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Karnal News: कॉलेज में लगी सैनेटरी पैड मशीन 11 साल से खराब पड़ी
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिले के डीएवी पीजी कॉलेज में 12 साल पहले सरकारी योजना के तहत लगाई गई सैनेटरी पैड वेंडिंग मशीन खराब पड़ी है। 11 साल से इसे ठीक नहीं कराया गया। छात्राएं दुकान से या कैंटीन से पैड खरीदने के लिए मजबूर हैं। जरूरत पर शिक्षिकाओं भी मदद करती हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जिले के काॅलेजों में पड़ताल में पता चला कि सैनेटरी वेंडिंग मशीनें लगाने के प्रति गंभीरता नहीं बरती गई। कुछ काॅलेजों में तो लगाई ही नहीं गई। केवीए डीएवी वुमन कॉलेज में भी मशीन नहीं लगाई गई। डीएवी पीजी कॉलेज में वर्ष 2014 में एक मशीन ही लगाई गई थी। यह मशीन मुश्किल से एक साल ही उपयोग में लाई गई। इसके बाद खराब पड़ी हुई है। नगर निगम की ओर से लगाई गई इस मशीन की न तो निगम ने मरम्मत कराई न प्रबंधन ने सुध ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मेंस्ट्रुअल हेल्थ यानी मासिक धर्म स्वास्थ्य का अधिकार संविधान में दिए गए जीवन के मौलिक अधिकार का हिस्सा है।
-चार साल से नहीं किया कभी मशीन का उपयोग
डीएवी काॅलेज की छात्रा श्रुति का कहना है कि उन्हें कॉलेज में पढ़ते हुए चार साल होने को है लेकिन कभी भी इस मशीनों को उपयोग नहीं किया। इसमें न तो पैड होते हैं न ही यह चलती है। इमरजेंसी में पैड शिक्षिकाओं से या अन्य छात्राओं से कहकर मंगाने पड़ते हैं।
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-तीन से चार शौचालय, एक में भी मशीन नहीं
केवीए डीएवी काॅलेज की छात्रा शुभांगी शर्मा ने बताया कि उनके कॉलेज में तीन से चार शौचालय है लेकिन एक में भी सैनेटरी पैड वेंडिंग मशीन की सुविधा नहीं है। कॉलेज की कैंटीन और शिक्षिकाओं से इमरजेंसी में पैड लेने पड़ते हैं। अगर मशीन लगी होती है तो बिना किसी झिझक के समस्या को संभाला जा सकता है।
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-समय पर करवाई जाए मशीनों की मरम्मत
खालसा काॅलेज की छात्रा सुनीता ने बताया कि उनके कॉलेज में केवल एक ही मशीन है लेकिन पिछले दो साल से यही देख रही हैं कि मशीन की तार ही टूटी हुई है। ऐसे में छात्राओं को अचानक जरूरत पड़ने पर कोई रास्ता नहीं दिखता। कॉलेज में मशीनों की मरम्मत की उचित व्यवस्था की जानी चाहिए।
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प्रबंधक का कहना है:
केवीए डीएवी कॉलेज की प्राचार्या मीनू ने बताया कि कुछ साल पहले जेसीआई संस्था की ओर से एक मशीन तो वहीं काॅलेज ने अपने स्तर पर दो मशीनें लगवाई थीं। कॉलेज में मरम्मत का काम चलने के कारण इन्हें बंद कर दिया गया है।
-डीएवी कॉलेज के डिप्टी सुपरिटेंडेंट विक्रम ने बताया कि 12 साल पहले केवल एक मशीन सरकार की ओर से लगाई गई थी। एक से दो साल उपयोग छात्राओं की ओर से किया भी गया। काफी समय से मशीन बंद है। सरकार की ओर से मरम्मत नहीं कराई गई।
-जल्द ही निर्देश दिए जाएंगे की जिन कॉलेजों में सैनेटरी पैड वेंडिंग मशीनें नहीं हैं वहां लगवाई जाएं। जहां पर मशीनें खराब व खस्ता हालत में हैं उन्हें ठीक करवाया जाएगा। इन मशीनों को ठीक करवाने के लिए पर्याप्त बजट नहीं आ पाता, जिसके कारण इन्हें ठीक करवाने में देरी हो रही है। सभी कॉलेजों के प्राचार्य को आदेश जारी किए जाएंगे ताकि छात्राओं को सुविधाएं मिल सके।- डाॅ. अनीता जून, उच्च जिला शिक्षा अधिकारी
