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सब्जियों, फलों, मसालों को मिलेगा बीमा कवर
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करनाल। किसानों की आय को दोगुना करने बागवानी फसलों में होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए प्रदेश सरकार द्वारा बागवानी बीमा योजना चलाई जा रही है। उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने बताया कि यह योजना किसानों को सब्जियों, फलों व मसालों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले जोखिम से मुक्त कर फसल लागत की भरपाई करने में कारगर साबित होगी। बागवानी किसानों को विभिन्न कारणों से भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता है। फसलों में बीमारी लगने, असमय वर्षा, तूफान, सूखा और तापमान बढ़ने जैसी आपदाओं से उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है। इस योजना के तहत 21 सब्जियों, फल और मसाले की फसलों को सुरक्षा कवर उपलब्ध करवाया जाएगा।
जिला बागवानी अधिकारी जोगिंद्र बिसला ने बताया कि सब्जियों में टमाटर, प्याज, आलू, फूल गोभी, मटर, गाजर, भिंडी, घीया, करेला, बैंगन, हरी मिर्च, शिमला मिर्च, पत्ता गोभी, व मूली वहीं फलों की फसलों में आम, किन्नू, बेर व अमरुद सहित मसालों में हल्दी व लहसुन की फसलों को योजना के तहत सूचीबद्ध किया गया है। सब्जियों व मसालों पर 30000 रुपये प्रति एकड़ का बीमा किया जाएगा। जिसके लिए किसान को 750 रुपये प्रति एकड़ भुगतान करना होगा। वहीं फलों की खेती पर 1000 प्रति एकड़ का प्रीमियम देखकर किसान 40000 रुपये प्रति एकड़ का बीमा करवा सकता है। योजना के तहत बीमा दावे का निपटारा करने के लिए सर्वे किया जाएगा। जिसके तहत फसल नुकसान को चार श्रेणियों - 25 प्रतिशत, 50 प्रतिशत, 75 और 100 प्रतिशत- में आंका जाएगा। इस योजना का लाभ लेने के लिए उत्पादक का मेरी फसल मेरा ब्यौरा पर रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य है।
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जिला बागवानी अधिकारी जोगिंद्र बिसला ने बताया कि सब्जियों में टमाटर, प्याज, आलू, फूल गोभी, मटर, गाजर, भिंडी, घीया, करेला, बैंगन, हरी मिर्च, शिमला मिर्च, पत्ता गोभी, व मूली वहीं फलों की फसलों में आम, किन्नू, बेर व अमरुद सहित मसालों में हल्दी व लहसुन की फसलों को योजना के तहत सूचीबद्ध किया गया है। सब्जियों व मसालों पर 30000 रुपये प्रति एकड़ का बीमा किया जाएगा। जिसके लिए किसान को 750 रुपये प्रति एकड़ भुगतान करना होगा। वहीं फलों की खेती पर 1000 प्रति एकड़ का प्रीमियम देखकर किसान 40000 रुपये प्रति एकड़ का बीमा करवा सकता है। योजना के तहत बीमा दावे का निपटारा करने के लिए सर्वे किया जाएगा। जिसके तहत फसल नुकसान को चार श्रेणियों - 25 प्रतिशत, 50 प्रतिशत, 75 और 100 प्रतिशत- में आंका जाएगा। इस योजना का लाभ लेने के लिए उत्पादक का मेरी फसल मेरा ब्यौरा पर रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य है।
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