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कई पुलिसकर्मियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में
ब्यूरो/अमर उजाला,करनाल
Updated Wed, 24 Feb 2016 12:18 AM IST
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जाट आरक्षण आंदोलन में करनाल में भी कई अधिकारियों व कर्मचारियों की कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में है। भाजपा व संघ के पदाधिकारियों ने इसकी शिकायत सीएम मनोहर लाल तक पहुंचा दी है। सीएम ने आला अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है। उधर, अब कर्मचारियों व अधिकारियों में हड़कंप का माहौल बना हुआ है।
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गौरतलब है कि करनाल जिले में तीन दिन तक दर्जनभर से ज्यादा स्थानों पर आरक्षण के नाम पर सभी रास्ते ब्लाक कर दिए गए थे। इतना ही नहीं मंगलौरा पुलिस चौकी पर पुलिस की बाइक फूंक दी गई और चिड़ाव मोड़ पर राहगीर की बाइक फूंकी और गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए गए। इतना ही नहीं गाड़ियों में बैठी महिलाओं के साथ भी बदसलूकी की गई। इनको रोकने में करनाल पुलिस विफल रही है, साथ ही सबसे बड़ी बात यह भी है कि पुलिस द्वारा गांव मंगलौरा को छोड़कर अन्य स्थानों पर जाम खुलवाने की कोशिश भी नहीं की गई।
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संघ के नेताओं का आरोप है कि जाम खुलवा रहे सामाजिक संस्थाओं के लोगों पर पुलिस ने लाठी बरसाई और जाम लगाने वालों को एक बार भी जाम खोलने तक को नहीं कहा गया। भाजपा के एक नेता ने बताया कि ग्रामीण व कार्यकर्ता इस बात की पुख्ता शिकायत कर रहे हैं कुछ पुलिस जवानों और इंस्पेक्टर स्तर व उससे ऊपर के अधिकारियों ने जाम लगवाए हैं। यह बहुत ही गैर जिम्मेदाराना कार्य है। ऐसे लोगों की लिस्ट बनाकर सीएम के पास भेजी गई है। सीएम आफिस ने मामले को लेकर रिपोर्ट तलब की है और संदेह के घेरे वाले कर्मचारियों की जांच के आदेश दिए हैं। सूत्रों का कहना है कि आगामी एक सप्ताह तक इन पर कार्रवाई हो सकती है।
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अब शहर में दिखने लगी पुलिस
गौरतलब है कि करनाल मेें तीन दिन तक असंध, घरौंडा, चिड़ाव व इंद्री के गांवों में रास्ते जाम रहे। इस दौरान कम ही पुलिस दिखाई दी। हालांकि, मंगलवार से शहर के हर चौक चौराहे पर पुलिस दिखी। पीसीआर समेत ट्रैफिक पुलिस भी बाजारों में घूमती दिखी, जबकि शहरवासियों का कहना है कि तीन दिन तक पुलिस कर्मचारी शहर में दिखे ही नहीं।