{"_id":"bbbfe4af5ab087e1353c3c730443f079","slug":"teaching-children-in-a-room-with-four-classes","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक कमरे में पढ़ा रहे चार कक्षाओं के बच्चे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक कमरे में पढ़ा रहे चार कक्षाओं के बच्चे
असंध
Updated Thu, 12 Dec 2013 11:05 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
असंध में शोले फिल्म का वह डायलॉग तो आपने सुना ही होगा, जिसमें गब्बर बोलता है कि आदमी तीन और गोली छह बहुत नाइंसाफी है।
आपको जानकर हैरानी होगी कि प्रदेश का शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे मासूम बच्चों के साथ भी नाइंसाफी कर रहा है। कमरा एक, बच्चे सौ और सेक्शन पांच, यह तस्वीर असंध के एक प्राथमिक स्कूल की है। नगर की वार्ड संख्या दो में स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला-2 पूरी तरह से विभाग की अनदेखी का शिकार है।
पांचवीं कक्षा तक के इस विद्यालय में आसपास के गरीब परिवारों के पांच सौ के करीब बच्चे आते तो शिक्षा ग्रहण करने हैं, परंतु घर लौटते हैं बीमार होकर। स्कूल में महज छह कमरे हैं और जिसमें से एक टूटे डेस्क व अन्य सामान, दूसरा मिड-डे मील व तीसरा एजुसेट के सामान से अटा पड़ा है और बचे तीन कमरों में पांच सौ बच्चे इस तरह ठूंसे जाते हैं जैसे किसी तबेले में भैंसें।
मासूम बच्चों के बैठने के लिए बैंच तो छोड़िए, टाट पट्टी तक नहीं है। हालांकि विभाग का दावा है कि प्रत्येक स्कूल में बच्चों को बैठने के लिए बैंच मुहैया करवाए गए हैं, परंतु इस स्कूल में तो मासूमों के लिए टाट भी पर्याप्त मात्रा में नही है, जिसकी वजह से बच्चे ठंडे फर्श पर नीचे बैठने को मजबूर हैं।
विज्ञापन
अध्यापक महीपाल दूहन व सतीश जौली ने बताया कि उनके स्कूल में जगह की कमी है, जिसकी वजह से कमरों का निर्माण नहीं हो सका। पांच सौ बच्चों के लिए अगर बैंच बिछाए जाएं तो उसके लिए दर्जनों कमरों की आवश्यकता होगी, परंतु यहां क्लास बैठाने के लिए महज साढ़े तीन कमरे ही हैं।
मजबूरी में बच्चों को शिफ्ट करना पड़ता है। एक ही कमरे में तीन से चार कक्षाएं बैठाई जाती हैं, जिनको तीन से चार टीचर बारी-बारी से पढ़ाते हैं, वहीं, सामंजस्य स्थापित करने के लिए मजबूरीवश कुछ कक्षाओं को बाहर धूप में भी बैठाना पड़ता है। उन्होंने कक्षाओं में टाट पट्टी की किल्लत को कबूलते हुए कहा कि इसके लिए विभाग के अधिकारियों को सूचित किया जा चुका है, परंतु समस्या बरकरार है।
वहीं, स्कूल की छात्रा आशु, निशा, रेखा, कुसुम, रानी, बबीता व अभिभावक मेहर सिंह, अनिल, अजमेर, रमेश, ओमप्रकाश ने बताया कि टाट पट्टी नहीं होने की वजह से ठंड में उनके बच्चे फर्श पर बैठते हैं, जिससे उनके बच्चों को ठंड लगने का खतरा हमेशा बना रहता है।
खंड शिक्षा अधिकारी हरविंदर कौर ने कहा कि प्राथमिक पाठशाला में जगह की कमी है और स्थानीय नगरपालिका से साथ लगती जमीन स्कूल को देने की अपील की गई है। अन्य अव्यवस्थाओं को दूर करने से संबंधित आग्रह पत्र उच्चाधिकारियों को लिखा गया है।
विज्ञापन
आपको जानकर हैरानी होगी कि प्रदेश का शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे मासूम बच्चों के साथ भी नाइंसाफी कर रहा है। कमरा एक, बच्चे सौ और सेक्शन पांच, यह तस्वीर असंध के एक प्राथमिक स्कूल की है। नगर की वार्ड संख्या दो में स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला-2 पूरी तरह से विभाग की अनदेखी का शिकार है।
पांचवीं कक्षा तक के इस विद्यालय में आसपास के गरीब परिवारों के पांच सौ के करीब बच्चे आते तो शिक्षा ग्रहण करने हैं, परंतु घर लौटते हैं बीमार होकर। स्कूल में महज छह कमरे हैं और जिसमें से एक टूटे डेस्क व अन्य सामान, दूसरा मिड-डे मील व तीसरा एजुसेट के सामान से अटा पड़ा है और बचे तीन कमरों में पांच सौ बच्चे इस तरह ठूंसे जाते हैं जैसे किसी तबेले में भैंसें।
विज्ञापन
मासूम बच्चों के बैठने के लिए बैंच तो छोड़िए, टाट पट्टी तक नहीं है। हालांकि विभाग का दावा है कि प्रत्येक स्कूल में बच्चों को बैठने के लिए बैंच मुहैया करवाए गए हैं, परंतु इस स्कूल में तो मासूमों के लिए टाट भी पर्याप्त मात्रा में नही है, जिसकी वजह से बच्चे ठंडे फर्श पर नीचे बैठने को मजबूर हैं।
विज्ञापन
अध्यापक महीपाल दूहन व सतीश जौली ने बताया कि उनके स्कूल में जगह की कमी है, जिसकी वजह से कमरों का निर्माण नहीं हो सका। पांच सौ बच्चों के लिए अगर बैंच बिछाए जाएं तो उसके लिए दर्जनों कमरों की आवश्यकता होगी, परंतु यहां क्लास बैठाने के लिए महज साढ़े तीन कमरे ही हैं।
मजबूरी में बच्चों को शिफ्ट करना पड़ता है। एक ही कमरे में तीन से चार कक्षाएं बैठाई जाती हैं, जिनको तीन से चार टीचर बारी-बारी से पढ़ाते हैं, वहीं, सामंजस्य स्थापित करने के लिए मजबूरीवश कुछ कक्षाओं को बाहर धूप में भी बैठाना पड़ता है। उन्होंने कक्षाओं में टाट पट्टी की किल्लत को कबूलते हुए कहा कि इसके लिए विभाग के अधिकारियों को सूचित किया जा चुका है, परंतु समस्या बरकरार है।
वहीं, स्कूल की छात्रा आशु, निशा, रेखा, कुसुम, रानी, बबीता व अभिभावक मेहर सिंह, अनिल, अजमेर, रमेश, ओमप्रकाश ने बताया कि टाट पट्टी नहीं होने की वजह से ठंड में उनके बच्चे फर्श पर बैठते हैं, जिससे उनके बच्चों को ठंड लगने का खतरा हमेशा बना रहता है।
खंड शिक्षा अधिकारी हरविंदर कौर ने कहा कि प्राथमिक पाठशाला में जगह की कमी है और स्थानीय नगरपालिका से साथ लगती जमीन स्कूल को देने की अपील की गई है। अन्य अव्यवस्थाओं को दूर करने से संबंधित आग्रह पत्र उच्चाधिकारियों को लिखा गया है।