Karnal News: कानून बनने से महिलाएं लिखेंगी कामयाबी की नई इबारत
कार्यक्रम का उद्देश्य राजनीति में महिलाओं की भागीदारी और इस नए कानून से समाज में आने वाले बदलावों, महिलाओं की स्थिति में सुधार और विमर्श करना रहा। प्राध्यापिकाओं ने छात्राओं को इस अधिनियम के महत्व व आवश्यकता के बारे में बताया। कार्यक्रम अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से करवाया गया। वहीं, छात्राओं ने कहा कि यह अधिनियम केवल आरक्षण का जरिया नहीं है बल्कि महिलाओं के स्वाभिमान और निर्णायक भूमिका की नई शुरुआत है।
महिलाओं के लिए खुले दरवाजे
प्राध्यापिका डॉ. पिंकी ने कहा कि संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं के लिए बंद दरवाजों को खोलने जैसा है। अब नीति निर्धारण में महिलाओं की भागीदारी से एक संतुलित समाज का निर्माण होगा।
वास्तविक नेतृत्व मिलेगा
प्राध्यापिका डॉ. स्वाति गेरा ने कहा कि यह अधिनियम महिलाओं को वास्तविक नेतृत्व की ओर ले जाएगा। जब महिलाएं कानून बनाएंगी, तो वे महिलाओं की सुरक्षा और शिक्षा के मुद्दों को और मजबूती से उठाएंगी।
राजनीतिक सशक्तीकरण का समय
प्राध्यापिका प्रो. सुरूचि ने कहा कि अब राजनीतिक सशक्तीकरण का समय है। इस कानून से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की महिलाओं में नेतृत्व की नई भावना जागेगी। महिलाओं को आगे आने का मौका मिलेगा।
राजनीति में जगह सुरक्षित
एनसीसी कैडेट स्वाति चौधरी ने कहा कि देश की राजनीति में भी हमारे लिए सुरक्षित जगह होगी। यह अधिनियम प्रतिभावान छात्राओं व महिलाओं को नई राह मिलेगी और भविष्य में सुखद परिणाम देखने को मिलेंगे।
बेटियां करेंगी प्रतिनिधित्व
एनसीसी कैडेट आस्था ने बताया कि राजनीति को पुरुषों का क्षेत्र माना जाता था लेकिन अब तस्वीर बदलने वाली है। बेटियां अब केवल वोट बैंक नहीं होंगी बल्कि वोट मेकर और लॉ मेकर बनकर प्रतिनिधित्व करेंगी।
भागीदारी होगी सुनिश्चित
छात्रा ज्योति ने कहा कि यह अधिनियम महिलाओं के लिए ऐतिहासिक निर्णय है। लोकसभा और विधानसभा में आरक्षण के बाद अन्य स्थानों पर महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रावधान होंगे।

हिंदू कन्या महाविद्यालय में संवाद कार्यक्रम के दौरान चर्चा करतीं प्राध्यापिकाएं और छात्राएं। सं- फोटो : Archive

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हिंदू कन्या महाविद्यालय में संवाद कार्यक्रम के दौरान चर्चा करतीं प्राध्यापिकाएं और छात्राएं। सं- फोटो : Archive

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हिंदू कन्या महाविद्यालय में संवाद कार्यक्रम के दौरान चर्चा करतीं प्राध्यापिकाएं और छात्राएं। सं- फोटो : Archive