{"_id":"6169e9b60636932aa45bfed7","slug":"the-climate-of-karnanagari-deteriorated-late-at-night-after-burning-the-effigies-karnal-news-knl866182138","type":"story","status":"publish","title_hn":"पुतले जलने के बाद देर रात बिगड़ी कर्णनगरी की आबोहवा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पुतले जलने के बाद देर रात बिगड़ी कर्णनगरी की आबोहवा
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। कर्ण नगरी में दशहरा पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। करीब 20 दिन की मेहनत के साथ तैयार हुए बुराई के प्रतीक रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतले दशहरा मैदान में 4 मिनट में ही जलकर खाक हो गए। इधर मंच से अतिथियों ने रिमोट का बटन दबाया, उधर बुराई का प्रतीक रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ लंका सहित मैदान में धू-धू कर जल उठे।
मार्च 2020 से अब तक करीब डेढ़ साल बाद जब दशहरा पर्व पर पहला मेला लगा तो हजारों लोगों की भीड़ उमड़ी। लंका दहन के साथ पुतले दहन की शुरुआत की गई। कर्ण नगरी में पांचवीं बार पुतलों का दहन रिमोट का बटन दबाकर किया गया।
श्री रामलीला सभा की ओर से सेक्टर-4 के मैदान में 118वां विजयदशमी महोत्सव मनाया गया। कार्यक्रम में इंद्री विधायक रामकुमार कश्यप, घरौंडा विधायक हरविन्द्र कल्याण, सीएम के प्रतिनिधि संजय बठला, मेयर रेणू बाला गुप्ता, सांसद संजय भाटिया के पुत्र चांद भाटिया और भाजपा के जिलाध्यक्ष योगेंद्र राणा विशेष रूप से पहुंचे। उन्होंने परंपरा अनुसार सूर्यास्त होने के समय ही पुतलों को अग्नि दी गई। रावण दहन होते ही दशहरा मैदान में श्रीराम के जयकारे गूंजने लगे। अतिथियों ने सभी को भगवान राम के दिखाए मार्ग पर चलते हुए आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। सांसद के बेटे ने बताया कि सांसद पानीपत के कार्यक्रमों में व्यस्त होने के चलते नहीं पहुंच पाए। जबकि कार्यक्रम के मुख्यातिथि सांसद संजय भाटिया ही थे। ब्यूरो
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राम मंदिर की झांकी रही आकर्षण का केंद्र
श्रीरामलीला सभा की ओर से दशहरा पर्व के उपलक्ष्य में शोभायात्रा भी निकाली गई। शोभायात्रा रेलवे रोड स्थित रामलीला भवन से शहर के मुख्य मार्ग से होती हुई दशहरा मैदान पहुंची। जिसे रावण के पुतलों के चारों ओर लगी बैरिकेडिंग के साथ खड़ा किया गया। शोभायात्रा में 17 झांकियां रही। जिसमें भगवान श्रीराम मंदिर की झांकी आकर्षण का केंद्र रही। श्रीगणेश की झांकी के साथ ढोल नगाड़ों ने शोभायात्रा की अगुवाई की। शोभायात्रा में राम जन्म, सीता स्वयंवर, मां दुर्गा, रावण अत्याचार, अशोक वाटिका, लंका में हनुमान व रावण अत्याचार की झांकी दिखाई गई। अशोक वाटिका में हनुमान की झांकी में हनुमान ने दर्शकों को फल का प्रसाद भी बांटा।
लंकेश की आंखों और मुंह से आग उगलते ही गूंजे श्रीराम के जयकारे
हर बार कारीगर रावण के पुतले पर अलग-अलग तरह की कलाकारी दिखाते हैं। चार साल से दहन से पहले रावण का पुतला चारों तरफ गर्दन घुमाकर निहारता था। इस बार ऐसा नहीं हुआ। रिमोट का बटन दबते ही दहन से पहले लंकेश ने आंख और मुंह से रंगीन आग उगली। इस दृश्य को देखते ही मैदान में भगवान राम के जयकारे गूंजे।
पुतलों में फटे इलेक्ट्रिक बम, रंगीन हुई आतिशबाजी
रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले में 2500 इलेक्ट्रिक बम लगाए गए। लंका में भी करीब 500 बम लगाए गए थे। रावण दहन से पूर्व पुलिस ने आसपास के क्षेत्र को खाली करवा दिया ताकि कोई अनहोनी न हो। वहीं दशहरा मैदान में सुरक्षा के लिहाज से अग्निशमन गाड़ी और एंबुलेंस भी तैनात रही। रावण के जलने पर करीब पांच किलोमीटर की परिधि में बम धमाकों की आवाज गूंजी। रावण दहन से पूर्व मैदान में रंगीन आतिशबाजी भी हुई। शाम की हल्की रोशनी में आसमान में रंगीन आतिशबाजी का नजारा ही अलग था। जो लोगों के लिए विशेष आकर्षण बना।
कुछ इस तरह रही दशहरे की झलकियां-
05:14- दशहरा मैदान में पहुंचे अतिथि
05:20- अतिथियों ने दर्शकों को संबोधित किया।
05:41- रिमोर्ट का बटन दबते ही लंका दहन हुआ।
05:42- कुंभकरण का दहन
06:43- मेघनाथ का दहन
06:44- रावण का दहन
हाईवे के फ्लाईओवर और इमारतों पर चढ़कर देखा रावण दहन
रावण दहन देखने के लिए जिले भर से हजारों की संख्या में लोग दशहरा मैदान ग्राउंड पहुंचे थे। मंच के साथ श्रीरामलीला सभा की ओर से करीब एक हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई थी। भीड़ अधिक होने के कारण लोगों ने दशहरा मैदान के साथ लगती विभिन्न सरकारी इमारतों व हाईवे के फ्लाईओवर पर चढ़कर रावण दहन देखा।
एक घंटे तक जाम रहीं सड़कें
दशहरा महोत्सव देखने उमड़ी भीड़ को दशहरा मैदान से निकलने में करीब एक घंटे का समय लग गया। जितनी देर लोग दशहरा मैदान से बाहर आते रहे। उतने समय तक सेक्टर-4, नेशनल हाईवे और अन्य रास्तों पर जाम की स्थिति रही।
किसी ने पूजा की तो किसी ने कराया मुंडन
दशहरा मैदान में विजयदशमी के दिन सुबह से ही रावण की पूजा करने श्रद्धालुओं की भीड़ लगनी शुरू हो गई। हाथ में पूजा की थाली लिए महिलाओं, बुजुर्गों व बच्चों ने रावण के चरणों में शीश नवाया। मैदान में रावण के चरणों में बैठकर श्रद्धालुओं ने कुशा, मिष्ठान, जलेबी, खिल मखाने व धूप-दीप जलाकर पूजा की। पारिवारिक रीति-रिवाज के अनुसार लोगों ने रावण की पूजा के बाद छोटे बच्चों का मुंडन भी कराया।
पुलिस बल रहा तैनात
मैदान में सुरक्षा के लिहाज से पुलिस की ओर से पुख्ता इंतजाम किए गए थे। दशहरा मैदान में पहुंचने के लिए बने दोनों द्वारों पर पुलिस बल तैनात रहा। चेकिंग के बाद ही लोगों को अंदर आने दिया गया। मैदान में चप्पे-चप्पे पर पुलिस के जवान तैनात रहे। इसके अलावा श्रीराम लीला सभा के सिक्योरिटी गार्डों ने भी पुलिस का सहयोग किया।
मेले में बच्चों ने जमकर की खरीदारी
दशहरा मैदान के नजदीक की सड़कों पर सुबह से खिलौनों और खाद्य सामग्री के स्टाल लगने लगे। सुबह दस बजे से ही लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। मेले में लगे स्टालों से बच्चों ने खिलौने व अन्य सामान की जमकर खरीदारी की। बच्चों के लिए तरह-तरह के खिलौने दशहरा स्थल पर थे।
200 रुपये किलो तक बिकी जलेबी
शहर भर में जलेबी के स्टाल लगे। मिष्ठान की बड़ी दुकानों से लेकर फुटपाथ पर लगे जलेबी के स्टालों से लोगों ने जमकर जलेबी की खरीदारी की। बाजार में जलेबी की दुकानों पर 120 रुपये से 200 रुपये प्रति किलोग्राम में जलेबी बिकी। देसी घी से बनी जलेबी 320 से 360 रुपये प्रति किलोग्राम में बिकी। दशहरा देखने हजारों की तदाद में भीड़ उमड़ी। रावण दहन के बाद लोगों ने घरों की ओर चलने के लिए दशहरा मैदान से प्रस्थान किया। इस भीड़ में कई लोगों के बच्चे गुम हो गए। उन्होंने मंच पर आकर इसकी मुनादी भी कराई।
