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हवा से बनेगी बिजली, हरियाणा में विंड एनर्जी प्लांट लगाने की तैयारी
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गगन तलवार
करनाल। हवा और धूप से सस्ती बिजली बनाने में हरियाणा भी एक और बड़ा कदम बढ़ाने जा रहा है। नेशनल हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचपीसीएल) हरियाणा में सोलर एंड विंड एनर्जी प्लांट लगाने की तैयारी में है। इससे जहां प्रदेश में बिजली उत्पादन बढ़ेगा वहीं लोगों को सस्ती दरों में बिजली मिल सकेगी। प्लांट लगाने को बंजर भूमि उपलब्ध कराने के लिए एनएचपीसीएल की ओर से जल्द प्रदेश सरकार को पत्र लिखा जाएगा। यदि सरकार से स्वीकृति मिली तो तमिलनाडु और जयपुर के बाद हरियाणा देश का तीसरा राज्य होगा जहां सोलर एंड विंड एनर्जी प्लांट लगेगा।
एनएचपीसीएल के स्वतंत्र निदेशक डॉ. अमित कंसल करनाल पहुंचे। पीडब्ल्यूडी विश्राम गृह में अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया कि इस प्लांट से धूप और हवा से बिजली उत्पादन हो सकेगा। सबसे छोटे 100 मेगावाट का प्रोजेक्ट लगाने के लिए कम से कम 500 एकड़ भूमि की जरूरत है। सरकार प्रदेश में कहीं भी उन्हें जमीन उपलब्ध करा दे। हालांकि उनकी प्राथमिकता में जीटी बेल्ट क्षेत्र है। इधर, प्रदेश की स्थिति यह है कि अपने संसाधनों से लगभग 9500 मेगावाट बिजली की उपलब्धता है, जबकि मांग 12768 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। प्रदेश में 73 लाख से ज्यादा बिजली कनेक्शन चल रहे हैं, जिनके लिए 26.40 करोड़ यूनिट बिजली की आपूर्ति होती है। एनएचपीसीएल के देश में हाइड्रो इलेक्ट्रिक के 22 प्रोजेक्ट चल रहे हैं, इसके अलावा तमिलनाडु में सोलर एनर्जी और राजस्थान में विंड एनर्जी का एक-एक प्लांट है।
26 साल के लिए चाहिए जमीन, 18 माह में लगेगा प्रोजेक्ट
स्वतंत्र निदेशक के अनुसार प्रोजेक्ट लगाने का पूरा खर्च केंद्र सरकार की ओर से किया जाएगा। प्रदेश सरकार जो भूमि उपलब्ध कराएगी उसे लीज पर लिया जाएगा। एनएचपीसीएल इसका मानकों के अनुसार किराया भी देगी। उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट के लिए कम से 26 साल के लिए भूमि चाहिए। 18 माह प्रोजेक्ट को स्थापित करने में लगेंगे। 100 मेगावाट से लेकर 500 मेगावाट तक का प्लांट आसानी से स्थापित किया जा सकता है। प्लांट शुरू होते ही बिजली उत्पादन होने लगेगा।
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इको फ्रेंडली प्रोजेक्ट में कार्बन उत्सर्जन न के बराबर
हाइड्रो इलेक्ट्रो प्रोजेक्ट या कोयले से बिजली उत्पादन से कार्बन का भी उत्सर्जन होता है, लेकिन सोलर और विंड एनर्जी प्लांट इको फ्रेंडली भी है। इसमें कार्बन का उत्सर्जन न के बराबर है। स्वतंत्र निदेशक डॉ. अमित कंसल का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण एनएचपीसीएल की प्राथमिकता है। योजना के अनुसार प्लांट के चारों तरफ वे हरियाली भी करते हैं।
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करनाल। हवा और धूप से सस्ती बिजली बनाने में हरियाणा भी एक और बड़ा कदम बढ़ाने जा रहा है। नेशनल हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचपीसीएल) हरियाणा में सोलर एंड विंड एनर्जी प्लांट लगाने की तैयारी में है। इससे जहां प्रदेश में बिजली उत्पादन बढ़ेगा वहीं लोगों को सस्ती दरों में बिजली मिल सकेगी। प्लांट लगाने को बंजर भूमि उपलब्ध कराने के लिए एनएचपीसीएल की ओर से जल्द प्रदेश सरकार को पत्र लिखा जाएगा। यदि सरकार से स्वीकृति मिली तो तमिलनाडु और जयपुर के बाद हरियाणा देश का तीसरा राज्य होगा जहां सोलर एंड विंड एनर्जी प्लांट लगेगा।
एनएचपीसीएल के स्वतंत्र निदेशक डॉ. अमित कंसल करनाल पहुंचे। पीडब्ल्यूडी विश्राम गृह में अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया कि इस प्लांट से धूप और हवा से बिजली उत्पादन हो सकेगा। सबसे छोटे 100 मेगावाट का प्रोजेक्ट लगाने के लिए कम से कम 500 एकड़ भूमि की जरूरत है। सरकार प्रदेश में कहीं भी उन्हें जमीन उपलब्ध करा दे। हालांकि उनकी प्राथमिकता में जीटी बेल्ट क्षेत्र है। इधर, प्रदेश की स्थिति यह है कि अपने संसाधनों से लगभग 9500 मेगावाट बिजली की उपलब्धता है, जबकि मांग 12768 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। प्रदेश में 73 लाख से ज्यादा बिजली कनेक्शन चल रहे हैं, जिनके लिए 26.40 करोड़ यूनिट बिजली की आपूर्ति होती है। एनएचपीसीएल के देश में हाइड्रो इलेक्ट्रिक के 22 प्रोजेक्ट चल रहे हैं, इसके अलावा तमिलनाडु में सोलर एनर्जी और राजस्थान में विंड एनर्जी का एक-एक प्लांट है।
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26 साल के लिए चाहिए जमीन, 18 माह में लगेगा प्रोजेक्ट
स्वतंत्र निदेशक के अनुसार प्रोजेक्ट लगाने का पूरा खर्च केंद्र सरकार की ओर से किया जाएगा। प्रदेश सरकार जो भूमि उपलब्ध कराएगी उसे लीज पर लिया जाएगा। एनएचपीसीएल इसका मानकों के अनुसार किराया भी देगी। उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट के लिए कम से 26 साल के लिए भूमि चाहिए। 18 माह प्रोजेक्ट को स्थापित करने में लगेंगे। 100 मेगावाट से लेकर 500 मेगावाट तक का प्लांट आसानी से स्थापित किया जा सकता है। प्लांट शुरू होते ही बिजली उत्पादन होने लगेगा।
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इको फ्रेंडली प्रोजेक्ट में कार्बन उत्सर्जन न के बराबर
हाइड्रो इलेक्ट्रो प्रोजेक्ट या कोयले से बिजली उत्पादन से कार्बन का भी उत्सर्जन होता है, लेकिन सोलर और विंड एनर्जी प्लांट इको फ्रेंडली भी है। इसमें कार्बन का उत्सर्जन न के बराबर है। स्वतंत्र निदेशक डॉ. अमित कंसल का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण एनएचपीसीएल की प्राथमिकता है। योजना के अनुसार प्लांट के चारों तरफ वे हरियाली भी करते हैं।