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नहीं सुधरे हालात, वातावरण में जहर बरकरार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 19 Nov 2021 02:27 AM IST
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The situation did not improve, the poison remained in the atmosphere
संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। वायु गुणवत्ता सूचकांक में सुधार नहीं हुआ है। जिससे वातावरण में जहर बरकरार है। वीरवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक पीएम2.5 औसतन 299, न्यूनतम 215 व अधिकतम 338 आंका गया। पीएम10 का स्तर औसतन 193, न्यूनतम 122 व अधिकतम 331 के स्तर पर आंका गया।
वहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सख्ती के बाद वीरवार को शहर में धूल के कणों को दबाने के लिए निर्माण स्थलों व सड़कों पर पानी का छिड़काव किया गया। निर्माण सामग्री पर तिरपालें डाली गई। नगर निगम की टीमें पानी के टैंकर लेकर सड़कों पर छिड़काव करती रही। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के उपमंडल अधिकारी शैलेंद्र अरोड़ा ने पूरे दिन शहर में विभिन्न स्थलों का निरीक्षण किया। उन्होंने बिल्डरों को सख्त हिदायत दी कि निर्माण स्थल पर किसी भी सूरत में धूल नहीं उड़नी चाहिए। तमाम निर्माण कार्य फिलहाल बंद रहेंगे। प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर शिकंजा कसने के लिए परिवहन विभाग व पुलिस को चालान करने के लिए भी कहा गया है। संवाद
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82 किसानों पर एफआईआर
फसल अवशेषों में आगजनी की घटनाओं को रोकने के लिए कृषि विभाग सख्ती बरत रहा है। धान कटाई के सीजन में अब तक अवशेष जलाने वाले 478 किसानों पर 12.42 लाख 500 रुपये जुर्माना किया जा चुका है। 82 किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई हैं। सेटेलाइट के माध्यम से जिले में आगजनी की अब तक कुल 948 सूचनाएं प्राप्त हुई। इनमें से 769 स्थानों पर आगजनी पाई गई। जांच में 124 स्थानों पर आगजनी नहीं मिली।
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फेफड़ों, स्नायुतंत्र पर पड़ सकता है दुष्प्रभाव
वातावरण में प्रदूषित कणों के साथ सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड व ओजोन गैस की सांद्रता भी खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। ये तीनों गैस स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं। इसी कारण इन दिनों अस्थमा, गले में खराश, बुखार, जुकाम व फेफड़ों संबंधी दिक्कतें बढ़ रही हैं। ये गैसें फेफड़े व स्नायुतंत्र पर दुष्प्रभाव डालती हैं।
प्राचार्य एवं रसायनशास्त्री डॉ. राकेश भारद्वाज ने बताया कि वीरवार को पर्यावरण में सल्फर डाइऑक्साइड गैस की सांद्रता अधिकतम 101 माइक्रोग्राम प्रति मीटर क्यूब के स्तर पर आंकी गई। कार्बन मोनोआइक्साइड की मात्रा 136 मिलीग्राम प्रति मीटर क्यूब तथा ओजोन गैस की सांद्रता 33 माइक्रोग्राम प्रति मीटर क्यूब अधिकतम मापी गई है। सल्फर डाइऑक्साइड व कार्बन मोनोऑक्साइड की सांद्रता पर्यावरण के अंदर 2.5 पर्टीकुलेट मैटर के साथ सामान्य से बहुत अधिक है जो कि खतरनाक स्तर पर है।

डॉ. भारद्वाज ने बताया कि जब तक तेज हवा या हल्की बौछार नहीं पड़ेगी तब तक प्रदूषण का गुबार हवा में कायम रहेगा। यह गुबार वातावरण में निम्न दबाव के क्षेत्र की तरफ पलायन करता रहेगा। इसलिए घर से बाहर जा रहे हैं तो मास्क लगाकर निकलें। बाहर से जब घर आ रहे हैं तो भाप जरूर लें।
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