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Karnal News: स्कूल ने बदले अंडरटेकिंग लिखे दाखिला फार्म
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। स्कूल बस हादसा होने पर खुद जिम्मेदार होने की अभिभावकों से अंडरटेकिंग लेने वाला घरौंडा का स्कूल मामला उजागर होने पर बैकफुट पर आ गया है। प्रबंधन ने स्कूल में पढ़ने वाले प्रत्येक विद्यार्थी के घर जाकर दाखिला फार्म नया छपवाकर दोबारा भरवाना शुरू कर दिया है। इस बार इस तरह की अंडरटेकिंग भी नहीं ली जा रही है।
स्कूल में घरौंडा के खंड शिक्षा अधिकारी रविंद्र के नेतृत्व में शिक्षा विभाग की टीम ने छापा भी मारा। इस दौरान टीम ने स्कूल के रिकाॅर्ड को अपने कब्जे में लिया है। जिसमें कई विद्यार्थियों के फार्म इस तरह की अंडरटेकिंग वाले बरामद हुए हैं। इसके अलावा प्रबंधन की ओर से इन्हीं विद्यार्थियों के नए भरवाए हुए दाखिला फार्म भी दिखाए। इसकी प्रति भी जांच टीम ने रिकाॅर्ड में दर्ज की है।
अमर उजाला ने अंडरटेकिंग लेते हुए अपनी जिम्मेदारी से बचते हुए स्कूलों का मामला उजागर किया था। 18 अप्रैल को अमर उजाला ने मुख्य संस्करण में इस मुद्दे पर खबर प्रकाशित की थी। इसके अगले दिन सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि और अभिभावकों ने उपायुक्त उत्तम सिंह से मुलाकात करके जांच की मांग की थी। उपायुक्त ने जिला शिक्षा अधिकारी को जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद ही खंड शिक्षा अधिकारी की टीम ने स्कूल का दौरा किया। अब स्कूल प्रबंधन भी नए सिरे से फार्म भरवा रहा हैं। इधर, अभिभावक भी अब फार्म को पूरा पढ़ने के बाद हस्ताक्षर कर रहे हैं। जिले में कई स्कूल और भी ऐसे हैं, अभिभावक संघ का कहना है कि सभी स्कूलों के दाखिला फार्मों की जांच होनी चाहिए।
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प्रबंधन ने मानी गलती, बोले- दूसरे को देख छपवाया था फार्म
गुपचुप अंडरटेकिंग लेने वाले एक प्ले वे स्कूल ने भी गलती मानी है। मामला उजागर होने के बाद प्रिंटिंग प्रेस की गलती बताई है। उनका दावा है कि प्रिंटिंग प्रेस की ओर से इस तरह की लाइन कई स्कूलों के दाखिला फार्म में छापी गई थी। हमने भी वहीं से इसे कॉपी किया है। स्कूल प्रिंसिपल और संचालक का कहना है कि स्कूल बस में हादसा होने पर जिम्मेदारी उन्हीं की है।
जिले के सभी स्कूलों की हो जांच
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ तेजपाल, एडवोकेट संदीप राणा और एडवोकेट अंशुल चौधरी का कहना है कि अभी तो केवल एक स्कूल की जांच हुई और स्कूल को दाखिला फार्म बदलने पड़े। अमर उजाला ने जनता के हित में मुद्दा उठाया है। प्रशासन को संज्ञान लेते हुए सभी स्कूलों के दाखिला फार्म और अन्य दस्तावेजों की रैंडम जांच करानी चाहिए। ताकि पता चले कितने स्कूल केवल मुनाफा कमाने में लगे हैं।
वर्जन
स्कूल का दौरा किया था। अंडरटेकिंग अब नए दाखिला फार्म से स्कूल ने हटवा दी है। यदि भविष्य में कोई लापरवाही मिली तो कार्रवाई भी होगी, इसकी चेतावनी दी है। स्कूल का दाखिले संबंधित रिकाॅर्ड भी लिया है। ताकि गहनता से जांच हो सके।
