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मिल ही गया बच्चे को मां का प्यार, एक साल से चल रहा था केस
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धोखाधड़ी कर नवजात बच्चा गोद लेने के चर्चित मामले में कानूनी दांव पेच को लेकर कई माह तक चली जद्दोजहद के बाद आखिर अदालत ने पैतृक मां को बच्चा सौंपने के आदेश दिए हैं। अदालत के आदेश के बाद जांच अधिकारी शशि बाला बच्चे की पैतृक मां ज्योति को साथ लेकर सूक्ष्म बाल कल्याण समिति कार्यालय पंचकूला में पहुंची। जहां बच्चे का पिछले कई माह से लालन-पालन चल रहा था। अदालत के आदेशानुसार बच्चे को उसकी पैतृक मां के सुपुर्द कर दिया गया।
इससे पूर्व अदालत ने जेल में बंद आरोपित दंपति की जमानत को लेकर भी बच्चे की मां ज्योति से उसका पक्ष जाना। इस पर ज्योति ने कहा कि वह अपना बच्चा लेना चाहती थी। इसलिए आरोपी दंपती को जमानत पर रिहा किए जाने पर अब उसे एतराज नहीं है। हालांकि अदालत ने मामले की जांच अधिकारी से इस पूरे घटनाक्रम के कथित मुख्य सूत्रधार एवं एफआईआर में नामजद मेरठ वासी चिकित्सक दंपति के खिलाफ अब तक की गई कार्रवाई को लेकर अपडेट ली।
बता दें कि इस मामले को लेकर बिहार के छपरा की मूल निवासी ज्योति की शिकायत पर इसी वर्ष 15 जून को कुंजपुरा पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज करवाई गई थी। जिसमें मेरठ निवासी चिकित्सक दंपति पर धोखाधड़ी कर उसका 4 दिन का नवजात शिशु ले जाने का आरोप लगाया गया था। ये प्राथमिकी एसपी गंगाराम पूनिया द्वारा ज्योति की शिकायत पर संज्ञान लिए जाने के बाद दर्ज हुई थी। एसपी गंगाराम पूनिया को दी शिकायत में ज्योति ने बताया था कि कई वर्ष पूर्व गांव कलवेहड़ी निवासी बंजारा समुदाय के एक युवक के साथ उसकी शादी हुई थी। कुछ समय बाद उसके दांपत्य जीवन में दरार आनी शुरू हो गई, लेकिन तब तक वह दो पुत्रों को जन्म दे चुकी थी। जबकि तीसरा बच्चा उसके पेट में पल रहा था। पति पत्नी के बीच मतभेदों के चलते आखिर उन दोनों के रास्ते अलग-अलग हो गए। इसी बीच कुंजपुरा निवासी एक युवती से उसकी जान पहचान हो गई। जिस कारण उसे स्वीटी नामक इस युवती के घर में आश्रय मिल गया। पीड़िता ने बताया कि गंभीर बीमारी से ग्रस्त होने के कारण मेरठ के एक क्लीनिक में उनका उपचार चल रहा था। वह भी स्वीटी के साथ मेरठ क्लीनिक पर आने जाने लगी। कुछ दिन बाद उसका स्वास्थ्य खराब होने लगा तो उसने भी इसी चिकित्सक के पास अपना इलाज करवाना शुरू कर दिया। जिससे चिकित्सक दंपति के साथ उसका अच्छी तरह परिचय हो गया। शिकायतकर्ता ने बताया कि 14 सितंबर 2020 को उसने कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज करनाल में एक लड़के को जन्म दिया। इसके 4 दिन बाद 18 सितंबर को मेरठ निवासी चिकित्सक दंपति उससे मिलने के लिए करनाल अस्पताल में पहुंचे। जहां बच्चे को गंभीर बीमारी की आशंका जताते हुए इलाज के नाम पर यह चिकित्सक दंपति उसके बच्चे को अपने साथ में ले गए। इस दौरान कुछ कोरे कागजों पर उसके हस्ताक्षर भी करवाए गए। कुछ दिन बाद जब उसने अपना बच्चा लौटाने के लिए कहा तो चिकित्सक दंपति ने उसे बच्चा गोद लेने की बात कही। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में चिकित्सक दंपति के निकट रिश्तेदार विशाल एवं उसकी पत्नी नेहा के कब्जे से बच्चे को बरामद करते हुए दोनों को हिरासत में ले लिया। हालांकि विशाल एवं नेहा ने बच्चा गोद लेने का दावा करते हुए कुछ साक्ष्य भी जांच अधिकारी एवं बाल कल्याण समिति की न्यायिक पीठ के समक्ष प्रस्तुत किए लेकिन बच्चा गोद लेने के लिए सही नियम एवं उचित कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप साक्ष्य मौजूद न होने के कारण आरोपी दंपति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। जबकि 9 माह के मासूम बच्चे को एमडीडी बाल भवन समिति फूसगढ़ के सुपुर्द कर दिया। उसके बाद बच्चे की स्वास्थ्य जांच के दौरान हाइड्रोसेफलेस नामक बीमारी की आशंका के चलते चिकित्सक ने उसे पीजीआई चंडीगढ़ रेफर करना पड़ा। तब से ले कर अब तक बच्चा का सूक्ष्म बाल कल्याण समिति पंचकूला में लालन-पालन हो रहा था।
