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Karnal News: आत्महत्या को हादसा बताकर किया था दावा, शिकायत खारिज
Wed, 01 Apr 2026 12:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Wed, 01 Apr 2026 12:17 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। ज़िला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने मंगलपुर गांव निवासी एक पिता राम निवासी की ओर से दायर उस शिकायत को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने अपने बेटे की मृत्यु के बाद बीमा कंपनी से क्लेम की मांग की थी। आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता ने बीमा राशि हड़पने के लिए अपने बयानों को बदला था।
आयोग के फैसले के अनुसार, शिकायतकर्ता राम निवास ने 7 जुलाई, 2023 को अपने बेटे मुकुल के नाम पर एक जीवन बीमा पॉलिसी ली थी। 1 जून, 2025 को मुकुल की मुनक हेड के पास नहर में डूबने से मृत्यु हो गई। शुरुआती पुलिस रिपोर्ट में पिता ने बताया था कि मुकुल ने फोन कर कहा था कि वह आज के बाद बात नहीं करेगा और फिर नहर में छलांग लगा दी। उसे बचाने की कोशिश में बड़ा भाई विशाल भी डूब गया। बाद में क्लेम पाने के लिए शिकायतकर्ता ने हलफनामा दिया कि मुकुल एसी ठीक करने गया था और पैर फिसलने के कारण नहर में गिर गया।
आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह और सदस्यों नीरू अग्रवाल व सर्वजीत कौर ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि पुलिस थाना में दर्ज प्राथमिकी से स्पष्ट है कि यह आत्महत्या का मामला था। बीमा पॉलिसी की शर्तों के अनुसार, यदि बीमा धारक 12 महीने के भीतर आत्महत्या करता है तो पूरी बीमा राशि देय नहीं होती। वहीं बीमा कंपनी ने पहले ही नियमानुसार 21,602 रुपये का भुगतान कर दिया था।
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आयोग ने कहा कि प्रतीत होता है कि हलफनामा केवल बीमा कंपनी से रुपये निकालने के लिए बदला गया था। बीमा कंपनी की ओर से क्लेम रद्द करना बिल्कुल सही है। आयोग ने इस शिकायत को झूठी पाए जाने पर खारिज कर दिया।
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करनाल। ज़िला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने मंगलपुर गांव निवासी एक पिता राम निवासी की ओर से दायर उस शिकायत को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने अपने बेटे की मृत्यु के बाद बीमा कंपनी से क्लेम की मांग की थी। आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता ने बीमा राशि हड़पने के लिए अपने बयानों को बदला था।
आयोग के फैसले के अनुसार, शिकायतकर्ता राम निवास ने 7 जुलाई, 2023 को अपने बेटे मुकुल के नाम पर एक जीवन बीमा पॉलिसी ली थी। 1 जून, 2025 को मुकुल की मुनक हेड के पास नहर में डूबने से मृत्यु हो गई। शुरुआती पुलिस रिपोर्ट में पिता ने बताया था कि मुकुल ने फोन कर कहा था कि वह आज के बाद बात नहीं करेगा और फिर नहर में छलांग लगा दी। उसे बचाने की कोशिश में बड़ा भाई विशाल भी डूब गया। बाद में क्लेम पाने के लिए शिकायतकर्ता ने हलफनामा दिया कि मुकुल एसी ठीक करने गया था और पैर फिसलने के कारण नहर में गिर गया।
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आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह और सदस्यों नीरू अग्रवाल व सर्वजीत कौर ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि पुलिस थाना में दर्ज प्राथमिकी से स्पष्ट है कि यह आत्महत्या का मामला था। बीमा पॉलिसी की शर्तों के अनुसार, यदि बीमा धारक 12 महीने के भीतर आत्महत्या करता है तो पूरी बीमा राशि देय नहीं होती। वहीं बीमा कंपनी ने पहले ही नियमानुसार 21,602 रुपये का भुगतान कर दिया था।
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आयोग ने कहा कि प्रतीत होता है कि हलफनामा केवल बीमा कंपनी से रुपये निकालने के लिए बदला गया था। बीमा कंपनी की ओर से क्लेम रद्द करना बिल्कुल सही है। आयोग ने इस शिकायत को झूठी पाए जाने पर खारिज कर दिया।