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Karnal News: किताबों से ज्ञान लेने के साथ प्राकृतिक खेती का समझा महत्व

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 23 Aug 2024 07:04 AM IST
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Understand the importance of natural farming along with taking knowledge from books.
हिंदी भाषा में हैं देश को बांधने की ताकत : डॉ. देव
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एसडी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में राज्य स्तरीय सात दिवसीय पानीपत महोत्सव तृतीय पुस्तक मेला का छठा दिन

संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। एसडी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में राज्य स्तरीय सात दिवसीय पानीपत महोत्सव तृतीय पुस्तक मेले का वीरवार को छठा दिन रहा। मुख्य अतिथि रोहतक मंडल के आईएफएस संरक्षक सुभाष यादव ने शिरकत की। कार्यक्रम के प्रेरणास्रोत और मार्गदर्शक कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के महानिदेशक राज नारायण कौशिक रहे।
कार्यक्रम की प्रस्तावना भारतीय गेहूं व जौं अनुसंधान केंद्र करनाल के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अनुज कुमार राय ने रखी। मुख्य व्याख्यान केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान करनाल के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सुरेश कुमार ने दिया। उनके साथ डॉ. कैलाश और सुनील मलिक ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। प्रथम सत्र का थीम प्रकृति खेती समय की पहल रहा।
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शाम के सत्र में राजभाषा हिंदी के क्षितिज का विस्तार विषय पर कार्यशाला का आयोजन नगर राजभाषा क्रियान्वन समिति पानीपत द्वारा किया गया। इसमें मुख्यातिथि जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय के भारतीय भाषा संस्थान से डॉ. देव शंकर झा नवीन रहे। अध्यक्षता इंडियन ऑयल महाप्रबंधक विवेक नारायण ने की। राजभाषा प्रभारी आशुतोष चंद्र झा भी कार्यशाला में उपस्थित हुए। समिति के 42 सदस्यों, कर्मचारियों, राजभाषा अधिकारियों और कार्यालय प्रमुख ने कार्यशाला में हिस्सा लिया। प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा, डॉ. संगीता गुप्ता, डॉ. संतोष कुमारी और डॉ. राकेश गर्ग ने अतिथियों का स्वागत किया।
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सुभाष यादव ने कहा कि आधुनिक युग का इंसान मोबाइल तक सीमित हो गया है, जबकि उसे पुस्तकों के साथ खुद को जोड़ना चाहिए। खेती के प्राचीन तरीके ही मानव जाती का कल्याण करेंगे। प्राकृतिक खेती ही उत्पन्न समस्याओं का एकमात्र हल है। डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि युवा जितनी अधिक पुस्तक पढ़ेगा, वह उतना ही पारंगत बनेगा। डॉ. अनुज कुमार राय ने कहा कि इंसान को खुद के लिए नहीं वरना समाज के लिए जीना चाहिए। डॉ. देव शंकर झा नवीन ने कहा कि राजभाषा में पूरे देश को एक सूत्र में बांधने की ताकत है।
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