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करनाल। जिले के डीएवी पीजी कॉलेज में 12 साल पहले सरकारी योजना के तहत लगाई गई सैनेटरी पैड वेंडिंग मशीन खराब पड़ी है। 11 साल से इसे ठीक नहीं कराया गया। छात्राएं दुकान से या कैंटीन से पैड खरीदने के लिए मजबूर हैं। जरूरत पर शिक्षिकाओं भी मदद करती हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जिले के काॅलेजों में पड़ताल में पता चला कि सैनेटरी वेंडिंग मशीनें लगाने के प्रति गंभीरता नहीं बरती गई। कुछ काॅलेजों में तो लगाई ही नहीं गई। केवीए डीएवी वुमन कॉलेज में भी मशीन नहीं लगाई गई। डीएवी पीजी कॉलेज में वर्ष 2014 में एक मशीन ही लगाई गई थी। यह मशीन मुश्किल से एक साल ही उपयोग में लाई गई। इसके बाद खराब पड़ी हुई है। नगर निगम की ओर से लगाई गई इस मशीन की न तो निगम ने मरम्मत कराई न प्रबंधन ने सुध ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मेंस्ट्रुअल हेल्थ यानी मासिक धर्म स्वास्थ्य का अधिकार संविधान में दिए गए जीवन के मौलिक अधिकार का हिस्सा है।
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-चार साल से नहीं किया कभी मशीन का उपयोग
डीएवी काॅलेज की छात्रा श्रुति का कहना है कि उन्हें कॉलेज में पढ़ते हुए चार साल होने को है लेकिन कभी भी इस मशीनों को उपयोग नहीं किया। इसमें न तो पैड होते हैं न ही यह चलती है। इमरजेंसी में पैड शिक्षिकाओं से या अन्य छात्राओं से कहकर मंगाने पड़ते हैं।
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-तीन से चार शौचालय, एक में भी मशीन नहीं
केवीए डीएवी काॅलेज की छात्रा शुभांगी शर्मा ने बताया कि उनके कॉलेज में तीन से चार शौचालय है लेकिन एक में भी सैनेटरी पैड वेंडिंग मशीन की सुविधा नहीं है। कॉलेज की कैंटीन और शिक्षिकाओं से इमरजेंसी में पैड लेने पड़ते हैं। अगर मशीन लगी होती है तो बिना किसी झिझक के समस्या को संभाला जा सकता है।
-समय पर करवाई जाए मशीनों की मरम्मत
खालसा काॅलेज की छात्रा सुनीता ने बताया कि उनके कॉलेज में केवल एक ही मशीन है लेकिन पिछले दो साल से यही देख रही हैं कि मशीन की तार ही टूटी हुई है। ऐसे में छात्राओं को अचानक जरूरत पड़ने पर कोई रास्ता नहीं दिखता। कॉलेज में मशीनों की मरम्मत की उचित व्यवस्था की जानी चाहिए।
प्रबंधक का कहना है:
केवीए डीएवी कॉलेज की प्राचार्या मीनू ने बताया कि कुछ साल पहले जेसीआई संस्था की ओर से एक मशीन तो वहीं काॅलेज ने अपने स्तर पर दो मशीनें लगवाई थीं। कॉलेज में मरम्मत का काम चलने के कारण इन्हें बंद कर दिया गया है।
-डीएवी कॉलेज के डिप्टी सुपरिटेंडेंट विक्रम ने बताया कि 12 साल पहले केवल एक मशीन सरकार की ओर से लगाई गई थी। एक से दो साल उपयोग छात्राओं की ओर से किया भी गया। काफी समय से मशीन बंद है। सरकार की ओर से मरम्मत नहीं कराई गई।
-जल्द ही निर्देश दिए जाएंगे की जिन कॉलेजों में सैनेटरी पैड वेंडिंग मशीनें नहीं हैं वहां लगवाई जाएं। जहां पर मशीनें खराब व खस्ता हालत में हैं उन्हें ठीक करवाया जाएगा। इन मशीनों को ठीक करवाने के लिए पर्याप्त बजट नहीं आ पाता, जिसके कारण इन्हें ठीक करवाने में देरी हो रही है। सभी कॉलेजों के प्राचार्य को आदेश जारी किए जाएंगे ताकि छात्राओं को सुविधाएं मिल सके।- डाॅ. अनीता जून, उच्च जिला शिक्षा अधिकारी