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बासमती की ई-नेम पोर्टल की एंट्री में भी तलाश लिए हेराफेरी का रास्ते
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बासमती धान में मंडी शुल्क और हरियाणा रूरल डेवलपमेंट फंड (एचआरडीएफ) में लाखों की चोरी का खेल लंबे समय से चल रहा है, जिसे रोकने के लिए हरियाणा सरकार ने इस बार बारीक धान को ई-नेम पोर्टल की परिधि में लाकर हेराफेरी रोकने का प्रयास तो किया लेकिन कर्मचारियों ने इस व्यवस्था में भी गड़बड़ी करने के रास्ते ढूंढ लिए हैं।
सिर्फ सरकारी धान खरीद ही नहीं, बल्कि बासमती प्रजातियों यानी बारीक धान की गैर सरकारी खरीद में अनाज मंडियों में बड़ी हेराफेरी होती है हालांकि करनाल अनाज मंडी की जांच ने करीब आठ हजार क्विंटल में से 6100 क्विंटल की खरीद मंडी रजिस्टर और आढ़तियों के रजिस्टर में दर्ज पाई गई है, लेकिन ई-नेम पोर्टल पर कार्यरत कर्मचारियों ने उसे न तो उसे पोर्टल पर चढ़ाया और न ही उसके गेटपास काटे गए। यही कारण रहा कि ई-नेम पोर्टल से जुड़े दोनों कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया। गेटपास से जुड़े कर्मचारियों को निलंबित किया गया। सचिव को इसलिए निलंबन झेलना पड़ा कि ओवरऑल जिम्मेदारी सचिव की ही थी। जिले की कई अन्य मंडियों में भी ऐसा खेल चल रहा है।
बारीक धान को सरकार एमएसपी पर नहीं खरीदती है, इसलिए इस धान को हरियाणा में आने पर भी कोई रोक नहीं है। पंचायत चुनाव निपटने के बाद रुका हुआ धान मंडियों में पहुंचा। लेकिन 14 नवंबर को सरकारी धान खरीद बंद हो गई। डीएफएससी अनिल कालरा ने बताया कि जिले में खरीद के अंतिम दिन तक कुल 166379 मीट्रिक टन धान खरीदा गया है, जबकि पिछले साल 142382 मीट्रिक टन धान खरीदा गया था। इसके बाद हरियाणा की सीमाएं खुली तो बासमती, पूसा बासमती (1509) आदि प्रजातियों का धान उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से हरियाणा में प्रवेश कर गया। सरकारी खरीद बंद होते ही जिला प्रशासन व अन्य अधिकारियों का ध्यान भी मंडियों से हट गया। जिसका लाभ उठाते हुए गेटपास काटने और ई-नेम पोर्टल, ई-खरीद पोर्टल में लगे कर्मचारियों ने आढ़तियों, राइस मिलरों से सांठगांठ करके बिना गेटपास के ही धान खरीद शुरू करा दी।
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हालांकि करनाल अनाज मंडी की जब जांच की गई तो कुल करीब आठ हजार क्विंटल धान मंडी में मिला, जिसके गेटपास नहीं थे, लेकिन इस धान की एंट्री अनाज मंडी व आढ़तियों के खरीद रजिस्टर में मिली है, जो करीब 6100 क्विंटल है। जिससे इसका मंडी शुल्क व एचआरडीएफ तो जमा करना ही पड़ता है मगर गेटपास न होने और ई-नेम पर एंट्री नहीं होने से ये सरकारी आंकड़े में शामिल नहीं हो पाता। मंडी सूत्रों के मुताबिक ई-नेम पोर्टल पर एंट्री करने वाले कर्मचारियों की संख्या कम है, इसलिए बाद में कई दिनों तक कर्मचारी पोर्टल पर अंकित करते रहते हैं। इसी देरी के बीच ई-नेम व ई-खरीद पोर्टल पर पर धान की एंट्री करने के दौरान ही हेराफेरी का बड़ा खेल किया जाता है।
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जुंडला मंडी में भी हुई थी बड़ी हेराफेरी
पिछले दिनों जुंडला अनाज मंडी में भी सरकारी धान खरीद में हेराफेरी मिली थी, जिसमें सचिव पवन चोपड़ा उस समय करनाल मंडी के भी कार्यवाहक सचिव थे, उनके सहित कई कर्मचारियों को निलंबित किया था। दो राइस मिलरों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई थी। जिसमें पहले एक राइस मिलर को और फिर निलंबित सचिव पवन चोपड़ा को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। जुंडला मंडी में 11 अक्तूबर को सीएम फ्लाइंग टीम ने छापा मारा था, जिसमें 65 हजार क्विंटल धान धान की हेराफेरी पाई गई थी। घीड़ अनाज मंडी में भी धान खरीद में हेराफेरी का मामला सामने आया था।
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घरौंडा में 44 मिनट में काटे गए थे 49 गेटपास
