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Karnal News: विनय को इंजीनियर बनाना चाहते थे पिता, जिद से बन गया नौ सैनिक

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 25 Apr 2025 02:33 AM IST
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Vinay's father wanted him to be an engineer but he stubbornly became a naval soldier
- बीटेक के तीसरे वर्ष में लेफ्टिनेंट विनय ने सैन्य अधिकारी बनने की ठानी थी, दो बार वायुसेना में पायलट बनने से चूके
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- स्कूल में पहली से 12वीं तक रहे अव्वल, नौसेना में पहले प्रयास में ही मिली सफलता, डेढ़ साल पहले हुई थी पदोन्नति

गगन तलवार

करनाल। नौसेना के लेफ्टिनेंट विनय नरवाल को माता-पिता इंजीनियर बनाना चाहते थे। लेकिन बेटे की जिद ने उनके फैसले को पलट दिया और बेटा अपनी मेहनत और अभिभावकों के आशीर्वाद से नौसेना में भर्ती हो गया। मगर उसकी तकदीर में देश की सेवा लंबे समय तक नहीं लिखी थी। इसलिए बहादुर बेटा हनीमून के दौरान कश्मीर के पहलगाम में तीन वर्ष के सेवाकाल में ही कायर आतंकियों की गोली का शिकार हो गया।

परिवार के अनुसार, बीटेक के तीसरे वर्ष में विनय नरवाल ने इंजीनियर की नौकरी न करने और सैन्य अधिकारी बनने का मन बनाया था। बेटे की इच्छा के आगे परिवार ने कोई सवाल नहीं उठाया और उसकी इच्छा को देखते हुए उसे तैयारी करने दी। वायुसेना में पायलट की नौकरी के लिए उसने दो बार प्रयास किया लेकिन चूक गया। इसके बाद पहले ही प्रयास में उसे नौसेना में नौकरी मिल गई। खास बात यह है कि करीब डेढ़ वर्ष पहले ही उसे लेफ्टिनेंट के पद पर पदोन्नति मिली थी।
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पिता राजेश नरवाल के अनुसार, सेंट कबीर स्कूल से विनय ने पढ़ाई की। यहां हमेशा वह अपनी कक्षा में पहले या दूसरे स्थान पर रहा। इस उपलब्धियों पर उसे स्कूल की ओर से भी हर वर्ष सम्मानित किया जाता था।
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पिता बोले, मेरे बेटे ने डैशिंग ऑफिसर के रूप में दीं सेवाएं

बेटे का संघर्ष सुनाते हुए पिता राजेश नरवाल का कई बार गला भर आया। पिता के अनुसार, स्कूल की पढ़ाई पूरी होने के बाद ले. विनय नरवाल का सोनीपत के इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला करा दिया था। यहां भी उनका शैक्षणिक गतिविधियों में शानदार प्रदर्शन रहा। उन्होंने बताया कि जैसे ही वह इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान तीसरे वर्ष में पहुंचा तो उसने उनसे कहा कि पापा मुझे इंजीनियर के रूप में नौकरी नहीं करनी और सरकारी अधिकारी बनना है। बेटे की इच्छा के आगे पिता ने एक बार भी नहीं पूछा कि क्यों इंजीनियर के रूप में निजी नौकरी वह नहीं करना चाहता। इसके बाद विनय ने सेना में अधिकारी के रूप में कार्य करने का मन बनाया। इसमें उसकी रुचि बढ़ने लगी थी और तैयारी में भी जुट गया।

शुरुआत में वह वायुसेना में हाइडल पायलट बनना चाहता था। इसके लिए उसने दो बार प्रयास भी किया। लेकिन हाइट के कारण उसका चयन नहीं हो पाया। इसके बाद विनय ने नौसेना में जाने का मन बनाया और पहले ही प्रयास में उसे सफलता मिल गई। उन्होंने कहा कि मेरे बेटे ने डैशिंग ऑफिसर के रूप में सेवाएं दीं।
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