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कोच ने योेग से दी कैंसर को मात
करनाल/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 21 Jun 2015 01:23 AM IST
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खेल ग्राउंड में जीत के झंडे गाड़ने वाले एक शख्स की जंग कैंसर से हो गई।
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एक बार लगा कि जिंदगी और मौत के इस खेल में जिंदगी हारने लगी थी, बस एक जिद
थी कि मौत को हराना है।
इसके लिए योग काम आया। योग ने ऐसी ताकत दी कि कैंसर भी हार गया। आज वह पहले की तरह ही ग्राउंड में खिलाड़ियों के साथ खेल रहे हैं और उन्हें वालीबॉल के दावपेंच सिखा रहे हैं।
यह हौसले की कहानी करनाल के वालीबॉल कोच सुलतान सिंह की है। राहड़ा गांव वासी सुलतान सिंह करनाल के कर्ण स्टेडियम में वालीबॉल कोच के पद पर 1992 से कार्यरत हैं। वर्ष 1994 में वह करनाल में शिफ्ट हो गए थे। दिसंबर 2007 में पता चला कि उन्हें कैंसर है। जनवरी 2008 को उन्हें पीजीआई में दाखिल करवा दिया गया। उसके बाद सात दिन करनाल के एक निजी अस्पताल में दाखिल रहे।
उस दौरान उनके सारे बाल झड़ चुके थे। उन्होंने बताया कि कैंसर होने से पहले उनका वजन 96 किलो था, लेकिन सात दिन अस्पताल में एडमिट होने के बाद उनका वजन केवल 56 किलो रह गया। उन्होंने धीरे-धीरे हौसला रखकर कपालभाति, अनुलोम-विलोम, सूर्य नमस्कार, मयूर आसन, सर्वांगासन शुरू कर दिए।
इसके परिणाम अच्छे मिले। हौसला बढ़ा तो हिम्मत मिली। धीरे धीरे करके वह ध्यान करने लगे, जिससे उनका आत्मबल भी बढ़ा और जीने की जिज्ञासा बढ़ी। सालभर बीमारी से जूझने के बाद वे खेल के मैदान में उतर आए। पिछले एक साल से वह खेल ग्राउंड में उतर रहे हैं। हिम्मत के लिए कोच सुलतान सिंह को स्टेडियम में अन्य कोचों ने भी हौसला दिया।
असाध्य बीमारियों का इलाज संभव
कोच सुलतान ने बताया कि योग से असाध्य बीमारियों का न केवल इलाज बल्कि निदान भी संभव है। बाबा रामदेव के साथ भारतीय योग संस्थान से योग के प्रचार प्रसार में लंबे समय से लगे हैं। नियमित योग से हृदय रोग, शुगर, लीवर संबंधित बीमारी, लकवा, कैंसर, गठिया इत्यादि का इलाज किया जा चुका है। इसके जीते जागते प्रमाण खुद वह स्वयं और भारतीय योग संस्थान में दर्ज सैकड़ों लोग हैं। सुलतान का मानना है कि योग से न केवल शरीर स्वस्थ रहता है, बल्कि यह आत्मबल इतना बढ़ा देता है कि आदमी किसी भी लक्ष्य को हासिल कर सकता है।
कोच सुलतान की उपलब्धि
कोच सुलतान सिंह ने बीए 1986 में दयाल सिंह कॉलेज से की। वालीबॉल का नार्थ जोन में गोल्ड मेडलिस्ट रह चुके हैं। ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी में सुलतान सिंह के मार्गदर्शन में 11 खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके हैं। 2006 में थाइलैंड में हुए वालीबॉल वर्ल्ड यूथ कप हुआ था, उनमें तीन खिलाड़ी दर्शन सिंह, सुरजीत सिंह, रामपाल भारत की टीम में शामिल थे। उस समय फाइनल मैच ब्राजील के साथ हुआ था और भारत दूसरे नंबर पर रहा था। दर्शन सिंह व सुरजीत सिंह वर्तमान में एचएसआईआईडीसी पंचकूला में कार्यरत हैं।ो
इसके लिए योग काम आया। योग ने ऐसी ताकत दी कि कैंसर भी हार गया। आज वह पहले की तरह ही ग्राउंड में खिलाड़ियों के साथ खेल रहे हैं और उन्हें वालीबॉल के दावपेंच सिखा रहे हैं।
यह हौसले की कहानी करनाल के वालीबॉल कोच सुलतान सिंह की है। राहड़ा गांव वासी सुलतान सिंह करनाल के कर्ण स्टेडियम में वालीबॉल कोच के पद पर 1992 से कार्यरत हैं। वर्ष 1994 में वह करनाल में शिफ्ट हो गए थे। दिसंबर 2007 में पता चला कि उन्हें कैंसर है। जनवरी 2008 को उन्हें पीजीआई में दाखिल करवा दिया गया। उसके बाद सात दिन करनाल के एक निजी अस्पताल में दाखिल रहे।
उस दौरान उनके सारे बाल झड़ चुके थे। उन्होंने बताया कि कैंसर होने से पहले उनका वजन 96 किलो था, लेकिन सात दिन अस्पताल में एडमिट होने के बाद उनका वजन केवल 56 किलो रह गया। उन्होंने धीरे-धीरे हौसला रखकर कपालभाति, अनुलोम-विलोम, सूर्य नमस्कार, मयूर आसन, सर्वांगासन शुरू कर दिए।
इसके परिणाम अच्छे मिले। हौसला बढ़ा तो हिम्मत मिली। धीरे धीरे करके वह ध्यान करने लगे, जिससे उनका आत्मबल भी बढ़ा और जीने की जिज्ञासा बढ़ी। सालभर बीमारी से जूझने के बाद वे खेल के मैदान में उतर आए। पिछले एक साल से वह खेल ग्राउंड में उतर रहे हैं। हिम्मत के लिए कोच सुलतान सिंह को स्टेडियम में अन्य कोचों ने भी हौसला दिया।
असाध्य बीमारियों का इलाज संभव
कोच सुलतान ने बताया कि योग से असाध्य बीमारियों का न केवल इलाज बल्कि निदान भी संभव है। बाबा रामदेव के साथ भारतीय योग संस्थान से योग के प्रचार प्रसार में लंबे समय से लगे हैं। नियमित योग से हृदय रोग, शुगर, लीवर संबंधित बीमारी, लकवा, कैंसर, गठिया इत्यादि का इलाज किया जा चुका है। इसके जीते जागते प्रमाण खुद वह स्वयं और भारतीय योग संस्थान में दर्ज सैकड़ों लोग हैं। सुलतान का मानना है कि योग से न केवल शरीर स्वस्थ रहता है, बल्कि यह आत्मबल इतना बढ़ा देता है कि आदमी किसी भी लक्ष्य को हासिल कर सकता है।
कोच सुलतान की उपलब्धि
कोच सुलतान सिंह ने बीए 1986 में दयाल सिंह कॉलेज से की। वालीबॉल का नार्थ जोन में गोल्ड मेडलिस्ट रह चुके हैं। ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी में सुलतान सिंह के मार्गदर्शन में 11 खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके हैं। 2006 में थाइलैंड में हुए वालीबॉल वर्ल्ड यूथ कप हुआ था, उनमें तीन खिलाड़ी दर्शन सिंह, सुरजीत सिंह, रामपाल भारत की टीम में शामिल थे। उस समय फाइनल मैच ब्राजील के साथ हुआ था और भारत दूसरे नंबर पर रहा था। दर्शन सिंह व सुरजीत सिंह वर्तमान में एचएसआईआईडीसी पंचकूला में कार्यरत हैं।ो