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जब-जब धरा पर पाप बढ़ा तो भगवान आए : शास्त्री
Sat, 07 Jun 2025 01:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sat, 07 Jun 2025 01:45 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। न्यू रमेश नगर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचन करते हुए सर्वेश कृष्ण शास्त्री ने कहा कि जब जब इस धरा पर पाप का भार बढ़ा है, तब तब भगवान इस धरा पर अवतरित हुए और पाप का नाश किया और धर्म की स्थापना।
उन्होंने कहा कि जब श्रीकृष्ण जी को यशोदा के पास छोड़ा गया तो उसको मारने के लिए पूतना सुंदर रूप धारण कर जश्न में पहुंच गई और कान्हा जी को लेकर दूध पिलाने लगी।
कान्हा जी ने पहले विष पिया फिर दूध पीकर मां बना दिया और उसके बाद पूतना की जीवन लीला समाप्त कर दी। उन्होंने बताया कि नंद को पवित्र है, गोकुल है हमारा शरीर और पूतना अपवित्र हैं। अगर आप अपने मन को पवित्र रखेगे तो पूतना कभी आपके पास नही आएगी। कथा प्रवचन और धार्मिक आयोजन भी उन्हें अच्छे लगते जो पवित्र होते हैं।
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हदय जिसका निर्मल है प्रभु उसके ही अंदर रहते हैं वहीं प्रभु को बुलाने के लिए दिल को निर्मल रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि गाय, गायत्री और गीता की पूजा करनी चाहिए, लेकिन हम सभी इन तीनों चीजों से दूर होते जा रहे है।
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करनाल। न्यू रमेश नगर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचन करते हुए सर्वेश कृष्ण शास्त्री ने कहा कि जब जब इस धरा पर पाप का भार बढ़ा है, तब तब भगवान इस धरा पर अवतरित हुए और पाप का नाश किया और धर्म की स्थापना।
उन्होंने कहा कि जब श्रीकृष्ण जी को यशोदा के पास छोड़ा गया तो उसको मारने के लिए पूतना सुंदर रूप धारण कर जश्न में पहुंच गई और कान्हा जी को लेकर दूध पिलाने लगी।
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कान्हा जी ने पहले विष पिया फिर दूध पीकर मां बना दिया और उसके बाद पूतना की जीवन लीला समाप्त कर दी। उन्होंने बताया कि नंद को पवित्र है, गोकुल है हमारा शरीर और पूतना अपवित्र हैं। अगर आप अपने मन को पवित्र रखेगे तो पूतना कभी आपके पास नही आएगी। कथा प्रवचन और धार्मिक आयोजन भी उन्हें अच्छे लगते जो पवित्र होते हैं।
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हदय जिसका निर्मल है प्रभु उसके ही अंदर रहते हैं वहीं प्रभु को बुलाने के लिए दिल को निर्मल रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि गाय, गायत्री और गीता की पूजा करनी चाहिए, लेकिन हम सभी इन तीनों चीजों से दूर होते जा रहे है।