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Karnal News: पारा गिरने के साथ मनोरोग ओपीडी में बढ़े डिप्रेशन के मरीज

Thu, 27 Nov 2025 01:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Thu, 27 Nov 2025 01:43 AM IST
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With the mercury falling, the number of depression patients in psychiatric OPDs has increased.
डाॅ. सौभाग्य कौ​शिक
संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। पारा गिरने के साथ जिला नागरिक अस्पताल के मनोरोग विभाग में सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर (एसएडी) के मामले तेजी से बढ़े हैं। पूर्व में जहां एसएडी के मरीजों की संख्या 40 फीसदी तक होती थी, वहीं अब ये बढ़कर 60 प्रतिशत हो गई है।
नागरिक अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सौभाग्य ने बताया कि मनोरोग ओपीडी में रोजाना आने वाले मरीजों की संख्या 100-120 तक पहुंच गई है। अक्तूबर में इनकी संख्या 80 के करीब थी। धूप का असर कम होने और ठंड बढ़ने से शरीर में मेलाटोनिन और डोपामाइन पर प्रभाव पड़ता है। मेलाटोनिन और डोपामाइन हार्मोन/न्यूरोट्रांसमीटर हैं। मेलाटोनिन नींद को नियंत्रित करता है, जबकि डोपामाइन प्रेरणा, आनंद और मोटर नियंत्रण में शामिल होता है। इनके कम होने से उदासी बढ़ने लगती है। व्यक्ति की ऊर्जा, नींद और रुटीन तीनों अव्यवस्थित हो जाते हैं। कई लोग अचानक चुप होने लगते हैं, उत्साह खत्म हो जाता है और छोटी-छोटी बातों पर भी मन खराब होने लगता है। यह सामान्य थकान नहीं, बल्कि मौसम से जुड़ा मानसिक बदलाव होता है।
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उन्होंने बताया कि कुछ मरीजों में बेचैनी, चिंता और सामाजिक दूरी जैसे लक्षण भी सामने आ रहे हैं। लोग ठंड बढ़ने के कारण सुस्त होने लगते है क्योंकि घर से बाहर जाना कम कर देते हैं। सामाजिक दूरी के कारण एक-दूसरे से बातचीत भी कम होने लगती है। उत्सुकता भी समाप्त हो जाती है।
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सौभाग्य के अनुसार सबसे कारगर इलाज लाइट थेरेपी साबित हो रही है। मरीजों को सुबह उठते ही सूर्य की रोशनी से संपर्क में आना बहुत फायदेमंद है। लोगों से बातचीत करना और दोस्तों और परिवार के सदस्यों के साथ बात करना बेहद फायदेमंद है। अगर पहले से डिप्रेस्ड है तो काउंसिलिंग ले सकते हैं। सोने के माहौल को भी रीसेट करने की सलाह दी जाती है।



लगातार ये लक्षण दिखें तो सावधान
क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट संतोष ने बताया कि ऊर्जा में अचानक कमी, लगातार उदासी या चिड़चिड़ापन, नींद में गड़बड़ी, भूख कम लगना या ज्यादा लगना, ध्यान न लगना, बातें भूलना, गुस्सा बढ़ना, खुद को नुकसान पहुंचाने जैसे विचार आने जैसे सभी लक्षण सीजनल डिप्रेशन के संकेत हैं। लक्षण एक हफ्ते से अधिक बने रहें तो इसे हल्के में न लें। कई बार कार्य का अधिक भार होने पर भी यही लक्षण दिखते हैं, इसलिए डॉक्टर ही इसकी पुष्टि कर सकते हैं।




- रोजमर्रा की आदतें भी करें मदद
कम्युनिटी हेल्थ नर्सिंग ऑफिसर पूजा ने बताया कि जीवनशैली में छोटे बदलाव इस मौसम को आसान बना सकते हैं। सुबह या शाम को योग और हल्की कसरत, हरी सब्जियां, सलाद और फल ज्यादा लेना, मसालेदार और जंक फूड से दूरी ध्यान और सकारात्मक गतिविधियां बेहतर महसूस कराएंगी। परिवार, दोस्तों से जुड़ना फायदेमंद हो सकता है।
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