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पानीपत के तीसरे युद्ध के वीर मराठों को दी श्रद्धांजल
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घरौंडा। पानीपत के तीसरे युद्ध के 261 वर्ष पूर्ण होने पर शुक्रवार को बसताड़ा स्थित स्टेडियम में आयोजित शौर्य दिवस समारोह का आयोजन किया गया। इसमें मराठों की वीरता का इतिहास सुनाया गया। कार्यक्रम में देश के कई राज्यों से पहुंचे मराठा और पाल समाज के लोगों ने अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित की। वीरेंद्र मराठा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की और तीसरे युद्ध के बाद की सामाजिक और भौगोलिक परिस्थितियों के बारे में बताया।
मुख्य अतिथि पशुधन विकास योजना के चेयरमैन रणधीर गोलन ने कार्यक्रम में ध्वजारोहण किया। उन्होंने कहा कि पानीपत के तीसरे युद्ध में देश की रक्षा के लिए लाखों मराठा शहीद हो गए। पानीपत का तीसरा युद्ध इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि जो मराठा योद्धा इस युद्ध में बचे गए थे, वे वापस नहीं गए और यहीं पानीपत व कुरुक्षेत्र के ढाक के जंगलों में अपना बसेरा बनाकर रहने लगे। पता चला है कि मराठों में 96 वंश हैं। उन्हीं में एक रोड़वंश भी है। यहां रहने वालों ने अपने आपको रोड़वंशी कहना शुरू कर दिया और धीरे धीरे अपनी पहचान को ही भूल गए। अब बीस वर्ष पहले हमें पता चला कि हम उन्हीं महान योद्धाओं के वंशज हैं। 2003 में बसताड़ा स्टेडियम में पहली बार पानीपत युद्ध के बलिदानियों को याद किया गया था।
विधायक हरविंद्र कल्याण ने कहा कि यह दिन उन वीर योद्धाओं को याद करने का है जिन्होंने देश की अखंडता के लिए भारत पर हो रहे आक्रमणों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। पानीपत के तीसरे युद्ध के बाद किसी भी विदेशी अक्रांता ने भारत पर आक्रमण करने की हिम्मत नहीं जुटाई। शिवाजी महाराज में वीरता और भक्ति कूट-कूट कर भरी हुई थी।
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विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रसिद्ध इतिहासकार मधुसूदन होल्कर व विजेंद्र जाधव धनगर इतिहासकार-गाजियाबाद ने शिरकत की। इस मौके पर गोवा से राजाराम पाटिल, उत्तरप्रदेश से गौरव सिंह राठौड़, राजस्थान से घनश्याम होल्कर, मैसूर से रामचंद्र राव जगप्रताप, बेंगलुरु से भारत कदम, उत्तराखंड से देवेंद्र गंगवार, महाराष्ट्र से राष्ट्रीय समन्वयक एवं मुख्य संयोजक मिलिंद पाटिल, अहमदनगर से माधव राव तिटमे, रमेश राव देशमुख, उस्मानाबाद से योगिता ताई मिसाल, अमर गाडवे, ठाणे से संजय जाधव, संगीता ताई जाधव, पनवेल से संजय ताई दलवी रणरागिनी, सागर चिखले, परभणी से आत्मा राम मुट्ठल, माधुरी पाटिल व पुणे से प्रशांत जाधव मौजूद रहे।
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मुख्य अतिथि पशुधन विकास योजना के चेयरमैन रणधीर गोलन ने कार्यक्रम में ध्वजारोहण किया। उन्होंने कहा कि पानीपत के तीसरे युद्ध में देश की रक्षा के लिए लाखों मराठा शहीद हो गए। पानीपत का तीसरा युद्ध इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि जो मराठा योद्धा इस युद्ध में बचे गए थे, वे वापस नहीं गए और यहीं पानीपत व कुरुक्षेत्र के ढाक के जंगलों में अपना बसेरा बनाकर रहने लगे। पता चला है कि मराठों में 96 वंश हैं। उन्हीं में एक रोड़वंश भी है। यहां रहने वालों ने अपने आपको रोड़वंशी कहना शुरू कर दिया और धीरे धीरे अपनी पहचान को ही भूल गए। अब बीस वर्ष पहले हमें पता चला कि हम उन्हीं महान योद्धाओं के वंशज हैं। 2003 में बसताड़ा स्टेडियम में पहली बार पानीपत युद्ध के बलिदानियों को याद किया गया था।
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विधायक हरविंद्र कल्याण ने कहा कि यह दिन उन वीर योद्धाओं को याद करने का है जिन्होंने देश की अखंडता के लिए भारत पर हो रहे आक्रमणों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। पानीपत के तीसरे युद्ध के बाद किसी भी विदेशी अक्रांता ने भारत पर आक्रमण करने की हिम्मत नहीं जुटाई। शिवाजी महाराज में वीरता और भक्ति कूट-कूट कर भरी हुई थी।
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विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रसिद्ध इतिहासकार मधुसूदन होल्कर व विजेंद्र जाधव धनगर इतिहासकार-गाजियाबाद ने शिरकत की। इस मौके पर गोवा से राजाराम पाटिल, उत्तरप्रदेश से गौरव सिंह राठौड़, राजस्थान से घनश्याम होल्कर, मैसूर से रामचंद्र राव जगप्रताप, बेंगलुरु से भारत कदम, उत्तराखंड से देवेंद्र गंगवार, महाराष्ट्र से राष्ट्रीय समन्वयक एवं मुख्य संयोजक मिलिंद पाटिल, अहमदनगर से माधव राव तिटमे, रमेश राव देशमुख, उस्मानाबाद से योगिता ताई मिसाल, अमर गाडवे, ठाणे से संजय जाधव, संगीता ताई जाधव, पनवेल से संजय ताई दलवी रणरागिनी, सागर चिखले, परभणी से आत्मा राम मुट्ठल, माधुरी पाटिल व पुणे से प्रशांत जाधव मौजूद रहे।