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एनडीआरआई में मुर्राह भैंस के दो और क्लोन किए तैयार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 04 Feb 2022 02:06 AM IST
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Two more clones of Murrah buffalo ready in NDRI
राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) में मुर्राह नस्ल की भैंस के दो नए क्लोन (एक नर और एक मादा) का जन्म हुआ है। मुर्राह कटड़ा 26 जनवरी 2022 को पैदा हुआ, इसलिए इसका नाम ‘गणतंत्र’ रखा गया है, जबकि क्लोन कटड़ी ‘कर्णिका’ का जन्म 20 दिसंबर 2021 को हुआ। यह जानकारी एनडीआरआई के निदेशक डॉ. मनमोहन सिंह चौहान ने दी।
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उन्होंने बताया कि ‘कर्णिका’ को पैदा करने के लिए केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान हिसार से जो सेल लिया गया था, उसका पूरे ब्यांत में 6089 किलोग्राम दूध देने का रिकॉर्ड है। वहीं ‘गणतंत्र’ को पैदा करने के लिए जिस भैंस की कोशिकाएं ली गई थीं उसकी मां का 16 किलोग्राम प्रतिदिन दूध देने का रिकॉर्ड रहा है। उन्होंने कहा कि ये क्लोन बड़े हाई जेनेटिक मैटीरियल वाले हैं। इस तकनीक से हूबहू बच्चे का जन्म होता है। कृत्रिम गर्भाधान के लिए अच्छी नस्ल और उच्च गुणवत्ता वाली भैंसों की तेजी से संख्या और दूध उत्पादन बढ़ाने में यह तकनीक मील का पत्थर साबित होगी।
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इसके अलावा संस्थान में गिर व साहिवाल नस्ल की गाय की क्लोनिंग पर भी काम शुरू हो चुका है। क्लोनिंग तकनीक स्वदेशी है पर इसमें इस्तेमाल किया जाने वाला सामान आयात करना पड़ता है। एक क्लोन बच्चे के जन्म पर करीब 15 हजार रुपये खर्च आता है।
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नए क्लोन तैयार करने में शामिल वैज्ञानिक
क्लोन को तैयार करने वाले वैज्ञानिकों की टीम में डॉ. मनोज कुमार सिंह, डॉ. नरेश सेलोकर, डॉ. एसएस लठवाल, डॉ. सुभाष कुमार, कार्तिक पटेल व रिंका कुमारी शामिल रहे हैं।
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छह बच्चे दे चुकी गरिमा
संस्थान के प्रवक्ता एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एके डांग ने बताया कि 2009 में संस्थान में हैंड गाइडेड क्लोनिंग तकनीक से कटड़ी का जन्म हुआ था। 2010 में दूसरी क्लोन कटड़ी ‘गरिमा’ पैदा हुई जो अब तक छह बच्चे दे चुकी है। गरिमा की तीसरे ब्यांत में दूध देने की क्षमता 12 किलोग्राम प्रतिदिन रही है। केंद्र सरकार ने 2025 के अंत तक कृत्रिम गर्भाधान के कवरेज को मौजूदा 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 90 प्रतिशत करने का लक्ष्य दिया है। ऐसे में प्रजनन के लिए उच्च आनुवंशिक वाले सांडों के वीर्य की भारी आवश्यकता है।

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क्या है क्लोनिंग तकनीक
वैज्ञानिक डॉ. नरेश सेलोकर और डॉ. मनोज कुमार सिंह ने बताया कि जिस भैंस का क्लोन करना है उसकी कोशिकाओं को प्रयोगशाला में संवर्धन (कल्चर) करते हैं, जो सेल संवर्धन किया उसका मिलाप स्लॉटर हाउस से प्राप्त ओवरी में केंद्रक रहित अंडाणु से करते हैं। इससे वह आठवें दिन भ्रूण बन जाता है। फिर भ्रूण को भैंस के गर्भाशय में स्थानांतरित करते हैं। उसके बाद करीब दस महीने दस दिन में क्लोन बच्चे का जन्म होता है। इस प्रक्रिया में जिस जानवर की कोशिकाएं ली गई थी यह बच्चा हूबहू उसके समान होता है। इस तकनीक में लिंग निर्धारण पहले से तय है। नर का सेल लेंगे तो नर और मादा का सेल लेंगे तो मादा का ही जन्म होगा।
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