{"_id":"61bfa18894079808ff3e33a1","slug":"three-lakh-tourists-came-to-see-the-fair-at-brahma-sarovar-karnal-news-knl933147102","type":"story","status":"publish","title_hn":"ब्रह्म सरोवर पर मेला देखने पहुंचे तीन लाख पर्यटक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ब्रह्म सरोवर पर मेला देखने पहुंचे तीन लाख पर्यटक
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित 18 दिवसीय क्राफ्ट और सरस मेले का रविवार को समापन हो गया। मेले के आखिरी दिन करीब तीन लाख पर्यटक पवित्र ब्रह्मसरोवर पहुंचे और यहां लगे विभिन्न राज्यों के स्टालों से खरीदारी की। वहीं राजस्थानी थाली और अन्य स्वादिष्ट व्यंजनों का जायका चखने के लिए लोग लाइनों में खड़े नजर आए।
गीता महोत्सव के अंतिम दिन शिल्पकार और कलाकार वर्ष 2022 में फिर मिलेंगे का वादा कर रुखसत होने लगे। अंतिम दिन रविवार को छुट्टी होने के कारण स्टालों पर काफी भीड़ रही। इस दौरान पर्यटकों ने धूप के साथ लोक नृत्यों का भी आनंद उठाया।
मेले में आए शिल्पकारों का कहना है कि 18 दिन के मेले ने उन्हें कोरोना में हुए नुकसान से उबारने में काफी मदद की। हालांकि कुछ शिल्पकारों का यह कहना भी है कि जितनी उम्मीद थी कारोबार उतना नहीं हुआ है।
विज्ञापन
3700 से ज्यादा कलाकारों ने दिखाया हुनर
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव-2021 में 21 राज्यों व अमेरिका, भूटान, रशिया, अफ्रीका सहित अन्य देशों के करीब 3700 से भी ज्यादा कलाकारों ने 2 दिसंबर से 19 दिसंबर तक हरियाणा पवेलियन, सांस्कृतिक संध्या, ब्रह्मसरोवर के घाट पर रोजाना सांस्कृतिक प्रोग्राम प्रस्तुत किए। इसके अलावा 48 कोस के 75 तीर्थों पर भी सांस्कृतिक और जिला स्तरीय कार्यक्रमों में भी प्रस्तुति दी। इस महोत्सव में जहां आरती स्थल पर संध्या के समय विभिन्न नामी कलाकार अपने कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी।
नगाड़ा पार्टी, बहुरूपिए और कच्ची घोड़ी नृत्य रहा आकर्षण का केंद्र
सांस्कृतिक कलाकारों के अलावा नगाड़ा पार्टी, राजस्थान के बहुरूपिये व कच्ची घोड़ी के साथ-साथ पंजाब से आए बाजीगर ग्रुप भी महोत्सव में आकर्षण का केंद्र रहे। बहरूपियों ने इस उत्सव में विभिन्न रूप बदल कर पर्यटकों का दिल जीत लिया।
लखनवी चिकनकारी की है विश्व में विशेष पहचान
कुरुक्षेत्र। लखनवी चिकनकारी पूरे विश्व में अपनी विशेष पहचान रखती है। ब्रह्मसरोवर पर लगे सरस मेले के स्टॉल नंबर 314 पर पर मौजूद सलमान बताते हैं कि उनके पास 800 रुपये से लेकर 5 हजार रुपये तक के लखनवी चिकनकारी के महिलाओं के लिए कपड़े उपलब्ध हैं। उन्होेंने बताया कि इस दस्तकारी की दिल्ली सहित देश के कई बड़े बाजारों में बहुत मांग है। उन्होंने बताया कि सुंदर चिकनकारी का एक सूट तैयार करने में कई बार महीना भर लग जाता है। इसके बावजूद लखनवी चिकनकारी की मांग काफी ज्यादा है। उन्होंने बताया कि इस व्यवसाय से लखनऊ की लगभग पांच लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। मुर्रे, जाली, बखिया, टेपची, टप्पा आदि चिकनकारी की विभिन्न शैली हैं तथा टांके चैन स्टिच, फंदा, कंबल टांका, साटन टांका तथा उल्टा हाथ सिलाई आदि चिकनकारी के विभिन्न तरीके हैं।
