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Karnal News: उफनाई यमुना ने बरपाया कहर, 24 गांव डूबे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 12 Jul 2023 02:16 AM IST
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The raging Yamuna wreaked havoc, drowning 24 villages
30......इंद्री बाढ़ के पानी में डूबी सड़क। संवाद
- करीब 10 हजार एकड़ फसल यमुना का पानी घुसने से हुई बर्बाद, गढ़पुर टापू के पास टूटा तटबंध नहीं बनाया जा सका
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माई सिटी रिपोर्टर



करनाल/इंद्री। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश और हथिनी कुंड बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण जिले के यमुना से लगते क्षेत्र की करीब 10 हजार एकड़ फसल बर्बाद हो गई है। पानी के तेज बहाव के कारण सोमवार शाम गढ़पुर टापू गांव के पास टूटे तटबंध को प्रशासन पाट नहीं सका है। जिसकी वजह से यमुना का पानी लबकरी, कलसौरा, गढ़ी बीरबल, समसपुर, बदरपुर और ब्याना समेत कई गांवों के खेतों में घुस गया है।



इंद्री के 24 गांवों में पानी भर चुका है। बाढ़ के कारण इनमें से जहां 11 गांवों का शहर से संपर्क कट चुका है, वहीं 13 गांवों में बाढ़ का पानी खेतों में घुस चुका है। सैय्यद छपरा, जपती छपरा, कमालपुर गड़रियान, डेरा हलवाना, नबियाबाद और डेरा सिकलीगरान के चारों तरफ पानी ही पानी है। इन गांवों की स्थिति काफी खराब हो चुकी है। गांव में जाने वाले ग्रामीणों को नाव की सहायता से भेजा जा रहा है। यमुना से लगते गांवों में ग्रामीणों से संपर्क किया जा रहा है। प्रभावित क्षेत्र में मोटर बोट के जरिए दवाइयां, भोजन के पैकेट एवं अन्य जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है। चंद्राव, चैगांवा और जपती छपरा में ग्रामीणों तक मदद पहुंचाने के लिए मोटर बोट भी उपलब्ध करवाई गई है।
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डायलिसिस के मरीज और गर्भवती को रेस्क्यू कर पहुंचाया अस्पताल



जपती छपरा गांव चारों ओर पानी से घिरा है। इस गांव में एक डायलिसिस के मरीज विनोद की सूचना मिली। जिसके बाद बीडीपीओ आस्था गर्ग के नेतृत्व में एसडीआरएफ ने विनोद को रेस्क्यू कर बाहर निकाला। उसे मोटर बोट के जरिए गांव से निकालकर स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज भेजा गया। एक गर्भवती को भी रेस्क्यू कर सिविल अस्पताल करनाल भेजा गया। इसके अलावा मोटर बोट के माध्यम से खेतों और दूसरे गांवों में फंसे ग्रामीणों को उनके घर तक सुरक्षित पहुंचाया गया।
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ग्रामीण बोले- लापरवाही पड़ी भारी



ग्रामीण विरेंद्र बुधरैन, सुनील कुमार, हवा सिंह और संजय कुमार आदि ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गढ़पुर टापू के पास तटबंध टूटना प्रशासन की लापरवाही का नतीजा है। प्रशासन को सोमवार दिन से ही पता था कि पटरी में रिसाव हो रहा है। इसके बाद भी पटरी को पाटने का कार्य शुरू नहीं किया। जिस कारण तटबंध टूट गया और हजारों एकड़ फसलें तबाह हो गईं। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि यमुना में करीब छह लाख क्यूसेक पानी बह रहा है, जबकि प्रशासन करीब ढाई लाख क्यूसेक पानी बहने की भ्रामक सूचना दे रहा है।




करीब दो घंटे तक यमुना में फंसे रहे एसडीएम



यमुना में डूबे गांवों में खाना पहुंचाने गए एसडीएम अशोक कुमार की बोट बीच यमुना खराब हो गई। जिस कारण एसडीएम अशोक कुमार अपने सुरक्षाकर्मी के साथ करीब दो घंटे तक पानी में फंसे रहे। प्रशासन ने सूचना मिलने पर रस्सियों के सहारे मोटर बोट को खींचकर एसडीएम को सुरक्षित बाहर निकाला।



ये रही पानी की स्थिति



सुबह 4:00 बजे 218351 क्यूसेक



सुबह 5:00 बजे 230518 क्यूसेक



सुबह 6:00 बजे 251287 क्यूसेक



सुबह 7:00 बजे 272648 क्यूसेक



सुबह 8:00 बजे 320893 क्यूसेक



सुबह 9:00 बजे 320893 क्यूसेक



सुबह 10:00 बजे 34435 क्यूसेक



सुबह 11:00 बजे 359760 क्यूसेक



दोपहर 12:00 बजे 359760 क्यूसेक



दोपहर 1:00 बजे 359760 क्यूसेक



दोपहर 2:00 बजे 226926 क्यूसेक



दोपहर 3:00 बजे 226926 क्यूसेक



दोपहर 4:00 बजे 249183 क्यूसेक



शाम 5:00 बजे 249183 क्यूसेक



बाढ़ के कारण हजारों एकड़ फसल नष्ट हो गई है। प्रशासनिक अधिकारी लगातार बचाव कार्य में लगे हुए हैं।



- साहब सिंह, बीडीपीओ, इंद्री
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