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तेरह हजार बेहिसाब गटक रहे पानी
करनाल/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 30 Jun 2015 12:30 AM IST
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जल बचाओ अभियान को पब्लिक हेल्थ के अधिकारी शहर में ही झटका दे रहे हैं।
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डेढ़ साल बीतने के बाद भी शहर के सभी कनेक्शनों पर विभाग पानी मीटर लगवाने
में फेल साबित हो रहा है।
जिले के तीस हजार 814 कनेक्शनों में से करीब 17 हजार कनेक्शनों पर ही मीटर लग पाए हैं। ऐसे में करीब 13 हजार 814 कनेक्शनों पर मीटर नहीं लग पाए हैं। इस स्थिति में यह कितना भी पानी बहाते रहें इसका विभाग के पास कोई रिकॉर्ड नहीं है।
यही कारण है कि शहर के हर कोने में पानी नहीं पहुंच रहा है और लोगों में हाहाकार मचा है। एक तरफ शहर के कई हिस्सों में पानी नहीं पहुंच रहा है तो दूसरी ओर हजारों ऐसे उपभोक्ता हैं, जो बेहिसाब पानी गटक रहे हैं।
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश थे कि जल बचाओ के लिए हर कनेक्शन पर मीटर अनिवार्य है। पब्लिक हेल्थ ने 31 मार्च 2014 तक सभी कनेक्शनों पर मीटर लगवाने के लिए चेतावनी दी कि यदि निश्चित तिथि तक मीटर नहीं लगवाए तो कनेक्शन काट दिए जाएंगे।
विभाग ने समय निकलने के बाद भी कार्रवाई नहीं की और पानी सप्लाई की वही स्थिति रही। शहर के करीब 92 ट्यूबवेल से करीब छह करोड़ लीटर पानी सप्लाई किया जाता है। हुडा एरिया में 60 ट्यूबवेल पर करीब 15 हजार कनेक्शन हैं। शहर के हर कोनेे में पानी की बूंद नहीं पहुंचने के कारण लोग परेशान हैं। पानी किल्लत की भी विभाग के पास रोजाना सात से आठ शिकायतें आ रही हैं।
अधिकारी सिर्फ लोगों को आश्वासन देने तक सीमित है।
प्रदेश सरकार के सामने वाहवाही के लिए जल बचाओ अभियान में कागजी प्रक्रिया तक सीमित हैं। धरातल पर व्यर्थ पानी बहाया जा रहा है। मीटर नहीं लगने से मोटर चलती रहती है और पानी टूंटियों से बहता रहता है। यदि अधिकारी इस पर कुछ सख्ताई दिखाए तो लोगों में डर होगा और जरूरत के अनुसार ही पानी का उपयोग करेंगे।
शहर में अवैध कनेक्शनों की भरमार
चार लाख की आबादी में तीन हजार कनेक्शन बहुत हैं। ऐसे में शहर में अवैध कनेक्शनों की भरमार है। विभाग के अधिकारी फील्ड में कार्य नहीं करते। इस वजह से लोग बेखौफ कनेक्शन जोड़ रहे हैं। यही कारण है कि शहर के अधिकतर हिस्से में गंदा पानी सप्लाई होता है। विभाग का आकलन है कि शहर में तीन से चार हजार कनेक्शन अवैध हैं।
चेतावनी बोर्ड से भी नहीं डर रहे लोग
सभी जल उपभोक्ताओं को सूचित किया जाता है कि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेशानुसार सभी पानी के कनेक्शनों पर 31 मार्च 2013 तक मीटर लगवाना अनिवार्य था। राज्य सरकार की नई शहरी जल नीति के अनुसार जो उपभोक्ता 31 मार्च 2013 तक अपना मीटर नहीं लगवा सके उनसे 31 मार्च 2014 तक डबल रेट (60 रुपये प्रतिमाह के स्थान पर 120 रुपये प्रतिमाह) पर पानी का बिल लिया जाएगा। जो उपभोक्ता 31 मार्च 2014 तक भी मीटर नहीं लगवाएगा उनका पानी का कनेक्शन काट देने का प्रावधान है। आज तक इस पर अमल नहीं हुआ है, जो अफसरों की लापरवाही है।
