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Karnal News: मेडिकल कॉलेज के ऑक्सीजन संयंत्र 10 महीने से निष्क्रिय
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। कोरोना महामारी के समय प्राणवायु मानी जाने वाली ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित करने के नाम पर कल्पना चावला राजकीय चिकित्सा मेडिकल कॉलेज व जिला नागरिक चिकित्सालय में करोड़ो रुपये खर्च करके संयंत्र खरीदे गए। उसके बाद ये मशीनें लंबे समय से खराब पड़ी है। मेडिकल कॉलेज में प्रेशर स्विंग ऐड्जॉर्प्शन (पीएसए) ऑक्सीजन संयंत्र स्थापित किया गया था, वह बीते 18 जुलाई 2024 से बंद पड़ा है।
संयंत्र के वायुपोषक (एयर ड्रायर) में खराबी आने के बाद अब तक इसकी मरम्मत नहीं कराई है। इसका जिक्र महालेखा परीक्षक (कैग) की जांच रिपोर्ट में किया गया है। इस पर कॉलेज प्रशासन से जवाब भी मांगा गया है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में एकमात्र पीएसए संयंत्र स्थापित है, जिसकी क्षमता 200 लीटर प्रति मिनट है और इसकी लागत 28.94 लाख रुपये थी। यह संयंत्र जुलाई 2024 से बंद पड़ा है।
संयंत्र के बंद होने की स्थिति में ऑक्सीजन सिलिंडर के माध्यम से आपूर्ति करनी पड़ी, जिस पर लगभग उतना ही खर्च हुआ जितना संयंत्र की लागत थी। ऐसे में सार्वजनिक धन की दोहरी हानि हुई है। हालांकि कॉलेज प्रशासन का दावा है कि यहां के आक्सीजन प्लांट चालू हालत में हैं। जो आक्सीजन कॉस्ट्रक्टर मशीनें भी खरीदी गई थी, उन्हें महीने में एक या दो बार चलाकर देखा जाता है। ये सभी संयंत्र कोरोना महामारी से निपटने के लिए थे, लेकिन इनका काम तो कभी भी पड़ सकता है, इसलिए ये सभी व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं।
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इधर जिला नागरिक अस्पताल में आक्सीजन प्लांट दो है। दोनों चालू हालत में हैं। स्थानीय प्रशासन का दावा है कि सप्ताह में एक बार इन्हें चलाया जाता है। बड़ा संयंत्र सक्रिय रहता है। नागरिक अस्पताल में दो पीएसए ऑक्सीजन संयंत्र स्थापित किए गए थे। एक 200 लीटर प्रति मिनट क्षमता का जिसकी कीमत 44,55,102 है, और दूसरा 1000 लीटर प्रति मिनट क्षमता का जिसकी लागत 1,18,94,400 है।
अस्पताल के दोनों संयंत्र चालू हैं। बड़ा संयंत्र सप्ताह में एक बार चालू किया जाता है ताकि उसमें कोई तकनीकी खराबी न उत्पन्न हो। जनसंपर्क अधिकारी डॉ. दीपक गोयल ने बताया कि हम यह सुनिश्चित करते हैं कि आपात स्थिति में कोई संयंत्र निष्क्रिय न मिले। इसी कारण नियमित रूप से परीक्षण किया जाता है। अस्पताल में 70 के लगभग ऑक्सीजन संकेंद्रक यंत्र (कॉंस्ट्रक्टर) भी उपलब्ध हैं।
आक्सीजन संयंत्रों को सक्रिय रखा जा रहा : निदेशक
कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ. एमके गर्ग ने बताया कि कोरोना काल के दौरान आक्सीजन प्लांट स्थापित किए थे या जो आक्सीजन कांस्ट्रक्टर खरीदे गए थे, उनको सक्रिय रखने के प्रयास किए जाते हैं। हम ऐसी महामारी से निपटने के लिए हमेशा तैयार है। जिन संयंत्रों की अब जरूरत नही पड़ती तो वह कम चलते हैं लेकिन उन्हें महीने में एक दो बार सक्रिय किया जाता है।
