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Karnal News: कर्ण स्टेडियम में रोजाना बाहरी तत्वों का लगता है जमावड़ा
Sat, 30 Nov 2024 02:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sat, 30 Nov 2024 02:26 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। कर्ण स्टेडियम में दिनभर बाहरी तत्वों की आवाजाही रहती है। वह दिनभर ट्रैक पर चक्कर लगाकर, वॉलीबाल कोर्ट में मैच खेलते है। यहां पर स्कूल, कॉलेजों व शहर में तफरी मारने आए युवाओं का जमावड़ा लगा रहता है। खेल विभाग की ओर से इस पर कोई निगरानी नहीं रखी जा रही है जबकि एक सप्ताह पहले शौचालयों में खाली सिरिंज मिल चुके है।
इस पर संज्ञान लेते हुए अतिरिक्त उपायुक्त द्वारा यहां के शौचालयों का जल्द कायाकल्प करने तथा बाहरी तत्वों पा नजर रखने बारे जिला खेल अधिकारी को ओदश दिए गए थे। बावजूद इसके यहां कोई ध्यान नहीं रखा जा रहा है। बाहरी तत्व जो खेल से भी अनजान है यहां आकर फोन पर बातें करते हुए ट्रैक के चक्कर लगाते है। कर्ण स्टेडियम में खेल विभाग की ओर से बाहरी खिलाड़ियों व शरारती तत्वों का प्रवेश वर्जित है। इस बारे विभाग द्वारा नोटिस भी चस्पा किया गया है बावजूद इसके वॉलीबाल ट्रैक पर कोई भी आकर खेलने लगता है। एथलेटिक्स ट्रैक के पास गंदगी के अंबार लगे हैं तथा टूटे हुए पोल भी कई सालों से यहीं पड़े है। वॉलीबाल ट्रैक में दर्शकों के लिए लगाए गए सीमेंट के बेंच टूटे पड़े हैं।
कोर्ट के चारों ओर बने जाल टूटने लग गए हैं। इसके साथ ही लगते स्केटिंग हाल की स्थिति बदतर है, यहां तारों का खुला जंजाल है। ऐसे में कब कोई बड़ा हादसा हो जाए विभाग इस बात से बेखबर है। यहीं पर टूटे हुए खेल उपकरणों का ढेर लगा है तथा शौचालयों पर ताला जड़ा है। कर्ण स्टेडियम में खिलाड़ियों के लिए सुविधाएं की कमी हैं। इस कारण से उनको परेशानी होना भी स्वाभाविक है।
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यहां पर खिलाड़ियों के लिए बने शौचालयों व चेंजिंग रूम की स्थिति बेहद खराब हैं। करीब छह वर्ष पहले कर्ण स्टेडियम में करीब सात करोड़ रुपये की लागत से सिंथेटिक ट्रैक का निर्माण करवाया गया था। अब इस ट्रैक पर पानी की निकासी के लिए बने सभी छिद्र बंद हो चुके है, इस कारण से ट्रैक उखड़ने लगा है।
कर्ण स्टेडियम में निगरानी के लिए होमगार्ड की व्यवस्था किए जाने बारे पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखा गया है। खेल विभाग में केवल एक ही स्थाई चपरासी कार्यरत है जो दिनभर कार्यालय के साथ-साथ बीच-बीच में ट्रैक पर भी चक्कर लगाता है। उसके द्वारा बाहरी तत्वों को रोका जाता है तो वे बहस करते है। यहां होमगार्ड या पुलिस कर्मचारी की वर्दी में तैनाती अनिवार्य है। - जिला खेल अधिकारी, सुधा भसीन
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करनाल। कर्ण स्टेडियम में दिनभर बाहरी तत्वों की आवाजाही रहती है। वह दिनभर ट्रैक पर चक्कर लगाकर, वॉलीबाल कोर्ट में मैच खेलते है। यहां पर स्कूल, कॉलेजों व शहर में तफरी मारने आए युवाओं का जमावड़ा लगा रहता है। खेल विभाग की ओर से इस पर कोई निगरानी नहीं रखी जा रही है जबकि एक सप्ताह पहले शौचालयों में खाली सिरिंज मिल चुके है।
इस पर संज्ञान लेते हुए अतिरिक्त उपायुक्त द्वारा यहां के शौचालयों का जल्द कायाकल्प करने तथा बाहरी तत्वों पा नजर रखने बारे जिला खेल अधिकारी को ओदश दिए गए थे। बावजूद इसके यहां कोई ध्यान नहीं रखा जा रहा है। बाहरी तत्व जो खेल से भी अनजान है यहां आकर फोन पर बातें करते हुए ट्रैक के चक्कर लगाते है। कर्ण स्टेडियम में खेल विभाग की ओर से बाहरी खिलाड़ियों व शरारती तत्वों का प्रवेश वर्जित है। इस बारे विभाग द्वारा नोटिस भी चस्पा किया गया है बावजूद इसके वॉलीबाल ट्रैक पर कोई भी आकर खेलने लगता है। एथलेटिक्स ट्रैक के पास गंदगी के अंबार लगे हैं तथा टूटे हुए पोल भी कई सालों से यहीं पड़े है। वॉलीबाल ट्रैक में दर्शकों के लिए लगाए गए सीमेंट के बेंच टूटे पड़े हैं।
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कोर्ट के चारों ओर बने जाल टूटने लग गए हैं। इसके साथ ही लगते स्केटिंग हाल की स्थिति बदतर है, यहां तारों का खुला जंजाल है। ऐसे में कब कोई बड़ा हादसा हो जाए विभाग इस बात से बेखबर है। यहीं पर टूटे हुए खेल उपकरणों का ढेर लगा है तथा शौचालयों पर ताला जड़ा है। कर्ण स्टेडियम में खिलाड़ियों के लिए सुविधाएं की कमी हैं। इस कारण से उनको परेशानी होना भी स्वाभाविक है।
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यहां पर खिलाड़ियों के लिए बने शौचालयों व चेंजिंग रूम की स्थिति बेहद खराब हैं। करीब छह वर्ष पहले कर्ण स्टेडियम में करीब सात करोड़ रुपये की लागत से सिंथेटिक ट्रैक का निर्माण करवाया गया था। अब इस ट्रैक पर पानी की निकासी के लिए बने सभी छिद्र बंद हो चुके है, इस कारण से ट्रैक उखड़ने लगा है।
कर्ण स्टेडियम में निगरानी के लिए होमगार्ड की व्यवस्था किए जाने बारे पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखा गया है। खेल विभाग में केवल एक ही स्थाई चपरासी कार्यरत है जो दिनभर कार्यालय के साथ-साथ बीच-बीच में ट्रैक पर भी चक्कर लगाता है। उसके द्वारा बाहरी तत्वों को रोका जाता है तो वे बहस करते है। यहां होमगार्ड या पुलिस कर्मचारी की वर्दी में तैनाती अनिवार्य है। - जिला खेल अधिकारी, सुधा भसीन