30 हजार 814 उपभोक्ता पानी बिल अदा कर रहे हैं, लेकिन सभी कनेक्शनों पर मीटर नहीं लगे हैं। मीटर नहीं लगने से व्यर्थ पानी बहना तय है। पाइप लीकेज की वजह से गंदा पानी सप्लाई हो जाता है। शिकायत मिलने पर तुरंत हल करने की कोशिश रहती है। लोगों से अपील है कि वह पानी की बचत करें।
- गौरव कंसल, एसडीई, पब्लिक हेल्थ करनाल।
जिले के तीस हजार 814 कनेक्शनों में से करीब 17 हजार कनेक्शनों पर ही मीटर लग पाए हैं। ऐसे में करीब 13 हजार 814 कनेक्शनों पर मीटर नहीं लग पाए हैं। इस स्थिति में यह कितना भी पानी बहाते रहें इसका विभाग के पास कोई रिकॉर्ड नहीं है।
यही कारण है कि शहर के हर कोने में पानी नहीं पहुंच रहा है और लोगों में हाहाकार मचा है। एक तरफ शहर के कई हिस्सों में पानी नहीं पहुंच रहा है तो दूसरी ओर हजारों ऐसे उपभोक्ता हैं, जो बेहिसाब पानी गटक रहे हैं।
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश थे कि जल बचाओ के लिए हर कनेक्शन पर मीटर अनिवार्य है। पब्लिक हेल्थ ने 31 मार्च 2014 तक सभी कनेक्शनों पर मीटर लगवाने के लिए चेतावनी दी कि यदि निश्चित तिथि तक मीटर नहीं लगवाए तो कनेक्शन काट दिए जाएंगे।
विभाग ने समय निकलने के बाद भी कार्रवाई नहीं की और पानी सप्लाई की वही स्थिति रही। शहर के करीब 92 ट्यूबवेल से करीब छह करोड़ लीटर पानी सप्लाई किया जाता है। हुडा एरिया में 60 ट्यूबवेल पर करीब 15 हजार कनेक्शन हैं। शहर के हर कोनेे में पानी की बूंद नहीं पहुंचने के कारण लोग परेशान हैं। पानी किल्लत की भी विभाग के पास रोजाना सात से आठ शिकायतें आ रही हैं।
अधिकारी सिर्फ लोगों को आश्वासन देने तक सीमित है।
प्रदेश सरकार के सामने वाहवाही के लिए जल बचाओ अभियान में कागजी प्रक्रिया तक सीमित हैं। धरातल पर व्यर्थ पानी बहाया जा रहा है। मीटर नहीं लगने से मोटर चलती रहती है और पानी टूंटियों से बहता रहता है। यदि अधिकारी इस पर कुछ सख्ताई दिखाए तो लोगों में डर होगा और जरूरत के अनुसार ही पानी का उपयोग करेंगे।
शहर में अवैध कनेक्शनों की भरमार
चार लाख की आबादी में तीन हजार कनेक्शन बहुत हैं। ऐसे में शहर में अवैध कनेक्शनों की भरमार है। विभाग के अधिकारी फील्ड में कार्य नहीं करते। इस वजह से लोग बेखौफ कनेक्शन जोड़ रहे हैं। यही कारण है कि शहर के अधिकतर हिस्से में गंदा पानी सप्लाई होता है। विभाग का आकलन है कि शहर में तीन से चार हजार कनेक्शन अवैध हैं।
चेतावनी बोर्ड से भी नहीं डर रहे लोग
सभी जल उपभोक्ताओं को सूचित किया जाता है कि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेशानुसार सभी पानी के कनेक्शनों पर 31 मार्च 2013 तक मीटर लगवाना अनिवार्य था। राज्य सरकार की नई शहरी जल नीति के अनुसार जो उपभोक्ता 31 मार्च 2013 तक अपना मीटर नहीं लगवा सके उनसे 31 मार्च 2014 तक डबल रेट (60 रुपये प्रतिमाह के स्थान पर 120 रुपये प्रतिमाह) पर पानी का बिल लिया जाएगा। जो उपभोक्ता 31 मार्च 2014 तक भी मीटर नहीं लगवाएगा उनका पानी का कनेक्शन काट देने का प्रावधान है। आज तक इस पर अमल नहीं हुआ है, जो अफसरों की लापरवाही है।
30 हजार 814 उपभोक्ता पानी बिल अदा कर रहे हैं, लेकिन सभी कनेक्शनों पर मीटर नहीं लगे हैं। मीटर नहीं लगने से व्यर्थ पानी बहना तय है। पाइप लीकेज की वजह से गंदा पानी सप्लाई हो जाता है। शिकायत मिलने पर तुरंत हल करने की कोशिश रहती है। लोगों से अपील है कि वह पानी की बचत करें।
- गौरव कंसल, एसडीई, पब्लिक हेल्थ करनाल।