- रविंद्र, खंड शिक्षा अधिकारी घरौंडा
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करनाल। स्कूल बस हादसा होने पर खुद जिम्मेदार होने की अभिभावकों से अंडरटेकिंग लेने वाला घरौंडा का स्कूल मामला उजागर होने पर बैकफुट पर आ गया है। प्रबंधन ने स्कूल में पढ़ने वाले प्रत्येक विद्यार्थी के घर जाकर दाखिला फार्म नया छपवाकर दोबारा भरवाना शुरू कर दिया है। इस बार इस तरह की अंडरटेकिंग भी नहीं ली जा रही है।
स्कूल में घरौंडा के खंड शिक्षा अधिकारी रविंद्र के नेतृत्व में शिक्षा विभाग की टीम ने छापा भी मारा। इस दौरान टीम ने स्कूल के रिकाॅर्ड को अपने कब्जे में लिया है। जिसमें कई विद्यार्थियों के फार्म इस तरह की अंडरटेकिंग वाले बरामद हुए हैं। इसके अलावा प्रबंधन की ओर से इन्हीं विद्यार्थियों के नए भरवाए हुए दाखिला फार्म भी दिखाए। इसकी प्रति भी जांच टीम ने रिकाॅर्ड में दर्ज की है।
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अमर उजाला ने अंडरटेकिंग लेते हुए अपनी जिम्मेदारी से बचते हुए स्कूलों का मामला उजागर किया था। 18 अप्रैल को अमर उजाला ने मुख्य संस्करण में इस मुद्दे पर खबर प्रकाशित की थी। इसके अगले दिन सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि और अभिभावकों ने उपायुक्त उत्तम सिंह से मुलाकात करके जांच की मांग की थी। उपायुक्त ने जिला शिक्षा अधिकारी को जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद ही खंड शिक्षा अधिकारी की टीम ने स्कूल का दौरा किया। अब स्कूल प्रबंधन भी नए सिरे से फार्म भरवा रहा हैं। इधर, अभिभावक भी अब फार्म को पूरा पढ़ने के बाद हस्ताक्षर कर रहे हैं। जिले में कई स्कूल और भी ऐसे हैं, अभिभावक संघ का कहना है कि सभी स्कूलों के दाखिला फार्मों की जांच होनी चाहिए।
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प्रबंधन ने मानी गलती, बोले- दूसरे को देख छपवाया था फार्म
गुपचुप अंडरटेकिंग लेने वाले एक प्ले वे स्कूल ने भी गलती मानी है। मामला उजागर होने के बाद प्रिंटिंग प्रेस की गलती बताई है। उनका दावा है कि प्रिंटिंग प्रेस की ओर से इस तरह की लाइन कई स्कूलों के दाखिला फार्म में छापी गई थी। हमने भी वहीं से इसे कॉपी किया है। स्कूल प्रिंसिपल और संचालक का कहना है कि स्कूल बस में हादसा होने पर जिम्मेदारी उन्हीं की है।
जिले के सभी स्कूलों की हो जांच
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ तेजपाल, एडवोकेट संदीप राणा और एडवोकेट अंशुल चौधरी का कहना है कि अभी तो केवल एक स्कूल की जांच हुई और स्कूल को दाखिला फार्म बदलने पड़े। अमर उजाला ने जनता के हित में मुद्दा उठाया है। प्रशासन को संज्ञान लेते हुए सभी स्कूलों के दाखिला फार्म और अन्य दस्तावेजों की रैंडम जांच करानी चाहिए। ताकि पता चले कितने स्कूल केवल मुनाफा कमाने में लगे हैं।
वर्जन
स्कूल का दौरा किया था। अंडरटेकिंग अब नए दाखिला फार्म से स्कूल ने हटवा दी है। यदि भविष्य में कोई लापरवाही मिली तो कार्रवाई भी होगी, इसकी चेतावनी दी है। स्कूल का दाखिले संबंधित रिकाॅर्ड भी लिया है। ताकि गहनता से जांच हो सके।
- रविंद्र, खंड शिक्षा अधिकारी घरौंडा