 05 Apr 2025 01:39 AM IST
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काजल पांचाल
करनाल। गर्मी का मौसम आते ही महिलाओं में त्वचा संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इनमें खासतौर पर झाइयों की समस्या अधिक देखी जा रही है, जिससे चेहरे पर काले धब्बे और असमान रंगत उभर रही है। जिला नागरिक अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ की ओपीडी से 20 से 25 महिलाएं इस तरह के रोगों से पीड़ित आ रही हैं।
दावा है कि आजकल महिलाएं त्वचा की देखभाल के लिए एलोवेरा के पत्ते का इस्तेमाल कर रही है, लेकिन इसका सीधा चेहरे पर उपयोग नुकसानदायक साबित हो रहा है। त्वचा पर झाइयां बढ़ने का एक प्रमुख कारण ये भी है। जिला नागरिक अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप मान ने बताया कि त्वचा की देखभाल करने के लिए एलोवेरा का गलत उपयोग झाइयों का कारण बन रहा है।
पिछले साल के मुकाबले यह समस्या अधिक बढ़ गई है। पिछले साल इन दिनों जितनी संख्या में मरीज आ रहे हैं, उससे अब 5 से 10 प्रतिशत अधिक हैं। डॉ. मान ने बताया कि ताजा एलोवेरा को सीधे त्वचा पर लगाने से जलन, खुजली और दाग-धब्बे बढ़ रहे हैं। इसका कारण एलोवेरा की पत्तियों में मौजूद प्राकृतिक लेटेक्स (पीले रंग का पदार्थ) है, जो त्वचा पर नुकसान पहुंचाता है, जिससे झाइयों की समस्या हो जाती है और जिन्हें पहले से उनको और अधिक गंभीर होती जा रही है।
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उन्होंने बताया कि बाजार से जो एलोवेरा जेल मिलता है, वह एक प्रक्रिया से तैयार किया जाता है, जिससे उसमें मौजूदा प्राकृतिक लेटेक्स को डिल्यूट या घोल को पतला कर दिया जाता है, जो चेहरे को नुकसान नहीं पहुंचाता। झाइयों और अन्य त्वचा संबंधी समस्याओं से बचने के लिए सही स्किन केयर रुटीन जरूरी है। सिर्फ घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहना सही नहीं है, क्योंकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है। यदि झाइयों की समस्या बढ़ जाए, तो त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श लें। संवाद
बचाव के लिए करें ये उपाय
डाॅ. प्रदीप का कहना है कि एलोवेरा की जगह सही सनस्क्रीन (धूप से बचाव की क्रीम) का उपयोग करना ज्यादा फायदेमंद है। एसपीएफ 30 या उससे अधिक की ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन लगाना चाहिए। अगर एसपीएफ 50 का सनस्क्रीन इस्तेमाल किया जाए तो यह और भी प्रभावी रहेगा। उन्होंने त्वचा के प्रकार के अनुसार सनस्क्रीन चुनने की सलाह दी। जैसे कि शुष्क त्वचा (ड्राई स्किन) के लिए ऑक्टिव ऑक्सलेट युक्त सनस्क्रीन, संवेदनशील और तैलीय त्वचा के लिए टाइटेनियम डाइऑक्साइड या एल्युमिनियम ऑक्साइड युक्त हो, क्योंकि इनमें उच्च एसपीएफ होता है। उन्होंने बताया कि किसी भी नए उत्पाद का उपयोग करने से पहले पैच टेस्ट करना बहुत जरूरी है।
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करनाल। गर्मी का मौसम आते ही महिलाओं में त्वचा संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इनमें खासतौर पर झाइयों की समस्या अधिक देखी जा रही है, जिससे चेहरे पर काले धब्बे और असमान रंगत उभर रही है। जिला नागरिक अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ की ओपीडी से 20 से 25 महिलाएं इस तरह के रोगों से पीड़ित आ रही हैं।
दावा है कि आजकल महिलाएं त्वचा की देखभाल के लिए एलोवेरा के पत्ते का इस्तेमाल कर रही है, लेकिन इसका सीधा चेहरे पर उपयोग नुकसानदायक साबित हो रहा है। त्वचा पर झाइयां बढ़ने का एक प्रमुख कारण ये भी है। जिला नागरिक अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप मान ने बताया कि त्वचा की देखभाल करने के लिए एलोवेरा का गलत उपयोग झाइयों का कारण बन रहा है।
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पिछले साल के मुकाबले यह समस्या अधिक बढ़ गई है। पिछले साल इन दिनों जितनी संख्या में मरीज आ रहे हैं, उससे अब 5 से 10 प्रतिशत अधिक हैं। डॉ. मान ने बताया कि ताजा एलोवेरा को सीधे त्वचा पर लगाने से जलन, खुजली और दाग-धब्बे बढ़ रहे हैं। इसका कारण एलोवेरा की पत्तियों में मौजूद प्राकृतिक लेटेक्स (पीले रंग का पदार्थ) है, जो त्वचा पर नुकसान पहुंचाता है, जिससे झाइयों की समस्या हो जाती है और जिन्हें पहले से उनको और अधिक गंभीर होती जा रही है।
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उन्होंने बताया कि बाजार से जो एलोवेरा जेल मिलता है, वह एक प्रक्रिया से तैयार किया जाता है, जिससे उसमें मौजूदा प्राकृतिक लेटेक्स को डिल्यूट या घोल को पतला कर दिया जाता है, जो चेहरे को नुकसान नहीं पहुंचाता। झाइयों और अन्य त्वचा संबंधी समस्याओं से बचने के लिए सही स्किन केयर रुटीन जरूरी है। सिर्फ घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहना सही नहीं है, क्योंकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है। यदि झाइयों की समस्या बढ़ जाए, तो त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श लें। संवाद
बचाव के लिए करें ये उपाय
डाॅ. प्रदीप का कहना है कि एलोवेरा की जगह सही सनस्क्रीन (धूप से बचाव की क्रीम) का उपयोग करना ज्यादा फायदेमंद है। एसपीएफ 30 या उससे अधिक की ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन लगाना चाहिए। अगर एसपीएफ 50 का सनस्क्रीन इस्तेमाल किया जाए तो यह और भी प्रभावी रहेगा। उन्होंने त्वचा के प्रकार के अनुसार सनस्क्रीन चुनने की सलाह दी। जैसे कि शुष्क त्वचा (ड्राई स्किन) के लिए ऑक्टिव ऑक्सलेट युक्त सनस्क्रीन, संवेदनशील और तैलीय त्वचा के लिए टाइटेनियम डाइऑक्साइड या एल्युमिनियम ऑक्साइड युक्त हो, क्योंकि इनमें उच्च एसपीएफ होता है। उन्होंने बताया कि किसी भी नए उत्पाद का उपयोग करने से पहले पैच टेस्ट करना बहुत जरूरी है।