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पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने केंद्र और राज्य सरकार पर साधा निशाना
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अनाज मंडियों में आढ़तियों के गेहूं खरीद कार्य के बहिष्कार के पहले दिन हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री/नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी विभिन्न अनाज मंडियों का दौरा किया। करनाल की नई अनाज मंडी पहुंचे हुड्डा ने गेहूं की ढेरियों पर जाकर किसानों, मजदूरों व आढ़तियों से बातचीत की। इसके बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार गेहूं खरीद के साथ साथ सभी वादों में फेल रही है। अभी तक 50 प्रतिशत किसानों की फसल का पंजीकरण तक नहीं हो सका है। उन्होंने कहा कि आढ़ती बिचौलिये नहीं, बल्कि फैसिलेटर हैं। किसानों के साथ प्रयोग नहीं बल्कि सहयोग करना चाहिए। सरकार को इस मामले को लेकर सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए थी, ताकि समस्या के समाधान का सर्वमान्य रास्ता निकल सके।
नई अनाज मंडी स्टेज शेड पर सबसे पहले आढ़ती राजेश गोयल ने पूर्व मुख्यमंत्री को आढ़तियों की दिक्कतों से अवगत कराया। उन्होंने गेहूं के भुगतान में किसानों को पिछले साल की तरह विकल्प देने पर सहयोग मांगा। किसान अंग्रेज सिंह ने आढ़तियों को किसानों का एटीएम बताते हुए उनके माध्यम से ही भुगतान देने की व्यवस्था लागू कराने की मांग रखी। वहीं नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि गेहूं की नमी का मानक 14 प्रतिशत से घटाकर 12 प्रतिशत किया जाना ठीक नहीं है। मंडी में तो नौ व दस प्रतिशत नमी का गेहूं आ रहा है, फिर भी नहीं खरीदा जा रहा है। प्रति क्विंटल मानक मिश्रण की मात्रा 0.75 प्रतिशत से घटाकर 0.50 प्रतिशत करने पर भी उन्होंने नाराजगी जताई। साथ ही इसे वापस लेने की मांग की।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार का रवैया हमेशा से किसान विरोधी रहा है। यही कारण है कि उनके नेताओं को जगह-जगह विरोध का सामना करना पड़ रहा है। सरकार खाद, बीज, बिजली, दवाई, पेट्रोल-डीजल और कृषि यंत्रों पर जीएसटी के नाम पर मोटी वसूली कर रही है, लेकिन किसान को उचित एमएसपी और एमएसपी का कानून देने के नाम पर चुप्पी साध लेती है। एक अप्रैल से गेहूं खरीद शुरू हुई, 48 घंटे में भुगतान देने का दावा करने वाली सरकार अभी तक एक रुपया भी भुगतान नहीं कर सकी है। उन्होंने कहा कि वह इससे पहले कुरुक्षेत्र की लाडवा, बबैन और थानेसर मंडियों में भी होकर आएं हैं, वहां भी किसान, आढ़ती व श्रमिक परेशान हैं।
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इस मौके पर पूर्व स्पीकर कुलदीप शर्मा, विधायक मेवा सिंह, पूर्व मंत्री अशोक अरोड़ा, भीमसेन मेहता, सुमित्रा सिंह, नरेंद्र सांगवान, कांग्रेस जिला संयोजक त्रिलोचन सिंह, अनिल राणा, रघुवीर संधू, अशोक खुराना, हरीराम सांभा, अनुज सिंगला, गुरनाम लाडी, परमजीत वाल्मीकी आदि शामिल रहे।
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नई अनाज मंडी स्टेज शेड पर सबसे पहले आढ़ती राजेश गोयल ने पूर्व मुख्यमंत्री को आढ़तियों की दिक्कतों से अवगत कराया। उन्होंने गेहूं के भुगतान में किसानों को पिछले साल की तरह विकल्प देने पर सहयोग मांगा। किसान अंग्रेज सिंह ने आढ़तियों को किसानों का एटीएम बताते हुए उनके माध्यम से ही भुगतान देने की व्यवस्था लागू कराने की मांग रखी। वहीं नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि गेहूं की नमी का मानक 14 प्रतिशत से घटाकर 12 प्रतिशत किया जाना ठीक नहीं है। मंडी में तो नौ व दस प्रतिशत नमी का गेहूं आ रहा है, फिर भी नहीं खरीदा जा रहा है। प्रति क्विंटल मानक मिश्रण की मात्रा 0.75 प्रतिशत से घटाकर 0.50 प्रतिशत करने पर भी उन्होंने नाराजगी जताई। साथ ही इसे वापस लेने की मांग की।
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उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार का रवैया हमेशा से किसान विरोधी रहा है। यही कारण है कि उनके नेताओं को जगह-जगह विरोध का सामना करना पड़ रहा है। सरकार खाद, बीज, बिजली, दवाई, पेट्रोल-डीजल और कृषि यंत्रों पर जीएसटी के नाम पर मोटी वसूली कर रही है, लेकिन किसान को उचित एमएसपी और एमएसपी का कानून देने के नाम पर चुप्पी साध लेती है। एक अप्रैल से गेहूं खरीद शुरू हुई, 48 घंटे में भुगतान देने का दावा करने वाली सरकार अभी तक एक रुपया भी भुगतान नहीं कर सकी है। उन्होंने कहा कि वह इससे पहले कुरुक्षेत्र की लाडवा, बबैन और थानेसर मंडियों में भी होकर आएं हैं, वहां भी किसान, आढ़ती व श्रमिक परेशान हैं।
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इस मौके पर पूर्व स्पीकर कुलदीप शर्मा, विधायक मेवा सिंह, पूर्व मंत्री अशोक अरोड़ा, भीमसेन मेहता, सुमित्रा सिंह, नरेंद्र सांगवान, कांग्रेस जिला संयोजक त्रिलोचन सिंह, अनिल राणा, रघुवीर संधू, अशोक खुराना, हरीराम सांभा, अनुज सिंगला, गुरनाम लाडी, परमजीत वाल्मीकी आदि शामिल रहे।