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शिक्षकों की कमी पर गरजे विद्यार्थी
असंध
Updated Tue, 24 Sep 2013 10:38 PM IST
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राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों ने मंगलवार को अपनी मांगों के लिए जोरदार प्रदर्शन कर शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों व शिक्षा मंत्री के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। हाथों में तख्तियां थामे प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने शिक्षा विभाग व सरकार के खिलाफ रोष जताया।
सबसे पहले एआईएसएफ के बैनर तले विद्यार्थी सालवन चौक पर एकत्रित हुए व वहां से जुलूस की शक्ल में नारेबाजी करते हुए रावमा विद्यालय के मुख्य द्वार के समक्ष पहुंचे। यहां भी नारेबाजी की व बाद में धरने पर बैठ गए।
प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ एकजुटता का इजहार करने पहुंचे हरियाणा किसान सभा के महासचिव सतपाल बैनीवाल ने बताया कि पिछले दिनों करनाल में हुई जिलास्तरीय खेलकूद प्रतिस्पर्धा में राजकीय पाठशाला की तीन टीमों ने थ्रो बॉल प्रतिस्पर्धा में पहला स्थान हासिल किया था।
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बावजूद इसके इन खिलाड़ियों के राज्यस्तरीय खेलों में शिरकत के लिए प्रवेश फॉर्म ही भरवाए गए व खिलाड़ियों को इससे वंचित रखा गया। इसे लेकर छात्रों में गहरा रोष है। जब से यहां विज्ञान व वाणिज्य के संकाय स्थापित हुए हैं तभी से यहां इन दोनों संकायों के शिक्षक ही नहीं हैं।
पाठशाला प्रबंधन की ओर से शिक्षकों की वैकल्पिक व्यवस्था की गई है उसके लिए छात्रों को प्रतिमाह प्रति छात्र तीन सौ रुपये की राशि अदा करनी पड़ती है। खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय का भवन भी विद्यालय परिसर के अंदर ही है। यहां सरकारी कार्य से लोगों व अन्य कर्मचारियों का विद्यालय परिसर से होते हुए आना जाना लगा रहता है।
इससे छात्रों की पढ़ाई में व्यवधान पड़ता है क्योंकि इससे पढ़ा रहे शिक्षकों व विद्यार्थियों का ध्यान भंग होता है। खेलों का सामान कमरों में बंद पड़ा रहता व खिलाड़ियों को उपलब्ध ही नहीं कराया जाता। प्रधानाचार्या का तबादला, विज्ञान व वाणिज्य संकायों एवं डीपीआई व पीटीआई के रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्तियों, खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय अन्यत्र स्थानांतरित करने, खेलते समय बच्चों को खेलों का सामान मैदान में उपलब्ध कराने, छात्र संख्या को देखते हुए कम से कम आधा दर्जन कमरे और बनवाने सहित विभिन्न मांगें उठाई गई।
बाद में प्रिंसिपल निर्मल शर्मा प्रदर्शनकारी छात्रों के मध्य पहुंची व उन्होंने बच्चों को समझाया। उन्होंने बताया कि छात्रों को खेलों से वंचित रखने का विद्यालय प्रबंधन व प्रशासन का कोई इरादा नहीं था। दरअसल ऐसा डीपी अथवा पीटीआई न होने की वजह से किया गया।
जहां तक वैकल्पिक शिक्षकों की बात है ऐसा केवल इसलिए किया गया क्योंकि सरकार की ओर से यहां नियमित शिक्षकों की नियुक्ति ही नहीं की गई। छात्रों से 300 नहीं बल्कि महज डेढ़ सौ रुपये प्रतिमाह वसूल कर संबंधित शिक्षकों को भुगतान किया जा रहा है। ऐसा छात्रों की पढ़ाई व भविष्य को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। मोहित, विजय, रमन, मनदीप सिंह, प्रदीप कुमार, अमित, साहिल, रविंद्र, राजकुमार, सोनू, नंदलाल, धमेंद्र मौजूद थे।
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सबसे पहले एआईएसएफ के बैनर तले विद्यार्थी सालवन चौक पर एकत्रित हुए व वहां से जुलूस की शक्ल में नारेबाजी करते हुए रावमा विद्यालय के मुख्य द्वार के समक्ष पहुंचे। यहां भी नारेबाजी की व बाद में धरने पर बैठ गए।
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प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ एकजुटता का इजहार करने पहुंचे हरियाणा किसान सभा के महासचिव सतपाल बैनीवाल ने बताया कि पिछले दिनों करनाल में हुई जिलास्तरीय खेलकूद प्रतिस्पर्धा में राजकीय पाठशाला की तीन टीमों ने थ्रो बॉल प्रतिस्पर्धा में पहला स्थान हासिल किया था।
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बावजूद इसके इन खिलाड़ियों के राज्यस्तरीय खेलों में शिरकत के लिए प्रवेश फॉर्म ही भरवाए गए व खिलाड़ियों को इससे वंचित रखा गया। इसे लेकर छात्रों में गहरा रोष है। जब से यहां विज्ञान व वाणिज्य के संकाय स्थापित हुए हैं तभी से यहां इन दोनों संकायों के शिक्षक ही नहीं हैं।
पाठशाला प्रबंधन की ओर से शिक्षकों की वैकल्पिक व्यवस्था की गई है उसके लिए छात्रों को प्रतिमाह प्रति छात्र तीन सौ रुपये की राशि अदा करनी पड़ती है। खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय का भवन भी विद्यालय परिसर के अंदर ही है। यहां सरकारी कार्य से लोगों व अन्य कर्मचारियों का विद्यालय परिसर से होते हुए आना जाना लगा रहता है।
इससे छात्रों की पढ़ाई में व्यवधान पड़ता है क्योंकि इससे पढ़ा रहे शिक्षकों व विद्यार्थियों का ध्यान भंग होता है। खेलों का सामान कमरों में बंद पड़ा रहता व खिलाड़ियों को उपलब्ध ही नहीं कराया जाता। प्रधानाचार्या का तबादला, विज्ञान व वाणिज्य संकायों एवं डीपीआई व पीटीआई के रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्तियों, खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय अन्यत्र स्थानांतरित करने, खेलते समय बच्चों को खेलों का सामान मैदान में उपलब्ध कराने, छात्र संख्या को देखते हुए कम से कम आधा दर्जन कमरे और बनवाने सहित विभिन्न मांगें उठाई गई।
बाद में प्रिंसिपल निर्मल शर्मा प्रदर्शनकारी छात्रों के मध्य पहुंची व उन्होंने बच्चों को समझाया। उन्होंने बताया कि छात्रों को खेलों से वंचित रखने का विद्यालय प्रबंधन व प्रशासन का कोई इरादा नहीं था। दरअसल ऐसा डीपी अथवा पीटीआई न होने की वजह से किया गया।
जहां तक वैकल्पिक शिक्षकों की बात है ऐसा केवल इसलिए किया गया क्योंकि सरकार की ओर से यहां नियमित शिक्षकों की नियुक्ति ही नहीं की गई। छात्रों से 300 नहीं बल्कि महज डेढ़ सौ रुपये प्रतिमाह वसूल कर संबंधित शिक्षकों को भुगतान किया जा रहा है। ऐसा छात्रों की पढ़ाई व भविष्य को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। मोहित, विजय, रमन, मनदीप सिंह, प्रदीप कुमार, अमित, साहिल, रविंद्र, राजकुमार, सोनू, नंदलाल, धमेंद्र मौजूद थे।