{"_id":"682115924fae6c3437011441","slug":"the-passion-to-join-the-army-has-remained-intact-for-three-generations-they-became-guards-karnal-news-c-18-knl1008-643423-2025-05-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnal News: तीन पीढ़ियों से सेना में जाने का जज्बा बरकरार, बने प्रहरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karnal News: तीन पीढ़ियों से सेना में जाने का जज्बा बरकरार, बने प्रहरी
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। भारतीय सेना में 1971 की लड़ाई में पति जय सिंह ने योगदान दिया। उसके बाद बड़ा बेटा रमेश चंद 2001 में सेना में भर्ती हुआ तो छोटा बेटा राजपाल 2003 में फौजी बना। नीलोखेड़ी खंड के बडथल गांव की माया देवी का कहना है कि देश सेवा में पहले पति ने नाम कमाया और अब बेटे, पोते व दोहते नाम चमका रहे है। लगातार तीन पीढ़ियां भारतीय सेना में सेवाएं दे रही है।
माया का हौसला इतना बुलंद दिखा कि वह हंसते हुए बोली वीर सपूतों को जन्म दिया है। मेरे लाल बार्डर पर कभी हौसला नहीं तोड़ेंगे। बड़ा बेटा रमेश 2023 में सेना से रिटायर हो गया। उसने अपने दोनों बेटों पवन व सावन जो कि बार्डर पर तैनात है उनको हौसला दिया है कि बेटा घबराना मत जहां भी जरूरत होगी उनका पिता वहीं खड़ा मिलेगा। वह सेना के आदेशों के इंतजार में है आदेश मिलते ही बार्डर पर उनके साथ खड़ा हो जाएगा।
विज्ञापन
करनाल। भारतीय सेना में 1971 की लड़ाई में पति जय सिंह ने योगदान दिया। उसके बाद बड़ा बेटा रमेश चंद 2001 में सेना में भर्ती हुआ तो छोटा बेटा राजपाल 2003 में फौजी बना। नीलोखेड़ी खंड के बडथल गांव की माया देवी का कहना है कि देश सेवा में पहले पति ने नाम कमाया और अब बेटे, पोते व दोहते नाम चमका रहे है। लगातार तीन पीढ़ियां भारतीय सेना में सेवाएं दे रही है।
माया का हौसला इतना बुलंद दिखा कि वह हंसते हुए बोली वीर सपूतों को जन्म दिया है। मेरे लाल बार्डर पर कभी हौसला नहीं तोड़ेंगे। बड़ा बेटा रमेश 2023 में सेना से रिटायर हो गया। उसने अपने दोनों बेटों पवन व सावन जो कि बार्डर पर तैनात है उनको हौसला दिया है कि बेटा घबराना मत जहां भी जरूरत होगी उनका पिता वहीं खड़ा मिलेगा। वह सेना के आदेशों के इंतजार में है आदेश मिलते ही बार्डर पर उनके साथ खड़ा हो जाएगा।
विज्ञापन