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करनाल। कर्ण नगरी में दशहरा पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। करीब 20 दिन की मेहनत के साथ तैयार हुए बुराई के प्रतीक रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतले दशहरा मैदान में 4 मिनट में ही जलकर खाक हो गए। इधर मंच से अतिथियों ने रिमोट का बटन दबाया, उधर बुराई का प्रतीक रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ लंका सहित मैदान में धू-धू कर जल उठे।
मार्च 2020 से अब तक करीब डेढ़ साल बाद जब दशहरा पर्व पर पहला मेला लगा तो हजारों लोगों की भीड़ उमड़ी। लंका दहन के साथ पुतले दहन की शुरुआत की गई। कर्ण नगरी में पांचवीं बार पुतलों का दहन रिमोट का बटन दबाकर किया गया।
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श्री रामलीला सभा की ओर से सेक्टर-4 के मैदान में 118वां विजयदशमी महोत्सव मनाया गया। कार्यक्रम में इंद्री विधायक रामकुमार कश्यप, घरौंडा विधायक हरविन्द्र कल्याण, सीएम के प्रतिनिधि संजय बठला, मेयर रेणू बाला गुप्ता, सांसद संजय भाटिया के पुत्र चांद भाटिया और भाजपा के जिलाध्यक्ष योगेंद्र राणा विशेष रूप से पहुंचे। उन्होंने परंपरा अनुसार सूर्यास्त होने के समय ही पुतलों को अग्नि दी गई। रावण दहन होते ही दशहरा मैदान में श्रीराम के जयकारे गूंजने लगे। अतिथियों ने सभी को भगवान राम के दिखाए मार्ग पर चलते हुए आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। सांसद के बेटे ने बताया कि सांसद पानीपत के कार्यक्रमों में व्यस्त होने के चलते नहीं पहुंच पाए। जबकि कार्यक्रम के मुख्यातिथि सांसद संजय भाटिया ही थे। ब्यूरो
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राम मंदिर की झांकी रही आकर्षण का केंद्र
श्रीरामलीला सभा की ओर से दशहरा पर्व के उपलक्ष्य में शोभायात्रा भी निकाली गई। शोभायात्रा रेलवे रोड स्थित रामलीला भवन से शहर के मुख्य मार्ग से होती हुई दशहरा मैदान पहुंची। जिसे रावण के पुतलों के चारों ओर लगी बैरिकेडिंग के साथ खड़ा किया गया। शोभायात्रा में 17 झांकियां रही। जिसमें भगवान श्रीराम मंदिर की झांकी आकर्षण का केंद्र रही। श्रीगणेश की झांकी के साथ ढोल नगाड़ों ने शोभायात्रा की अगुवाई की। शोभायात्रा में राम जन्म, सीता स्वयंवर, मां दुर्गा, रावण अत्याचार, अशोक वाटिका, लंका में हनुमान व रावण अत्याचार की झांकी दिखाई गई। अशोक वाटिका में हनुमान की झांकी में हनुमान ने दर्शकों को फल का प्रसाद भी बांटा।
लंकेश की आंखों और मुंह से आग उगलते ही गूंजे श्रीराम के जयकारे
हर बार कारीगर रावण के पुतले पर अलग-अलग तरह की कलाकारी दिखाते हैं। चार साल से दहन से पहले रावण का पुतला चारों तरफ गर्दन घुमाकर निहारता था। इस बार ऐसा नहीं हुआ। रिमोट का बटन दबते ही दहन से पहले लंकेश ने आंख और मुंह से रंगीन आग उगली। इस दृश्य को देखते ही मैदान में भगवान राम के जयकारे गूंजे।
पुतलों में फटे इलेक्ट्रिक बम, रंगीन हुई आतिशबाजी
रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले में 2500 इलेक्ट्रिक बम लगाए गए। लंका में भी करीब 500 बम लगाए गए थे। रावण दहन से पूर्व पुलिस ने आसपास के क्षेत्र को खाली करवा दिया ताकि कोई अनहोनी न हो। वहीं दशहरा मैदान में सुरक्षा के लिहाज से अग्निशमन गाड़ी और एंबुलेंस भी तैनात रही। रावण के जलने पर करीब पांच किलोमीटर की परिधि में बम धमाकों की आवाज गूंजी। रावण दहन से पूर्व मैदान में रंगीन आतिशबाजी भी हुई। शाम की हल्की रोशनी में आसमान में रंगीन आतिशबाजी का नजारा ही अलग था। जो लोगों के लिए विशेष आकर्षण बना।
कुछ इस तरह रही दशहरे की झलकियां-
05:14- दशहरा मैदान में पहुंचे अतिथि
05:20- अतिथियों ने दर्शकों को संबोधित किया।
05:41- रिमोर्ट का बटन दबते ही लंका दहन हुआ।
05:42- कुंभकरण का दहन
06:43- मेघनाथ का दहन
06:44- रावण का दहन
हाईवे के फ्लाईओवर और इमारतों पर चढ़कर देखा रावण दहन
रावण दहन देखने के लिए जिले भर से हजारों की संख्या में लोग दशहरा मैदान ग्राउंड पहुंचे थे। मंच के साथ श्रीरामलीला सभा की ओर से करीब एक हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई थी। भीड़ अधिक होने के कारण लोगों ने दशहरा मैदान के साथ लगती विभिन्न सरकारी इमारतों व हाईवे के फ्लाईओवर पर चढ़कर रावण दहन देखा।
एक घंटे तक जाम रहीं सड़कें
दशहरा महोत्सव देखने उमड़ी भीड़ को दशहरा मैदान से निकलने में करीब एक घंटे का समय लग गया। जितनी देर लोग दशहरा मैदान से बाहर आते रहे। उतने समय तक सेक्टर-4, नेशनल हाईवे और अन्य रास्तों पर जाम की स्थिति रही।
किसी ने पूजा की तो किसी ने कराया मुंडन
दशहरा मैदान में विजयदशमी के दिन सुबह से ही रावण की पूजा करने श्रद्धालुओं की भीड़ लगनी शुरू हो गई। हाथ में पूजा की थाली लिए महिलाओं, बुजुर्गों व बच्चों ने रावण के चरणों में शीश नवाया। मैदान में रावण के चरणों में बैठकर श्रद्धालुओं ने कुशा, मिष्ठान, जलेबी, खिल मखाने व धूप-दीप जलाकर पूजा की। पारिवारिक रीति-रिवाज के अनुसार लोगों ने रावण की पूजा के बाद छोटे बच्चों का मुंडन भी कराया।
पुलिस बल रहा तैनात
मैदान में सुरक्षा के लिहाज से पुलिस की ओर से पुख्ता इंतजाम किए गए थे। दशहरा मैदान में पहुंचने के लिए बने दोनों द्वारों पर पुलिस बल तैनात रहा। चेकिंग के बाद ही लोगों को अंदर आने दिया गया। मैदान में चप्पे-चप्पे पर पुलिस के जवान तैनात रहे। इसके अलावा श्रीराम लीला सभा के सिक्योरिटी गार्डों ने भी पुलिस का सहयोग किया।
मेले में बच्चों ने जमकर की खरीदारी
दशहरा मैदान के नजदीक की सड़कों पर सुबह से खिलौनों और खाद्य सामग्री के स्टाल लगने लगे। सुबह दस बजे से ही लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। मेले में लगे स्टालों से बच्चों ने खिलौने व अन्य सामान की जमकर खरीदारी की। बच्चों के लिए तरह-तरह के खिलौने दशहरा स्थल पर थे।
200 रुपये किलो तक बिकी जलेबी
शहर भर में जलेबी के स्टाल लगे। मिष्ठान की बड़ी दुकानों से लेकर फुटपाथ पर लगे जलेबी के स्टालों से लोगों ने जमकर जलेबी की खरीदारी की। बाजार में जलेबी की दुकानों पर 120 रुपये से 200 रुपये प्रति किलोग्राम में जलेबी बिकी। देसी घी से बनी जलेबी 320 से 360 रुपये प्रति किलोग्राम में बिकी। दशहरा देखने हजारों की तदाद में भीड़ उमड़ी। रावण दहन के बाद लोगों ने घरों की ओर चलने के लिए दशहरा मैदान से प्रस्थान किया। इस भीड़ में कई लोगों के बच्चे गुम हो गए। उन्होंने मंच पर आकर इसकी मुनादी भी कराई।