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Karnal News: पक्का पुल धाम पर कब्जा करने आई टीम बैरंग लौटी
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पक्का पुल धाम पर रिकार्ड लेकर पहुंचे नायब तहसीलदार व पटवारी।
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आस्था केंद्र पक्क ा पुल धाम का कब्जा लेने के लिए शुक्रवार को वक्फ बोर्ड के अधिकारियों की टीम न्यायालय का आदेश लेकर पहुंची तो क्षेत्र में खलबली मच गई। सूचना मिलने पर सैकड़ों लोग धाम पर पहुंचे। भीड़ देख टीम ने अधिक पुलिस बल की मांग की, पर्याप्त पुलिस फोर्स न मिलने के कारण अधिकारियों को बैरंग लौटना पड़ा।
वक्फ बोर्ड के करीब एक दर्जन अधिकारी और कर्मचारी मोहम्मद फारूक के नेतृत्व में शुक्रवार को एसडीएम घरौंडा के कार्यालय में पहुंचे और ड्यूटी मजिस्ट्रेट नायब तहसीलदार विचित्र नारायण शर्मा और पटवारियों को साथ लेकर मधुबन थाने पहुंचे। फोर्स की मांग की। जैसे ही धाम पर कब्जे की कार्रवाई की सूचना ग्रामीणों को मिली तो उनमें खलबली मच गई। बड़ी संख्या में लोग कमेटी के प्रधान राजेंद्र राणा की अगुवाई में पक्का पुल धाम पर पहुंचे। हालांकि मधुबन थाने से पर्याप्त पुलिस बल नहीं मिल सकी। यहां वक्फ बोर्ड अधिकारी मोहम्मद फारूक ने बताया कि पक्का पुल धाम वक्फ बोर्ड के अधीन आता है। इसके लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया और दस्तावेजों के आधार पर कोर्ट में जीत हासिल की। न्यायालय के आदेश पर आज कब्जा कार्रवाई की जानी थी, लेकिन पुलिस फोर्स न मिलने से कार्रवाई नहीं हो सकी है। आगामी तारीख मिलने पर फिर कब्जा लेने का प्रयास किया जाएगा।
कई सालों से चला आ रहा विवाद
बता दें कि मधुबन स्थित पक्के पुल धाम पर वक्फ बोर्ड और ग्राम पंचायत ऊंचा समाना के बीच पिछले काफी सालों से विवाद चला आ रहा है। वक्फ बोर्ड का दावा है कि जिस जगह पर पक्का पुल धाम बना हुआ है। वह वक्फ बोर्ड के अधीन है। उधर, ग्राम पंचायत का दावा है कि पिछले करीब 90 वर्षों से पक्का पुल धाम ग्राम पंचायत के अधीन है और इस जमीन पर पक्का पुल धाम बना हुआ है वह जमीन ऊंचा समाना के ग्रामीणों की है और जमीन के सभी दस्तावेज भी ग्रामीणों के नाम पर ही है। पक्का पुल को अपने अधीन लेने के लिए वक्फ बोर्ड ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था और वक्फ बोर्ड के अधिकारियों का दावा है कि वह लोअर कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक यह केस जीत चुके हैं। केस में ग्राम पंचायत हार चुकी है। उधर ग्रामीणों ने धाम की देखरेख के लिए पक्का पुल धाम के नाम से एक कमेटी का गठन कर दिया और पिछले कई वर्षों से यह कमेटी ही पक्के पुल धाम की देखरेख कर रही है।
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1936 से ग्रामीणों के नाम है जमीन
पक्का पुल धाम कमेटी के प्रधान राजेंद्र राणा ने बताया कि वर्ष 1936 से पक्का पुल धाम ऊंचा समाना के ग्रामीणों की जमीन पर बना हुआ है और पूरे दस्तावेज ग्रामीणों के नाम पर ही चले आ रहे हैं। पहले इसकी देखरेख ग्राम पंचायत के अधीन थी, लेकिन न्यायालय में ग्राम पंचायत केस हार जाने के कारण इस पूरे धाम की देखरेख अब एक कमेटी कर रही है। उन्होंने बताया कि पक्के पुल धाम पर लाखों हिंदुओं की आस्था जुड़ी हुई है। पक्का पुल हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। उन्होंने बताया कि जिस भूमि पर पक्का पुल धाम बना हुआ है, उस जमीन की रजिस्ट्री ग्रामीणों के नाम है। वर्ष 1936 से यह जमीन ग्रामीणों के नाम चली आ रही है। वक्फ बोर्ड बेवजह इस जमीन पर कब्जा जमाने की कोशिश कर रहा है। धाम पर कब्जा कार्रवाई की सूचना को लेकर बड़ी मात्रा में ग्रामीण पक्का पुल धाम पर जमा हो गए।
उन्होंने बताया कि सूचना मिली थी कि आज वक्फ बोर्ड के अधिकारियों की तरफ से धाम पर कुछ कार्रवाई की जानी है। मौके पर अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी आता है तो उनसे बातचीत की जाएगी लेकिन पुलिस फोर्स न मिलने के कारण आज फिर वक्फ बोर्ड के अधिकारियों को लौटना पड़ा है।
