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अवशेष प्रबंधन करने वाले दस किसानों को किया सम्मानित

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 05 Dec 2021 03:03 AM IST
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Ten farmers who did residue management were honored
किसानों को जागरुक करते वैज्ञानिक डा. अनुज कुमार।
करनाल। भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान की ओर से शनिवार को फुरलक गांव में विश्व मृदा दिवस के उपलक्ष्य में जागरूकता कार्यक्रम किया गया। किसानों को भूमि की बेहतर तरीके से देखभाल करने के बारे में जागरूक किया गया। प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अनुज कुमार ने फसल अवशेष प्रबंधन के कारगर उपाय करने वाले तथा पराली न जलाने वाले दस किसानों को सम्मानित किया।
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वैज्ञानिक डॉ. सुभाष गिल ने कहा कि हाल के वर्षों में मृदा की सेहत में निरंतर गिरावट देखने को मिली है। जिसका मुख्य कारण मृदा में पोषक तत्वों की लगातार कमी होना है। साथ ही मृदा में जीवांश कार्बन की मात्रा काफी कम हुई है। इसी को ध्यान में रखकर भारतीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तत्वावधान में मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना प्रारंभ की गई और प्रतिवर्ष विश्व मृदा दिवस मनाने का निर्णय लिया गया।
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उन्होंने कहा कि प्राय: देखा जाता है कि किसान अपने खेतों में विभिन्न फसलों के उत्पादन में नत्रजन, फास्फोरस और पोटाश का इस्तेमाल करते हैं लेकिन सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे लोहा, तांबा, जस्ता, मैग्नीज, कोबाल्ट, मोलिब्डनम आदि की भी कमी अब कई क्षेत्रों में देखने को मिलने लगी है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड एक कारगर तरीका है जिसके माध्यम से मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी है उसका पता चलता है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड आधारित उर्वरक डालने की परंपरा अब किसानों को अपनानी होगी जो कि समय की मांग भी है।
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डॉ. राजेंद्र सिंह छोकर ने कहा कि मृदा की सेहत का संवर्धन बहुत आवश्यक है इसके लिए फसल अवशेषों को मृदा के सतह पर रखना या मृदा में मिलाना अब जरूरत बन गई है। दो धान्य फसलों के बीच एक दलहन फसल का समावेश, गोबर की खाद का प्रयोग, वर्मी कंपोस्ट व हरी खादों का प्रयोग मृदा के भौतिक तथा रासायनिक गुणों को सामान्य रखने के लिए बहुत आवश्यक है तभी मृदा की उत्पादन क्षमता बरकरार रखी जा सकती है। डा. नीरज कुमार व डा. सेंदिल ने भी किसानों का मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम में रसीन, रायपुर जाटान सहित आसपास के कई गांवों के किसान उपस्थित हुए।
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