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इससे पूर्व अदालत ने जेल में बंद आरोपित दंपति की जमानत को लेकर भी बच्चे की मां ज्योति से उसका पक्ष जाना। इस पर ज्योति ने कहा कि वह अपना बच्चा लेना चाहती थी। इसलिए आरोपी दंपती को जमानत पर रिहा किए जाने पर अब उसे एतराज नहीं है। हालांकि अदालत ने मामले की जांच अधिकारी से इस पूरे घटनाक्रम के कथित मुख्य सूत्रधार एवं एफआईआर में नामजद मेरठ वासी चिकित्सक दंपति के खिलाफ अब तक की गई कार्रवाई को लेकर अपडेट ली।
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बता दें कि इस मामले को लेकर बिहार के छपरा की मूल निवासी ज्योति की शिकायत पर इसी वर्ष 15 जून को कुंजपुरा पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज करवाई गई थी। जिसमें मेरठ निवासी चिकित्सक दंपति पर धोखाधड़ी कर उसका 4 दिन का नवजात शिशु ले जाने का आरोप लगाया गया था। ये प्राथमिकी एसपी गंगाराम पूनिया द्वारा ज्योति की शिकायत पर संज्ञान लिए जाने के बाद दर्ज हुई थी। एसपी गंगाराम पूनिया को दी शिकायत में ज्योति ने बताया था कि कई वर्ष पूर्व गांव कलवेहड़ी निवासी बंजारा समुदाय के एक युवक के साथ उसकी शादी हुई थी। कुछ समय बाद उसके दांपत्य जीवन में दरार आनी शुरू हो गई, लेकिन तब तक वह दो पुत्रों को जन्म दे चुकी थी। जबकि तीसरा बच्चा उसके पेट में पल रहा था। पति पत्नी के बीच मतभेदों के चलते आखिर उन दोनों के रास्ते अलग-अलग हो गए। इसी बीच कुंजपुरा निवासी एक युवती से उसकी जान पहचान हो गई। जिस कारण उसे स्वीटी नामक इस युवती के घर में आश्रय मिल गया। पीड़िता ने बताया कि गंभीर बीमारी से ग्रस्त होने के कारण मेरठ के एक क्लीनिक में उनका उपचार चल रहा था। वह भी स्वीटी के साथ मेरठ क्लीनिक पर आने जाने लगी। कुछ दिन बाद उसका स्वास्थ्य खराब होने लगा तो उसने भी इसी चिकित्सक के पास अपना इलाज करवाना शुरू कर दिया। जिससे चिकित्सक दंपति के साथ उसका अच्छी तरह परिचय हो गया। शिकायतकर्ता ने बताया कि 14 सितंबर 2020 को उसने कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज करनाल में एक लड़के को जन्म दिया। इसके 4 दिन बाद 18 सितंबर को मेरठ निवासी चिकित्सक दंपति उससे मिलने के लिए करनाल अस्पताल में पहुंचे। जहां बच्चे को गंभीर बीमारी की आशंका जताते हुए इलाज के नाम पर यह चिकित्सक दंपति उसके बच्चे को अपने साथ में ले गए। इस दौरान कुछ कोरे कागजों पर उसके हस्ताक्षर भी करवाए गए। कुछ दिन बाद जब उसने अपना बच्चा लौटाने के लिए कहा तो चिकित्सक दंपति ने उसे बच्चा गोद लेने की बात कही। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में चिकित्सक दंपति के निकट रिश्तेदार विशाल एवं उसकी पत्नी नेहा के कब्जे से बच्चे को बरामद करते हुए दोनों को हिरासत में ले लिया। हालांकि विशाल एवं नेहा ने बच्चा गोद लेने का दावा करते हुए कुछ साक्ष्य भी जांच अधिकारी एवं बाल कल्याण समिति की न्यायिक पीठ के समक्ष प्रस्तुत किए लेकिन बच्चा गोद लेने के लिए सही नियम एवं उचित कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप साक्ष्य मौजूद न होने के कारण आरोपी दंपति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। जबकि 9 माह के मासूम बच्चे को एमडीडी बाल भवन समिति फूसगढ़ के सुपुर्द कर दिया। उसके बाद बच्चे की स्वास्थ्य जांच के दौरान हाइड्रोसेफलेस नामक बीमारी की आशंका के चलते चिकित्सक ने उसे पीजीआई चंडीगढ़ रेफर करना पड़ा। तब से ले कर अब तक बच्चा का सूक्ष्म बाल कल्याण समिति पंचकूला में लालन-पालन हो रहा था।
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