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तहसील में आनलाइन प्रक्रिया पर भारी हैं दलाल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 20 Dec 2019 01:33 AM IST
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Tahsil online work process is poor
तहसील कार्यालय में काम के लिए अब भी दलालों की खूब चल रही है। सरकार भले ही आनलाइन व अन्य सुविधाओं का हवाला दे, पर दलाल सभी प्रक्रियाओं पर भारी पड़ रहे हैं। करनाल तहसील में रोजाना कुछ चेहरे सुबह से शाम तक देखे जाते हैं। ये वे चेहरे हैं, जो लोगों से पैसे लेकर उनके कामों को करवाते हैं। सीएम की ओर से तहसील में की गई कार्रवाई के बाद भी ऐसे लोगाें को वहां पर आमतौर पर देखा गया है। इन्हीं लोगों की मेहरबानी से शहर की अवैध कालोनियों की भी खूब रजिस्ट्री हुई हैं। वहीं, किसी प्लाट को साथ लगती दूसरी कालोनी में भी दिखाकर भ्रष्टाचार किया गया है। अमर उजाला की टीम ने गुरुवार को तहसील कार्यालय और ई दिशा केंद्र का मुआयना किया तो कई ऐसे चेहरे मिले जो सुबह से शाम तक यहीं देखे गए। जब उनसे पूछा गया कि आप किस काम से आए हैं तो वे बिना कोई जवाब दिए वहां से चले गए। शहर के लोगों की मांग है कि पिछले छह महीने में हुई रजिस्ट्रियों को रिकार्ड की जांच की जाए और सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से दलालों की पहचान कर उन पर भी कार्रवाई की जाए।
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दलाल पीछे से आकर करवा जाते हैं काम
शहर निवासी अजमेर ने बताया कि वे अपने काम के लिए लाइन में लगे रहते हैं। नंबर आने के बाद ही काम होता है। कई बार तो दो व तीन दिन के इंतजार का टोकन मिलता है। लेकिन यहां के दलाल पैसे लेकर पीछे से आने वालों को दिन में ही टोकन देकर रजिस्ट्री करवा देते हैं। तहसील के कर्मी भी इनके साथ मिले हुए हैं।
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रजिस्ट्री के नाम पर मांगे जाते हैं पैसे
ईश्वर सिंह ने बताया कि तहसील में कुछ लोग साइड में लेकर काम पूछते हैं और रजिस्ट्री के काम पर 20 से 50 हजार रुपये तक की मांग करते हैं। जवाब में उन्हें सिर्फ फोटो उतरवाने के लिए आने का लालच देते हैं। तहसील में मौजूद लोगाें ने सीएम से दलालों पर भी कार्रवाई करने की मांग की है।
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सीएम ने चार को किया था सस्पेंड
सोमवार को सीएम मनोहर लाल ने तहसील परिसर का औचक निरीक्षण करते हुए लोगों की शिकायत पर सीएम के सवाल का संतोष जनक जवाब ने देने वाले तहसीलदार रविंद्र सिंह, नायब तहसीलदार हवा सिंह, आरसी राजबीर व पटवारी सलमा रानी को सस्पेंड किया था। पटवारी पर इंतकाल दर्ज न करने का एक व्यक्ति ने सीएम के सामने शिकायत देते हुए आरोप लगाया था। जबकि अन्य तीनों अधिकारियों पर रजिस्ट्री की 12 दिन बाद भी डिलीवरी न होने का आरोप लगाया था। इसका तहसीलदार मौके पर जवाब नहीं दे पाए थे।
जांच में कंप्यूटर ऑपरेटर की निकली कमी
डीसी विनय प्रताप ने तहसीलदार व अन्य अधिकारियों की सस्पेंड मामले में जांच करवाई तो सामने आया कि रजिस्ट्री 27 नवंबर को नहीं हुई थी। इसकी डिलीवरी भी साथ-साथ करवाई गई है। इसका ऑनलाइन रिकार्ड दर्ज है। इसमें क्रमांक के साथ-साथ समय का भी ब्योरा मौजूद है। जबकि शिकायतकर्ता ने सीएम को रजिस्ट्री चार दिसंबर की बताई थी। ऐसे होने पर डीसी ने कंपनी ऑपरेटर को सस्पेंड कर दिया और सभी तहसीलों के स्टाफ को इधर से उधर किया है।

सभी से अपील है कि वे किसी भी दलाल के चक्कर में न पड़े। कोई भी दिक्कत हो तो सीधे आकर मिल सकते हैं। नियमानुसार सभी का काम किया जाएगा और सरकारी काम के लिए किसी को भी रिश्वत देने की जरूरत नहीं है। इसकी भी जांच कराई जाएगी कि अगर कोई सुबह से शाम तक खिड़कियों पर खड़े रहते हैं। -राज बख्स अरोड़ा, तहसीलदार करनाल।
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