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जीवन का उद्देश्य परमात्मा प्राप्ति : राजपिता रमित
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संत निरंकारी समागम में प्रवचन करते राजपिता रमित। प्रवक्ता मिशन
करनाल। मानव जीवन का मूल उद्देश्य परमात्मा की प्राप्ति करना है और यह अनुभूति सतगुरु की कृपा से ही संभव होती है। जब साधक अपनी मैं को समर्पित कर सतगुरु के चरणों में शीश झुकाता है, तब सतगुरु उसे निरंकार प्रभु के ज्ञान से परिचित करवाते हैं। यह पावन संदेश निरंकारी राजपिता रमित ने सेक्टर-32 में आयोजित निरंकारी सत्संग में साध-संगत को दिया।
सत्संग में रमित ने कहा कि ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति के बाद मानव की नजर और नजरिया दोनों बदल जाते हैं। वह नफरत के स्थान पर प्रेम को अपनाता है और समस्त प्राणी जगत में निरंकार का स्वरूप देखने लगता है। इससे उसका जीवन आनंद और प्रसन्नता से भर जाता है।
उन्होंने कहा कि परमात्मा के होने या न होने से जुड़े मानव के अनेक प्रश्नों का समाधान सतगुरु ब्रह्मज्ञान के माध्यम से करते हैं। परमात्मा का एहसास होने के बाद जीवन के प्रत्येक पल में शुक्राने का भाव जागृत होता है। मनुष्य समझने लगता है कि जीवन की खुशी, आनंद और प्रेम सब निरंकार की कृपा से प्राप्त हो रहे हैं। सतगुरु मानव को किसी बंधन में नहीं बांधते, बल्कि अज्ञान और भ्रम के बंधनों से मुक्त कर जीवन जीने की कला प्रदान करते हैं।
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उन्होंने कहा कि भक्ति के मार्ग पर गुरमत से थोड़ा-सा विचलन भी साधक को सत्य, सतगुरु और परमात्मा से दूर कर सकता है। इसलिए निरंकार पर पूर्ण विश्वास रखते हुए गुरमत के अनुसार भक्ति के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए। उन्होंने समस्त मानव परिवार को प्रेम, सहनशीलता और मानवीय मूल्यों को अपनाने का संदेश देते हुए कहा कि तंगदिली, वैर-विरोध और संकीर्णता से ऊपर उठकर जीवन जीना चाहिए। मानव जीवन अनमोल है और इसका वास्तविक कल्याण परमात्मा को जानकर उसके एहसास में जीवन जीने से ही संभव है।
सत्संग में मेयर रेणु बाला गुप्ता ने पहुंचकर राजपिता रमित से आशीर्वाद प्राप्त किया।
निरंकारी सत्संग में हजारों श्रद्धालुओं ने शामिल होकर निरंकारी राजपिता रमित के पावन संदेश का लाभ प्राप्त किया। सत्संग के दौरान सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रहीं। इस अवसर पर करनाल जोनल इंचार्ज सतीश हंस ने निरंकारी राजपिता रमित का हार्दिक अभिनंदन किया।
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सत्संग में रमित ने कहा कि ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति के बाद मानव की नजर और नजरिया दोनों बदल जाते हैं। वह नफरत के स्थान पर प्रेम को अपनाता है और समस्त प्राणी जगत में निरंकार का स्वरूप देखने लगता है। इससे उसका जीवन आनंद और प्रसन्नता से भर जाता है।
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उन्होंने कहा कि परमात्मा के होने या न होने से जुड़े मानव के अनेक प्रश्नों का समाधान सतगुरु ब्रह्मज्ञान के माध्यम से करते हैं। परमात्मा का एहसास होने के बाद जीवन के प्रत्येक पल में शुक्राने का भाव जागृत होता है। मनुष्य समझने लगता है कि जीवन की खुशी, आनंद और प्रेम सब निरंकार की कृपा से प्राप्त हो रहे हैं। सतगुरु मानव को किसी बंधन में नहीं बांधते, बल्कि अज्ञान और भ्रम के बंधनों से मुक्त कर जीवन जीने की कला प्रदान करते हैं।
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उन्होंने कहा कि भक्ति के मार्ग पर गुरमत से थोड़ा-सा विचलन भी साधक को सत्य, सतगुरु और परमात्मा से दूर कर सकता है। इसलिए निरंकार पर पूर्ण विश्वास रखते हुए गुरमत के अनुसार भक्ति के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए। उन्होंने समस्त मानव परिवार को प्रेम, सहनशीलता और मानवीय मूल्यों को अपनाने का संदेश देते हुए कहा कि तंगदिली, वैर-विरोध और संकीर्णता से ऊपर उठकर जीवन जीना चाहिए। मानव जीवन अनमोल है और इसका वास्तविक कल्याण परमात्मा को जानकर उसके एहसास में जीवन जीने से ही संभव है।
सत्संग में मेयर रेणु बाला गुप्ता ने पहुंचकर राजपिता रमित से आशीर्वाद प्राप्त किया।
निरंकारी सत्संग में हजारों श्रद्धालुओं ने शामिल होकर निरंकारी राजपिता रमित के पावन संदेश का लाभ प्राप्त किया। सत्संग के दौरान सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रहीं। इस अवसर पर करनाल जोनल इंचार्ज सतीश हंस ने निरंकारी राजपिता रमित का हार्दिक अभिनंदन किया।

संत निरंकारी समागम में प्रवचन करते राजपिता रमित। प्रवक्ता मिशन

संत निरंकारी समागम में प्रवचन करते राजपिता रमित। प्रवक्ता मिशन