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क्रांति का बिगुल बजाया, हरियाणा के वीरों ने अंग्रेजों को मार गिराया

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 12 May 2022 02:15 AM IST
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The trumpet of revolution was played, the heroes of Haryana killed the British
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। ‘सुन गाथा हरियाणा की, म्हारे बहादुर वीर जवानों की, दुश्मन के छक्के छुड़वाए और धरती मां की जान कहाये...’ इस देशभक्ति गीत के साथ शुरू हुए नाटक ने दर्शकों में जोश भर दिया। मौका था जिला प्रशासन और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की ओर से आयोजित ‘1857 का संग्राम, हरियाणा के वीरों के नाम’ नाटक का। जिसका मंचन गुरु नानक खालसा कॉलेज में हुआ। चंडीगढ़ और हरियाणा के 22 कलाकारों ने मंचन किया।
कलाकारों ने दर्शाया कि किस प्रकार से अंग्रेजी हुकूमत ने हमपर असहनीय जुल्म किए। न केवल हरियाणा बल्कि पूरा हिंदुस्तान उनके जुल्म की आग में झुलसा। आजादी के लिए लाखों लोगों ने कुर्बानी दी। देश की आजादी के लिए शुरू हुए 1857 के संग्राम की शुरुआत अंबाला से हुई थी। इस क्षेत्र के वीर जवानों ने अंग्रेजी सेना के खिलाफ बगावत का बिगुल बजाया। नाटक में दिखाया गया कि किस प्रकार स्वतंत्रता सेनानी राजा राव तुला राम ने संघर्ष किया। अंबाला की छावनी नंबर नौ और छावनी नंबर 60 ने अंग्रेजों के खिलाफ सबसे पहले विरोध किया और लड़ाई शुरू की। कलाकारों ने अपने अभिनय में दर्शाया कि विवशता के चलते अंग्रेजी सेना में शामिल हुए हमारे सैनिक भी आखिरकार तत्कालीन अंग्रेजी सेना के खिलाफ हुए और सैनिक बहादुर ने अंग्रेजी सेनापति की गोली मारकर हत्या कर दी थी। कलाकारों ने दर्शाया कि किस प्रकार 1857 में देश ने बहादुर शाह जफर के नेतृत्व में जंग छेड़ दी थी। नाटक के खत्म होने पर दर्शकों ने सीट से खड़े होकर तालियों से कलाकारों का हौसला बढ़ाया और सभागार भारत माता के जयकारों से गूंज उठा। ब्यूरो
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मैं सदरूद्दीन... गीत पर बजी तालियां
प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अहम योगदान देने वाले सदरूद्दीन मेवाती पर एक गीत प्रस्तुत किया गया, जिसके बोल थे कि मैं सदरूद्दीन किसान का बेटा- माहिर सूं फसल ऊगावण में, देश की खातिर जंग लड़ी थी 1857 में। इस पर भी तालियों से सभागार गूंज उठा। नाटक में मुख्यातिथि के रूप में मेयर रेणू बाला गुप्ता पहुंचीं। मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि संजय बठला भी विशेष रूप से पहुंचे। अतिथियों का कॉलेज के प्राचार्य डा. गुरिन्द्र सिंह, डीआईपीआरओ देवेंद्र कुमार और एआईपीआरओ रघुबीर सिंह ने स्वागत किया।
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तूं भी फौजी मैं भी फौजी, लगते हैं इतने मनमौजी... पर लगे ठहाके
नाटक के दौरान कई पंच देकर कलाकारों ने दर्शकों को गुदगुदाया। उन्होंने दर्शाया कि कैसे फौजी अपनी छावनी में मनोरंजन करते हैं। तूं भी फौजी मैं भी फौजी, लगते हैं इतने मनमौजी.. गीत पर दर्शकों ने खूब ठहाके लगाए। इसके अलावा सोच के कर्ज तेरा दर्द मेरा बढ़ जावे सै.. गीत से दिखाई किसान की दशा ने आंखें नम र दी।

आठ जिलों में हो चुका मंचन
कलाकार माजिद खान और निदेशक चाइनिज गिल ने बताया कि नाटक का पहला मंचन 11 नवंबर 2021 को हुआ था। डॉ. बी चंद्रशेखर ने इसे लिखा था। इतिहास की सही जानकारी लोगों तक पहुंचाना उनका मकसद है। नाटक चंडीगढ़ समेत आठ जिलों में मंचित किया जा चुका है। प्रदेश के सभी जिलों में इसे दिखाया जाएगा। 1857 की क्रांति का बिगुल हरियाणा से बजा से था, इसलिए 10 कलाकार हरियाणा से ही लिए गए हैं।
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