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मेडिकल कॉलेज के निर्माण में लगी दूसरी कंपनी
करनाल
Updated Tue, 13 May 2014 12:20 AM IST
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जिले का महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज का एक
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कंपनी द्वारा पिछले तीन महीने से बंद पड़ा निर्माण कार्य सोमवार से शुरू हो
गया है।
सुप्रीम कंपनी की जगह डीआरएस ग्रुप ने काम संभाला है। करीब 650 करोड़ रुपये से तैयार हो रहा मेडिकल कॉलेज का टेंडर एचएससीसी को दिया है। वह आगे तीन कंपनियों से काम करवा रही है। एक कंपनी के करीब तीन करोड़ आठ लाख रुपये के बिल पास न होने पर कंपनी ने काम बंद कर दिया था।
दो माह काम बंद होने के बाद ‘अमर उजाला’ ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों से लेकर प्रशासन के हाथ पांव फूल गए। विपक्ष ने भी इस पर काफी हल्ला बोला।
सोमवार को नई कंपनी के आए कर्मचारी व्यवस्था बनाने में ही लगे रहे।
लंबे समय से काम बंद रहने से घास और सामान बिखरा है। सोमवार को नये कर्मचारियों ने मिट्टी के लेवल से लेकर निर्माण कार्य की सफाई कराई। इस अव्यवस्था का पूरा जिम्मेदार मेडिकल कॉलेज के अफसर हैं। यदि एक कंपनी द्वारा काम बंद करते ही दूसरी कंपनी को काम पर लगा देते तो मेडिकल कॉलेज का तीन महीने तक काम बंद नहीं रहता। इस पूरी अव्यवस्था पर नजर रखने के बाद अब अधिकारियों ने एजेंसी पर दबाव बनाया और काम आखिरकार चालू करवा दिया। इस काम को रफ्तार पकड़ने में सप्ताहभर लगना तय है।
इस तरह करना है काम
मेडिकल कॉलेज के निर्माण कार्य पर तीन कंपनियां काम कर रही हैं। जिनको 21 महीने में निर्माण कार्य पूरा करना है। जेएसएम कंपनी ने करीब 282 करोड़, सुप्रीम कंपनी ने करीब 137 करोड़, जो अब डीएसआर ग्रुप करेगा व एक अन्य कंपनी ने करीब छह करोड़ रुपये निर्माण कार्य करना है। 137 करोड़ रुपये वाला काम धीमी गति से चल रहा है। इसका तय टाइम से लेट होना तय है। जब अमर उजाला ने मेडिकल कॉलेज के बंद पड़े निर्माण कार्य के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उसके बाद प्रशासन भी हरकत में आया। इसके बाद मेडिकल कॉलेज के निर्माण कार्य का निरीक्षण करने डीसी पहुंचे। बाद में पुलिस आवास के डीजीपी संधू ने भी निरीक्षण किया। वे भी कुल मिलाकर काम बंद को जल्द शुरू करने के आदेश देते रहे।
स्टेप जमाने में लग सकता है टाइम
सुप्रीम कंपनी यदि नई कंपनी को सहयोग नहीं करेगी तो नई कंपनी को काम करने में मुश्किलें आनी तय है। कंपनी को पूरा स्टेप जमाने में एक महीने लग सकता है और करीब 50 लाख रुपये खर्च भी होंगे। यदि सुप्रीम कंपनी सहयोग करेगी तो स्टेप बनाया हुआ है और काम शुरू करने की ही देर है। सोमवार को कर्मचारियों ने बताया कि दो से तीन दिन में निर्माण सामग्री आ जाएगी और कार्य शुरू हो जाएगा।
सुप्रीम कंपनी की जगह डीआरएस ग्रुप ने काम संभाला है। करीब 650 करोड़ रुपये से तैयार हो रहा मेडिकल कॉलेज का टेंडर एचएससीसी को दिया है। वह आगे तीन कंपनियों से काम करवा रही है। एक कंपनी के करीब तीन करोड़ आठ लाख रुपये के बिल पास न होने पर कंपनी ने काम बंद कर दिया था।
दो माह काम बंद होने के बाद ‘अमर उजाला’ ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों से लेकर प्रशासन के हाथ पांव फूल गए। विपक्ष ने भी इस पर काफी हल्ला बोला।
सोमवार को नई कंपनी के आए कर्मचारी व्यवस्था बनाने में ही लगे रहे।
लंबे समय से काम बंद रहने से घास और सामान बिखरा है। सोमवार को नये कर्मचारियों ने मिट्टी के लेवल से लेकर निर्माण कार्य की सफाई कराई। इस अव्यवस्था का पूरा जिम्मेदार मेडिकल कॉलेज के अफसर हैं। यदि एक कंपनी द्वारा काम बंद करते ही दूसरी कंपनी को काम पर लगा देते तो मेडिकल कॉलेज का तीन महीने तक काम बंद नहीं रहता। इस पूरी अव्यवस्था पर नजर रखने के बाद अब अधिकारियों ने एजेंसी पर दबाव बनाया और काम आखिरकार चालू करवा दिया। इस काम को रफ्तार पकड़ने में सप्ताहभर लगना तय है।
इस तरह करना है काम
मेडिकल कॉलेज के निर्माण कार्य पर तीन कंपनियां काम कर रही हैं। जिनको 21 महीने में निर्माण कार्य पूरा करना है। जेएसएम कंपनी ने करीब 282 करोड़, सुप्रीम कंपनी ने करीब 137 करोड़, जो अब डीएसआर ग्रुप करेगा व एक अन्य कंपनी ने करीब छह करोड़ रुपये निर्माण कार्य करना है। 137 करोड़ रुपये वाला काम धीमी गति से चल रहा है। इसका तय टाइम से लेट होना तय है। जब अमर उजाला ने मेडिकल कॉलेज के बंद पड़े निर्माण कार्य के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उसके बाद प्रशासन भी हरकत में आया। इसके बाद मेडिकल कॉलेज के निर्माण कार्य का निरीक्षण करने डीसी पहुंचे। बाद में पुलिस आवास के डीजीपी संधू ने भी निरीक्षण किया। वे भी कुल मिलाकर काम बंद को जल्द शुरू करने के आदेश देते रहे।
स्टेप जमाने में लग सकता है टाइम
सुप्रीम कंपनी यदि नई कंपनी को सहयोग नहीं करेगी तो नई कंपनी को काम करने में मुश्किलें आनी तय है। कंपनी को पूरा स्टेप जमाने में एक महीने लग सकता है और करीब 50 लाख रुपये खर्च भी होंगे। यदि सुप्रीम कंपनी सहयोग करेगी तो स्टेप बनाया हुआ है और काम शुरू करने की ही देर है। सोमवार को कर्मचारियों ने बताया कि दो से तीन दिन में निर्माण सामग्री आ जाएगी और कार्य शुरू हो जाएगा।