...तो महाराष्ट्र में भेजे जाएंगे हरियाणा के बैल
प्रदेश के सभी शहरों की सड़कों पर लावारिस घूम कर हादसों का कारण बन रहे गोवंश को बचाने के लिए प्रदेश सरकार ने महाराष्ट्र सरकार के साथ समझौता किया है। इसके तहत महाराष्ट्र सरकार ने हरियाणा से बैल खरीदने की मांग की है। हरियाणा गो सेवा आयोग द्वारा निर्णय लिया गया है कि अच्छे बैल महाराष्ट्र सरकार को भेजे जाएं, चूंकि महाराष्ट्र के अधिकतर क्षेत्र में बैलों द्वारा खेती की जाती है। इसके अलावा, प्रदेश से गो सेवा दलों की सूचियां मंगवाई गई हैं इन दलों में शामिल लोगों को पुलिस वेरिफिकेशन के बाद पहचान पत्र जारी किए जाएंगे, ताकि गौ संरक्षण कानून को सही तरीके से लागू किया जा सके। यह जानकारी हरियाणा गो सेवा आयोग के चेयरमैन भानी राम मंगला ने लघु सचिवालय में प्रेसवार्ता के दौरान दी।
चेयरमैन ने बताया कि हरियाणा के सिरसा, भिवानी, हिसार, यमुनानगर और पानीपत में गो अभ्यारण्य खोले जाएंगे। प्रदेश में 426 गोशालाएं हैं, जिनमें 3 लाख 17 हजार गोवंश हैं। इसके बावजूद एक लाख 20 हजार से अधिक गोवंश खुले में घूम रहे हैं। ऐसे गोवंशों के लिए गोशालाओं का निर्माण करवाया जाएगा। अध्यक्ष मंगला ने बताया कि गोशालाओं में जैविक खाद भी तैयार किया जाएगा और सौर ऊर्जा पर आधारित बिजली की व्यवस्था भी की जाएगी। इतना ही नहीं गोबर गैस प्लांट से खाना पकाने की व्यवस्था भी की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि गोमूत्र से कीटनाशक दवाईयां भी बनाई जाएंगी।
इसके अलावा फिनाइल भी बनाया जाएगा जो कि सरकारी अस्पतालों और घरों में इस्तेमाल में लाया जाएगा। इस दौरान गो संरक्षण की प्रदेश प्रभारी डीआईजी भारती अरोड़ा भी मौजूद रहीं। दोनों ने गो रक्षा के लिए पुलिस अधिकारियों की बैठक ली और उन्हें गो रक्षा के लिए बनाए गए नए कानून की जानकारी दी। इस दौरान एसपी पंकज नैन, हरियाणा गौ सेवा आयोग के सचिव ओपी छिक्कारा भी उपस्थित रहे।
हर जिले में 17 पुलिस अधिकारियों की टीम : भारती
गो संरक्षण की प्रदेश प्रभारी डीआईजी भारती अरोड़ा ने बताया कि प्रदेश में गो संरक्षण एवं संवर्धन के लिए पुलिस द्वारा अपना कार्य पहले ही शुरू किया जा चुका है। इसके लिए प्रदेश में टास्क फोर्स जिला स्तर पर बनाई है। इसमें 17 पुलिस अधिकारियों की टीम होगी, जो सौंपी गई ड्यूटी के अनुसार कार्य करेगी। ऐसा सख्त कानून प्रदेश में बनाया गया है जिसके तहत संबंधित दोषियों के लिए सजा का कड़ा प्रावधान है। यह एक्ट नवंबर, 2015 से लागू हो चुका है। अब गाय की हत्या करने वाले को तीन वर्ष से 10 वर्ष तक की कैद व 30 हजार रुपये से एक लाख रुपये का जुर्माना होगा।
जुर्माना न भरने की सूरत में अतिरिक्त सजा का भी प्रावधान है। अब गऊ माता को मारने वाले व्यक्ति कानून के शिकंजे से नहीं बच सकेंगे। गायों को गोकशी के लिए ले जाने वाले पर कानून के अनुसार कम से कम 3 वर्ष की कैद तथा 30 हजार रुपये जुर्माना व अधिकतम 7 वर्ष की कैद तथा 70 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। गऊ का मास बेचने वाले व्यक्ति पर भी कानून के तहत तीन वर्ष की कैद व 30 हजार रुपये जुर्माना तथा अधिकतम पांच साल की कैद व 30 हजार रुपये से 50 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।