न्यायालय के आदेश पर पक्का पुल धाम पर कब्जा कार्रवाई की जानी थी, लेकिन पुलिस फोर्स न मिलने से कब्जा कार्रवाई नहीं हो पाई है।
-विचित्र नारायण शर्मा, नायब तहसील, करनाल
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वक्फ बोर्ड के करीब एक दर्जन अधिकारी और कर्मचारी मोहम्मद फारूक के नेतृत्व में शुक्रवार को एसडीएम घरौंडा के कार्यालय में पहुंचे और ड्यूटी मजिस्ट्रेट नायब तहसीलदार विचित्र नारायण शर्मा और पटवारियों को साथ लेकर मधुबन थाने पहुंचे। फोर्स की मांग की। जैसे ही धाम पर कब्जे की कार्रवाई की सूचना ग्रामीणों को मिली तो उनमें खलबली मच गई। बड़ी संख्या में लोग कमेटी के प्रधान राजेंद्र राणा की अगुवाई में पक्का पुल धाम पर पहुंचे। हालांकि मधुबन थाने से पर्याप्त पुलिस बल नहीं मिल सकी। यहां वक्फ बोर्ड अधिकारी मोहम्मद फारूक ने बताया कि पक्का पुल धाम वक्फ बोर्ड के अधीन आता है। इसके लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया और दस्तावेजों के आधार पर कोर्ट में जीत हासिल की। न्यायालय के आदेश पर आज कब्जा कार्रवाई की जानी थी, लेकिन पुलिस फोर्स न मिलने से कार्रवाई नहीं हो सकी है। आगामी तारीख मिलने पर फिर कब्जा लेने का प्रयास किया जाएगा।
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कई सालों से चला आ रहा विवाद
बता दें कि मधुबन स्थित पक्के पुल धाम पर वक्फ बोर्ड और ग्राम पंचायत ऊंचा समाना के बीच पिछले काफी सालों से विवाद चला आ रहा है। वक्फ बोर्ड का दावा है कि जिस जगह पर पक्का पुल धाम बना हुआ है। वह वक्फ बोर्ड के अधीन है। उधर, ग्राम पंचायत का दावा है कि पिछले करीब 90 वर्षों से पक्का पुल धाम ग्राम पंचायत के अधीन है और इस जमीन पर पक्का पुल धाम बना हुआ है वह जमीन ऊंचा समाना के ग्रामीणों की है और जमीन के सभी दस्तावेज भी ग्रामीणों के नाम पर ही है। पक्का पुल को अपने अधीन लेने के लिए वक्फ बोर्ड ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था और वक्फ बोर्ड के अधिकारियों का दावा है कि वह लोअर कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक यह केस जीत चुके हैं। केस में ग्राम पंचायत हार चुकी है। उधर ग्रामीणों ने धाम की देखरेख के लिए पक्का पुल धाम के नाम से एक कमेटी का गठन कर दिया और पिछले कई वर्षों से यह कमेटी ही पक्के पुल धाम की देखरेख कर रही है।
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1936 से ग्रामीणों के नाम है जमीन
पक्का पुल धाम कमेटी के प्रधान राजेंद्र राणा ने बताया कि वर्ष 1936 से पक्का पुल धाम ऊंचा समाना के ग्रामीणों की जमीन पर बना हुआ है और पूरे दस्तावेज ग्रामीणों के नाम पर ही चले आ रहे हैं। पहले इसकी देखरेख ग्राम पंचायत के अधीन थी, लेकिन न्यायालय में ग्राम पंचायत केस हार जाने के कारण इस पूरे धाम की देखरेख अब एक कमेटी कर रही है। उन्होंने बताया कि पक्के पुल धाम पर लाखों हिंदुओं की आस्था जुड़ी हुई है। पक्का पुल हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। उन्होंने बताया कि जिस भूमि पर पक्का पुल धाम बना हुआ है, उस जमीन की रजिस्ट्री ग्रामीणों के नाम है। वर्ष 1936 से यह जमीन ग्रामीणों के नाम चली आ रही है। वक्फ बोर्ड बेवजह इस जमीन पर कब्जा जमाने की कोशिश कर रहा है। धाम पर कब्जा कार्रवाई की सूचना को लेकर बड़ी मात्रा में ग्रामीण पक्का पुल धाम पर जमा हो गए।
उन्होंने बताया कि सूचना मिली थी कि आज वक्फ बोर्ड के अधिकारियों की तरफ से धाम पर कुछ कार्रवाई की जानी है। मौके पर अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी आता है तो उनसे बातचीत की जाएगी लेकिन पुलिस फोर्स न मिलने के कारण आज फिर वक्फ बोर्ड के अधिकारियों को लौटना पड़ा है।
न्यायालय के आदेश पर पक्का पुल धाम पर कब्जा कार्रवाई की जानी थी, लेकिन पुलिस फोर्स न मिलने से कब्जा कार्रवाई नहीं हो पाई है।
-विचित्र नारायण शर्मा, नायब तहसील, करनाल