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Karnal News: कर्ण स्टेडियम के स्केटिंग हॉल में पांच साल से नहीं कोच

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 01 Jul 2025 03:04 AM IST
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There is no coach in the skating hall of Karna Stadium for five years
- अभ्यास के लिए तरसे खिलाड़ी, खस्ताहाल रिंग व जाल टूटे, भवन पर लटकते तार बने खतरा
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। कर्ण स्टेडियम में सात लाख रुपये की लागत से बने स्केटिंग हॉल प्रशिक्षक के अभाव में वीरान पड़ा है। वहीं रिंग के हालात भी जर्जर हैं। यहां पांच साल से प्रशिक्षक नहीं है। प्रशिक्षक न होने के कारण स्केटिंग में रुचि रखने वाले बच्चे काफी रुपये खर्च कर प्राइवेट स्कूलों में स्केटिंग का प्रशिक्षण लेने को मजबूर हैं।
जब इन बच्चों के अभिभावक कर्ण स्टेडियम का रुख करते हैं तो उनके हाथ मायूसी लगती है। यहां स्केटिंग हॉल के बगल में ही बने कमरे के पास अधिकतर बिजली के बोर्ड टूटे हैं जिनमें से बिजली की खुली तारें लटक रही हैं। भवन पर लटकती नंगी तारें हादसों का मुख्य कारण बन सकती है। यह वही स्केटिंग हॉल है जहां कुछ वर्ष पहले जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं का आयोजन करवाया जाता था। उस समय हॉल के बगल में बनी सीढ़ियों पर दर्शकों की भीड़ जुटती थी।
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जिला खेल अधिकारी ने बताया कि स्केटिंग हॉल का कुछ वर्ष पहले ही कायाकल्प करवाया गया था। सभी मुख्य बड़े स्कूलों में ही स्केटिंग हॉल की सुविधा है, इसलिए इस खेल के पंजीकरण के लिए कर्ण स्टेडियम में बहुत कम अभिभावक आते हैं। यदि बच्चों की संख्या बढ़ती है तो प्रशिक्षक भी उपलब्ध करवा दिया जाएगा।
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स्केटिंग हॉल तोड़कर बॉक्सिंग रिंग बनाने की तैयारी
अब यहां पर 10 करोड़ रुपये की लागत से स्केटिंग हॉल को तोड़कर बॉक्सिंग व बैडमिंटन हॉल बनाने की तैयारी चल रही है। खेल विभाग इस निर्माण कार्य के लिए लोक निर्माण विभाग को फंड जारी कर चुका है जबकि लोक निर्माण विभाग की ओर से बार-बार खेल विभाग को पत्र लिखकर फंड हस्तांतरण का चालान मांगा जा रहा है। पिछले एक साल से कागजी कार्रवाई के कारण ही यह निर्माण कार्य अटका हुआ है। कर्ण स्टेडियम में स्केटिंग हॉल लंबे समय से बंद है। यहां बने स्केटिंग हॉल की स्थिति दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। इससे जिले के खिलाड़ियों को अभ्यास करने के लिए जगह नहीं मिल रही है। खिलाड़ी प्राइवेट स्कूलों में काफी रुपये खर्च कर अभ्यास करने को मजबूर हैं। वहीं कर्ण स्टेडियम में स्केटिंग हॉल की उपलब्धता न होने के कारण अब लगभग सभी बड़े सरकारी स्कूलों में स्केटिंग हॉल निर्मित करवा दिए गए हैं।



कर्ण स्टेडियम में स्केटिंग कोच 2019 में सेवानिवृत्ति ले गए, इसके बाद विभाग की ओर से यहां नए कोच की नियुक्ति नहीं हुई है। इसका मुख्य कारण स्केटिंग खेल का ओलंपिक में न होना और इसमें बच्चों की कम रुचि होना है। आजकल प्राइवेट स्कूलों में भी स्केटिंग की सुविधा दी जा रही है इसलिए खिलाड़ी स्कूल नर्सरियों में अभ्यास करते हैं।
- राकेश पांडेय, उपनिदेशक एवं जिला खेल अधिकारी
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