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Karnal News: दुल्हन बनी किशोरी को लाया गया बाल सदन
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। बाल कल्याण समिति की टीम ने बुधवार को कुंजपुरा थाना क्षेत्र के एक गांव में नाबालिग की शादी रुकवाई। परिजन कहीं उसकी शादी न कर दें, इस कारण दुल्हन बनी किशोरी को टीम साथ बाल सदन ले आई। वहां यहां करीब एक सप्ताह तक रहेगी। उसकी शादी अभी नहीं की जाएगी, इस बात का विश्वास होने के बाद ही उसे घर भेजा जाएगा।
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष उमेश कुमार को सूचना मिली थी कि कुंजपुरा क्षेत्र के एक गांव में एक साढ़े सत्रह साल की किशोरी की शादी की जा रही थी। किशोरी ने दुल्हन को रूप में शृंगार कर लिया था, शाम को कैथल जिले से बारात पहुंचनी थी लेकिन इससे पहले ही उमेश कुमार चानना, जिला बाल संरक्षण अधिकारी रीना रानी, महिला संरक्षण एवं बाल विवाह अधिकारी भानू गौड़, पुलिस प्रशासन तथा एमडीडी ऑफ इंडिया की टीम वहां पहुंच गई।
इससे यहां खलबली मच गई। बाद में परिजन कहने लगे कि शादी नहीं करेंगे लेकिन किशोरी को मत ले जाओ लेकिन टीम नहीं मानी। उन्होंने बताया कि बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के अनुसार शादी के लिए लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित की गई है। यह अधिनियम बाल विवाह को अपराध की श्रेणी में लाता है। इसी के तहत नाबालिग की शादी रुकवाई गई है। बाल संरक्षण अधिकारी रीना रानी ने बताया कि बाल संरक्षण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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करनाल। बाल कल्याण समिति की टीम ने बुधवार को कुंजपुरा थाना क्षेत्र के एक गांव में नाबालिग की शादी रुकवाई। परिजन कहीं उसकी शादी न कर दें, इस कारण दुल्हन बनी किशोरी को टीम साथ बाल सदन ले आई। वहां यहां करीब एक सप्ताह तक रहेगी। उसकी शादी अभी नहीं की जाएगी, इस बात का विश्वास होने के बाद ही उसे घर भेजा जाएगा।
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष उमेश कुमार को सूचना मिली थी कि कुंजपुरा क्षेत्र के एक गांव में एक साढ़े सत्रह साल की किशोरी की शादी की जा रही थी। किशोरी ने दुल्हन को रूप में शृंगार कर लिया था, शाम को कैथल जिले से बारात पहुंचनी थी लेकिन इससे पहले ही उमेश कुमार चानना, जिला बाल संरक्षण अधिकारी रीना रानी, महिला संरक्षण एवं बाल विवाह अधिकारी भानू गौड़, पुलिस प्रशासन तथा एमडीडी ऑफ इंडिया की टीम वहां पहुंच गई।
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इससे यहां खलबली मच गई। बाद में परिजन कहने लगे कि शादी नहीं करेंगे लेकिन किशोरी को मत ले जाओ लेकिन टीम नहीं मानी। उन्होंने बताया कि बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के अनुसार शादी के लिए लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित की गई है। यह अधिनियम बाल विवाह को अपराध की श्रेणी में लाता है। इसी के तहत नाबालिग की शादी रुकवाई गई है। बाल संरक्षण अधिकारी रीना रानी ने बताया कि बाल संरक्षण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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