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Karnal News: डेढ़ करोड़ के बिल का मामला है फर्जी, शिकायतकर्ता है डिफाल्टर
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करनाल। नेवल सब डिवीजन के कुंजपुरा गांव में एक परिवार का डेढ़ करोड़ रुपये बिल आने का मामला फर्जी निकला। शिकायतकर्ता ने यह राशि गलत कोट की है। निगम का डिफाल्टर है। 2014 में बिजली की चोरी के मामले में उपभोक्ता पर 14 लाख 51 हजार 279 रुपये जुर्माना लगाया गया था। राशि न भरकर कोर्ट में केस किया। बिजली निगम की अभी तक भी इस उपभोक्ता पर जुर्माना राशि बकाया है।
एसडीओ संदीप श्योकंद ने बताया कि बिजली निगम की ओर से डेढ़ करोड़ का कोई बिल जारी ही नहीं किया गया। उपभोक्ता ने उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम (सीजीआरएफ) में शिकायत देने के लिए जहां से भी प्रार्थनापत्र टाइप कराया है उसमें यह राशि एक अंक की गलती से ज्यादा दिखाई गई है। मामला 2014 का है, उपभोक्ता का लकड़ी का आरा था। वहां बिजली चोरी पकड़ी गई थी। करीब 11 साल बीत जाने पर भी यह राशि नहीं भरी गई। अब जुर्माना राशि और बिल पर सरचार्ज से यह बढ़ गई है।
एसडीओ ने बताया कि उपभोक्ता व निगम की ओर से उपभोक्ता को लगाई गई जुर्माना राशि में करीब एक करोड़ 36 लाख रुपये की राशि का अंतर है, उन्होंने खुद एप्लीकेशन में गलत राशि लिखवाई है और वह निगम पर आरोप लगा रहे हैं। यह परिवार कोर्ट से 2025 में केस हार चुका है। जुर्माना राशि भरने पर ही नया कनेक्शन जारी किया जा सकता है।
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एसडीओ संदीप श्योकंद ने बताया कि बिजली निगम की ओर से डेढ़ करोड़ का कोई बिल जारी ही नहीं किया गया। उपभोक्ता ने उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम (सीजीआरएफ) में शिकायत देने के लिए जहां से भी प्रार्थनापत्र टाइप कराया है उसमें यह राशि एक अंक की गलती से ज्यादा दिखाई गई है। मामला 2014 का है, उपभोक्ता का लकड़ी का आरा था। वहां बिजली चोरी पकड़ी गई थी। करीब 11 साल बीत जाने पर भी यह राशि नहीं भरी गई। अब जुर्माना राशि और बिल पर सरचार्ज से यह बढ़ गई है।
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एसडीओ ने बताया कि उपभोक्ता व निगम की ओर से उपभोक्ता को लगाई गई जुर्माना राशि में करीब एक करोड़ 36 लाख रुपये की राशि का अंतर है, उन्होंने खुद एप्लीकेशन में गलत राशि लिखवाई है और वह निगम पर आरोप लगा रहे हैं। यह परिवार कोर्ट से 2025 में केस हार चुका है। जुर्माना राशि भरने पर ही नया कनेक्शन जारी किया जा सकता है।
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