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करनाल। कोरोना महामारी के समय प्राणवायु मानी जाने वाली ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित करने के नाम पर कल्पना चावला राजकीय चिकित्सा मेडिकल कॉलेज व जिला नागरिक चिकित्सालय में करोड़ो रुपये खर्च करके संयंत्र खरीदे गए। उसके बाद ये मशीनें लंबे समय से खराब पड़ी है। मेडिकल कॉलेज में प्रेशर स्विंग ऐड्जॉर्प्शन (पीएसए) ऑक्सीजन संयंत्र स्थापित किया गया था, वह बीते 18 जुलाई 2024 से बंद पड़ा है।
संयंत्र के वायुपोषक (एयर ड्रायर) में खराबी आने के बाद अब तक इसकी मरम्मत नहीं कराई है। इसका जिक्र महालेखा परीक्षक (कैग) की जांच रिपोर्ट में किया गया है। इस पर कॉलेज प्रशासन से जवाब भी मांगा गया है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में एकमात्र पीएसए संयंत्र स्थापित है, जिसकी क्षमता 200 लीटर प्रति मिनट है और इसकी लागत 28.94 लाख रुपये थी। यह संयंत्र जुलाई 2024 से बंद पड़ा है।
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संयंत्र के बंद होने की स्थिति में ऑक्सीजन सिलिंडर के माध्यम से आपूर्ति करनी पड़ी, जिस पर लगभग उतना ही खर्च हुआ जितना संयंत्र की लागत थी। ऐसे में सार्वजनिक धन की दोहरी हानि हुई है। हालांकि कॉलेज प्रशासन का दावा है कि यहां के आक्सीजन प्लांट चालू हालत में हैं। जो आक्सीजन कॉस्ट्रक्टर मशीनें भी खरीदी गई थी, उन्हें महीने में एक या दो बार चलाकर देखा जाता है। ये सभी संयंत्र कोरोना महामारी से निपटने के लिए थे, लेकिन इनका काम तो कभी भी पड़ सकता है, इसलिए ये सभी व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं।
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इधर जिला नागरिक अस्पताल में आक्सीजन प्लांट दो है। दोनों चालू हालत में हैं। स्थानीय प्रशासन का दावा है कि सप्ताह में एक बार इन्हें चलाया जाता है। बड़ा संयंत्र सक्रिय रहता है। नागरिक अस्पताल में दो पीएसए ऑक्सीजन संयंत्र स्थापित किए गए थे। एक 200 लीटर प्रति मिनट क्षमता का जिसकी कीमत 44,55,102 है, और दूसरा 1000 लीटर प्रति मिनट क्षमता का जिसकी लागत 1,18,94,400 है।
अस्पताल के दोनों संयंत्र चालू हैं। बड़ा संयंत्र सप्ताह में एक बार चालू किया जाता है ताकि उसमें कोई तकनीकी खराबी न उत्पन्न हो। जनसंपर्क अधिकारी डॉ. दीपक गोयल ने बताया कि हम यह सुनिश्चित करते हैं कि आपात स्थिति में कोई संयंत्र निष्क्रिय न मिले। इसी कारण नियमित रूप से परीक्षण किया जाता है। अस्पताल में 70 के लगभग ऑक्सीजन संकेंद्रक यंत्र (कॉंस्ट्रक्टर) भी उपलब्ध हैं।
आक्सीजन संयंत्रों को सक्रिय रखा जा रहा : निदेशक
कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ. एमके गर्ग ने बताया कि कोरोना काल के दौरान आक्सीजन प्लांट स्थापित किए थे या जो आक्सीजन कांस्ट्रक्टर खरीदे गए थे, उनको सक्रिय रखने के प्रयास किए जाते हैं। हम ऐसी महामारी से निपटने के लिए हमेशा तैयार है। जिन संयंत्रों की अब जरूरत नही पड़ती तो वह कम चलते हैं लेकिन उन्हें महीने में एक दो बार सक्रिय किया जाता है।