घरौंडा अनाज मंडी में भी तीन नवंबर को मार्केटिंग बोर्ड की जांच अधिकारी मानव मलिक ने जांच की थी तो 44 मिनट में कुल 49 गेटपास काटे जाने का मामला सामने आया था, जिसकी जांच अभी चल रही है। मंडी में कई आढ़ती फर्मों के रिकॉर्ड में भी हेराफेरी मिली थी। जिससे ये आढ़ती फर्में जांच के दायरे में हैं।
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सिर्फ सरकारी धान खरीद ही नहीं, बल्कि बासमती प्रजातियों यानी बारीक धान की गैर सरकारी खरीद में अनाज मंडियों में बड़ी हेराफेरी होती है हालांकि करनाल अनाज मंडी की जांच ने करीब आठ हजार क्विंटल में से 6100 क्विंटल की खरीद मंडी रजिस्टर और आढ़तियों के रजिस्टर में दर्ज पाई गई है, लेकिन ई-नेम पोर्टल पर कार्यरत कर्मचारियों ने उसे न तो उसे पोर्टल पर चढ़ाया और न ही उसके गेटपास काटे गए। यही कारण रहा कि ई-नेम पोर्टल से जुड़े दोनों कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया। गेटपास से जुड़े कर्मचारियों को निलंबित किया गया। सचिव को इसलिए निलंबन झेलना पड़ा कि ओवरऑल जिम्मेदारी सचिव की ही थी। जिले की कई अन्य मंडियों में भी ऐसा खेल चल रहा है।
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बारीक धान को सरकार एमएसपी पर नहीं खरीदती है, इसलिए इस धान को हरियाणा में आने पर भी कोई रोक नहीं है। पंचायत चुनाव निपटने के बाद रुका हुआ धान मंडियों में पहुंचा। लेकिन 14 नवंबर को सरकारी धान खरीद बंद हो गई। डीएफएससी अनिल कालरा ने बताया कि जिले में खरीद के अंतिम दिन तक कुल 166379 मीट्रिक टन धान खरीदा गया है, जबकि पिछले साल 142382 मीट्रिक टन धान खरीदा गया था। इसके बाद हरियाणा की सीमाएं खुली तो बासमती, पूसा बासमती (1509) आदि प्रजातियों का धान उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से हरियाणा में प्रवेश कर गया। सरकारी खरीद बंद होते ही जिला प्रशासन व अन्य अधिकारियों का ध्यान भी मंडियों से हट गया। जिसका लाभ उठाते हुए गेटपास काटने और ई-नेम पोर्टल, ई-खरीद पोर्टल में लगे कर्मचारियों ने आढ़तियों, राइस मिलरों से सांठगांठ करके बिना गेटपास के ही धान खरीद शुरू करा दी।
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हालांकि करनाल अनाज मंडी की जब जांच की गई तो कुल करीब आठ हजार क्विंटल धान मंडी में मिला, जिसके गेटपास नहीं थे, लेकिन इस धान की एंट्री अनाज मंडी व आढ़तियों के खरीद रजिस्टर में मिली है, जो करीब 6100 क्विंटल है। जिससे इसका मंडी शुल्क व एचआरडीएफ तो जमा करना ही पड़ता है मगर गेटपास न होने और ई-नेम पर एंट्री नहीं होने से ये सरकारी आंकड़े में शामिल नहीं हो पाता। मंडी सूत्रों के मुताबिक ई-नेम पोर्टल पर एंट्री करने वाले कर्मचारियों की संख्या कम है, इसलिए बाद में कई दिनों तक कर्मचारी पोर्टल पर अंकित करते रहते हैं। इसी देरी के बीच ई-नेम व ई-खरीद पोर्टल पर पर धान की एंट्री करने के दौरान ही हेराफेरी का बड़ा खेल किया जाता है।
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जुंडला मंडी में भी हुई थी बड़ी हेराफेरी
पिछले दिनों जुंडला अनाज मंडी में भी सरकारी धान खरीद में हेराफेरी मिली थी, जिसमें सचिव पवन चोपड़ा उस समय करनाल मंडी के भी कार्यवाहक सचिव थे, उनके सहित कई कर्मचारियों को निलंबित किया था। दो राइस मिलरों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई थी। जिसमें पहले एक राइस मिलर को और फिर निलंबित सचिव पवन चोपड़ा को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। जुंडला मंडी में 11 अक्तूबर को सीएम फ्लाइंग टीम ने छापा मारा था, जिसमें 65 हजार क्विंटल धान धान की हेराफेरी पाई गई थी। घीड़ अनाज मंडी में भी धान खरीद में हेराफेरी का मामला सामने आया था।
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घरौंडा में 44 मिनट में काटे गए थे 49 गेटपास
घरौंडा अनाज मंडी में भी तीन नवंबर को मार्केटिंग बोर्ड की जांच अधिकारी मानव मलिक ने जांच की थी तो 44 मिनट में कुल 49 गेटपास काटे जाने का मामला सामने आया था, जिसकी जांच अभी चल रही है। मंडी में कई आढ़ती फर्मों के रिकॉर्ड में भी हेराफेरी मिली थी। जिससे ये आढ़ती फर्में जांच के दायरे में हैं।