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शुगर मिल की स्पीड देख सड़कों पर उतर गए किसान
कुरुक्षेत्र
Updated Sat, 07 Dec 2013 12:44 AM IST
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कुरुक्षेत्र जिले में शाहाबाद शुगर मिल के कछुआ चाल चलने के कारण किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
किसान सतबीर रामुपरा, रघुबीर सिंह कसीथल, बाबा गुरचरण सिंह, विनोद सिंगला, ओम प्रकाश बुहावी, धर्मपाल सैनी, हाकम मंगौली, ज्ञान सिंह मरचेहड़ी व अन्य किसानों का कहना है कि मिल की पराई न करने पर किसानों ने सराकर के खिलाफ जमकर नारेबाजी और किसानों का कहना है कि मिल में करोड़ों रुपये की धांधली का आरोप लगाते हुए कहा कि मिल के में 10 करोड़ रुपये का बजट आया हुआ था, जिसमें से दो करोड़ रुपये की चेन लगाई थी जोकि खराब पड़ी हुई है।
किसानों का कहना है कि कुछ पैसा थाइबराइजर व बायलर पर लगाया था और मिल हाउस नंबर 4 खराब होने के कारण मिल में गन्ने के पिराई बाईपास की जा रही है, जिससे मिल को काफी नुकसान हो रहा है।
किसानों का कहना है कि पहले बैठक में किसानों का आश्वासन दिया था कि शाहबाद शुगर मिल हर रोज 55 हजार क्विंटल गन्ने की पिराई करेगा, लेकिन मिल को चलते हुए तीन दिन हो गए है पर अब तक 80 हजार क्विंटल गन्ने की पिराई हुई, जिससे रोजाना केवल 26 से 27 हजार क्विंटल गन्ने की पिराई कर रहा है।
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इससे किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है किसानों का कहना है कि यदि शाहबाद शुगर मिल दो सप्ताह पहले चलता तो अब तक किसान कई हजारों एकड़ गेहूं की बीजाई कर सकता था।
किसानों ने कहा कि अगर इस समस्या का समाधान जल्द नहीं किया गया तो किसानों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा और अगले वर्ष गन्ने की बिजाई नहीं की जाएगी। किसानों का कहना है कि गन्ने की पर्ची की खरीद न कटने के कारण किसानों की लेवर की समस्या पैदा हो सकती है और लेवर के लाले पड़ सकते है। कई किसान गन्ना छुलाई की लेबर न मिलने के कारण गन्नें की फसल से तौबा कर चुके हैं।
किसानों ने बताया कि हर वर्ष गन्ने की फसल को समेटने में किसानों को लेबर की समस्या से जूझना पड़ता हैं। आने वाले समय में यह समस्या ओर भी विकराल रूप धारण कर सकती हैं। इस कारण गन्नें के रकबे पर नकारात्मक असर पड़ सकता हैं। किसानों ने बताया की एक ट्राली को मिल में खाली करवाने के लिए तो पहले कई राते सड़क पर काटनी पड़ती है, जिससे कई किसान बीमार पड़ चुके हैं और ट्राली को खाली करने के लिए तीन-तीन दिन मिल में लगाने पड़ रहे हैं जिसको लेकर किसानों में भारी रोष है।
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किसान सतबीर रामुपरा, रघुबीर सिंह कसीथल, बाबा गुरचरण सिंह, विनोद सिंगला, ओम प्रकाश बुहावी, धर्मपाल सैनी, हाकम मंगौली, ज्ञान सिंह मरचेहड़ी व अन्य किसानों का कहना है कि मिल की पराई न करने पर किसानों ने सराकर के खिलाफ जमकर नारेबाजी और किसानों का कहना है कि मिल में करोड़ों रुपये की धांधली का आरोप लगाते हुए कहा कि मिल के में 10 करोड़ रुपये का बजट आया हुआ था, जिसमें से दो करोड़ रुपये की चेन लगाई थी जोकि खराब पड़ी हुई है।
किसानों का कहना है कि कुछ पैसा थाइबराइजर व बायलर पर लगाया था और मिल हाउस नंबर 4 खराब होने के कारण मिल में गन्ने के पिराई बाईपास की जा रही है, जिससे मिल को काफी नुकसान हो रहा है।
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किसानों का कहना है कि पहले बैठक में किसानों का आश्वासन दिया था कि शाहबाद शुगर मिल हर रोज 55 हजार क्विंटल गन्ने की पिराई करेगा, लेकिन मिल को चलते हुए तीन दिन हो गए है पर अब तक 80 हजार क्विंटल गन्ने की पिराई हुई, जिससे रोजाना केवल 26 से 27 हजार क्विंटल गन्ने की पिराई कर रहा है।
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इससे किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है किसानों का कहना है कि यदि शाहबाद शुगर मिल दो सप्ताह पहले चलता तो अब तक किसान कई हजारों एकड़ गेहूं की बीजाई कर सकता था।
किसानों ने कहा कि अगर इस समस्या का समाधान जल्द नहीं किया गया तो किसानों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा और अगले वर्ष गन्ने की बिजाई नहीं की जाएगी। किसानों का कहना है कि गन्ने की पर्ची की खरीद न कटने के कारण किसानों की लेवर की समस्या पैदा हो सकती है और लेवर के लाले पड़ सकते है। कई किसान गन्ना छुलाई की लेबर न मिलने के कारण गन्नें की फसल से तौबा कर चुके हैं।
किसानों ने बताया कि हर वर्ष गन्ने की फसल को समेटने में किसानों को लेबर की समस्या से जूझना पड़ता हैं। आने वाले समय में यह समस्या ओर भी विकराल रूप धारण कर सकती हैं। इस कारण गन्नें के रकबे पर नकारात्मक असर पड़ सकता हैं। किसानों ने बताया की एक ट्राली को मिल में खाली करवाने के लिए तो पहले कई राते सड़क पर काटनी पड़ती है, जिससे कई किसान बीमार पड़ चुके हैं और ट्राली को खाली करने के लिए तीन-तीन दिन मिल में लगाने पड़ रहे हैं जिसको लेकर किसानों में भारी रोष है।