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित 18 दिवसीय क्राफ्ट और सरस मेले का रविवार को समापन हो गया। मेले के आखिरी दिन करीब तीन लाख पर्यटक पवित्र ब्रह्मसरोवर पहुंचे और यहां लगे विभिन्न राज्यों के स्टालों से खरीदारी की। वहीं राजस्थानी थाली और अन्य स्वादिष्ट व्यंजनों का जायका चखने के लिए लोग लाइनों में खड़े नजर आए।
गीता महोत्सव के अंतिम दिन शिल्पकार और कलाकार वर्ष 2022 में फिर मिलेंगे का वादा कर रुखसत होने लगे। अंतिम दिन रविवार को छुट्टी होने के कारण स्टालों पर काफी भीड़ रही। इस दौरान पर्यटकों ने धूप के साथ लोक नृत्यों का भी आनंद उठाया।
विज्ञापन
मेले में आए शिल्पकारों का कहना है कि 18 दिन के मेले ने उन्हें कोरोना में हुए नुकसान से उबारने में काफी मदद की। हालांकि कुछ शिल्पकारों का यह कहना भी है कि जितनी उम्मीद थी कारोबार उतना नहीं हुआ है।
विज्ञापन
3700 से ज्यादा कलाकारों ने दिखाया हुनर
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव-2021 में 21 राज्यों व अमेरिका, भूटान, रशिया, अफ्रीका सहित अन्य देशों के करीब 3700 से भी ज्यादा कलाकारों ने 2 दिसंबर से 19 दिसंबर तक हरियाणा पवेलियन, सांस्कृतिक संध्या, ब्रह्मसरोवर के घाट पर रोजाना सांस्कृतिक प्रोग्राम प्रस्तुत किए। इसके अलावा 48 कोस के 75 तीर्थों पर भी सांस्कृतिक और जिला स्तरीय कार्यक्रमों में भी प्रस्तुति दी। इस महोत्सव में जहां आरती स्थल पर संध्या के समय विभिन्न नामी कलाकार अपने कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी।
नगाड़ा पार्टी, बहुरूपिए और कच्ची घोड़ी नृत्य रहा आकर्षण का केंद्र
सांस्कृतिक कलाकारों के अलावा नगाड़ा पार्टी, राजस्थान के बहुरूपिये व कच्ची घोड़ी के साथ-साथ पंजाब से आए बाजीगर ग्रुप भी महोत्सव में आकर्षण का केंद्र रहे। बहरूपियों ने इस उत्सव में विभिन्न रूप बदल कर पर्यटकों का दिल जीत लिया।
लखनवी चिकनकारी की है विश्व में विशेष पहचान
कुरुक्षेत्र। लखनवी चिकनकारी पूरे विश्व में अपनी विशेष पहचान रखती है। ब्रह्मसरोवर पर लगे सरस मेले के स्टॉल नंबर 314 पर पर मौजूद सलमान बताते हैं कि उनके पास 800 रुपये से लेकर 5 हजार रुपये तक के लखनवी चिकनकारी के महिलाओं के लिए कपड़े उपलब्ध हैं। उन्होेंने बताया कि इस दस्तकारी की दिल्ली सहित देश के कई बड़े बाजारों में बहुत मांग है। उन्होंने बताया कि सुंदर चिकनकारी का एक सूट तैयार करने में कई बार महीना भर लग जाता है। इसके बावजूद लखनवी चिकनकारी की मांग काफी ज्यादा है। उन्होंने बताया कि इस व्यवसाय से लखनऊ की लगभग पांच लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। मुर्रे, जाली, बखिया, टेपची, टप्पा आदि चिकनकारी की विभिन्न शैली हैं तथा टांके चैन स्टिच, फंदा, कंबल टांका, साटन टांका तथा उल्टा हाथ सिलाई आदि चिकनकारी के विभिन्न तरीके हैं।