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कोरोना के योद्धाः इनकी हिम्मत से हारेगी महामारी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 12 Apr 2020 02:06 AM IST
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their courage will defeat the epidemic
कोरोना वायरस से समाज को सुरक्षित रखने के लिए अपनी जान को जोखिम में डालकर दिनभर काम करते हैं। जब घर जाते हैं तो स्नान करने, कपड़े धुलवाने के बावजूद अपने बच्चों से दूरी बनाकर रखनी पड़ती है। जब बच्चे जिद करते हैं तो उन्हें समझाना होता है। जब काम पर जाने को घर से निकलते हैं तो सभी परिजन कहते हैं कि अपना ध्यान रखना। ऐहतियात तो पूरी बरतते हैं, लेकिन फिर हमेशा भय तो लगा ही रहता है।
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जब हम अपने घरों में रहकर खुद को कोरोना जैसी महामारी से सुरक्षित रखने का प्रयास कर रहे हैं, ऐसे में बहुत लोग ऐसे हैं जो हमारे लिए अपनी जान को जोखिम में डालकर कई तरह की सेवाओं और सुविधाओं में दिनरात जुटे हुए हैं। इनमें डाक्टर, नर्स, पुलिस, नगर निगम के सफाई कर्मचारी, सेनिटाइजिंग में लगे कर्मी व अन्य अधिकारी कर्मचारी, जिला प्रशासन, समाजसेवी, जोमेटो आदि के लोगों के साथ करियाणा स्टोर, मेडिकल स्टोर संचालक, बैंक कर्मचारी आदि शामिल हैं। क्योंकि यह घरों के बाहर की व्यवस्थाओं को बखूबी संभाले हैं, साथ ही कोरोना पीड़ित, संदिग्धों से लेकर खरीब तबियत वालों का उपचार भी कर रहे हैं। लॉकडाउन का पालन कराने व राशन सामग्री पहुंचाने में अहम योगदान कर रहे हैं। यह बाकई सामाजिक सम्मान के हकदार हैं।
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-लॉकडाउन में साफ सफाई की व्यवस्था लगातार बनी रहे। गलियों व भवनों की दीवारों को सेनिडाइज करने की जिम्मेदारी मुझे सौंपी गई है, जिसे सुबह से देर रात तक लगातार निभाते हैं। घर जाते हैं तो कपड़े धुलवाते हैं, स्नान करके जाते हैं लेकिन फिर बच्चों से दूर ही रहने का प्रयास करते हैं।
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-सत्यपाल, रंदौली नगर निगम कर्मी करनाल।
-सफाई कार्य में ड्यूटी लगाई गई है। सुबह को ही घर से निकलता हूं, देर रात घर पहुंच पाता हूं। दिनभर चिलचिलाती धूप में सफाई कार्य करता हूं। थक जाता हूं तो किसी पेड़ के नीचे कुछ देर बैठ जाता हूं, फिर अपना काम शुरू कर देता हूं, क्योंकि प्रधानमंत्री कहते हैं ना थकना है और ना ही रुकना है। तभी कोरोना हारेगा।
-विकास, सफाई कर्मचारी नगर निगम करनाल।
-मैं पानीपत की हूं, करनाल में ड्यूटी करती हूं। वायरस के फैलाव के बीच भय तो रहता ही है लेकिन जब वर्दी पहनती हूं, तो जोश और देश के लिए कुछ भी कर गुजरने जज्बा खुद ब खुद आ जाता है। कोरोना तो एक दिन हारेगा ही, हम जीतेंगे। हमें पूरी हिम्मत के साथ लड़ना है, वह अपने घर बैठकर, घरों से बाहर न निकलकर।

-सोहनी, महिला पुलिस कर्मी।
-सेवा मेरा धर्म है, इन दिनों देश संकट में है, ऐसे में हर किसी को अपनी जिम्मेदारी ठीक से निभानी चाहिए। मैं दिनभर मरीजों का उपचार करती हूं, उन्हें बेहतर सुविधा देने का प्रयास करती हूं। कोरोना का भय तो है, कुछ नर्स चपेट में भी आई हैं लेकिन हम हिम्मत नहीं हारेंगे। हिम्मत और हौसले से ही कोरोना हारेगा। एक दिन सब अच्छा हो जाएगा।
-सपना, नर्स जिला नागरिक अस्पताल करनाल।
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