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ऑनलाइन तकनीक के खतरे जानेंगे विद्यार्थी
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। सीबीएसई ने बच्चों को डिजिटल नागरिक बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। बोर्ड छठीं से आठवीं तक की कक्षा के बच्चों को ऑनलाइन टेक्नोलॉजी के खतरों से बचाने के लिए डिजिटल नागरिकता पर स्किल मॉड्यूल शुरू करने जा रहा है। इसके पाठ्यक्रम में डिजिटल शिष्टाचार, साइबर सुरक्षा, साइबर बुलिंग, इंटरनेट के उपयोग को शामिल किया गया है।
पाठ्यक्रम को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि सभी विषयों के शिक्षक आसानी से समझ सकें और छात्रों को जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनने के लिए प्रशिक्षित कर सकें। स्कूलों के प्रधानाचार्यों और शिक्षकों को समझाने के लिए 14 जून को ऑनलाइन ओरियंटेशन सत्र आयोजित किया जाएगा।
सीबीएसई के विशेषज्ञों का कहना है कि आज की दुनिया में छात्र कम उम्र में ही ऑनलाइन तकनीक के संपर्क में आ रहे हैं। कोरोना के कारण दो साल तक ऑनलाइन पढ़ाई हुई है, इसलिए डिजिटल दुनिया समय की जरूरत है। इसके लिए बोर्ड ने शिक्षकों से फीडबैक भी लिया जिसमें पाया गया कि ऑनलाइन दुनिया सुरक्षित रूप से तलाशने में छात्रों को मदद की जरुरत होती है।
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शिक्षा विशेषज्ञाें के अनुसार युवाओं को जिम्मेदार और सुरक्षित डिजिटल नागरिक बनाने के लिए सशक्त करने की आवश्यकता है। जिससे वे सुरक्षित तरीके से प्रौद्योगिकी का उपयोग करना सीख सकें।
विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए सीबीएसई नई-नई तकनीकों का प्रयोग करता रहा है। अब सीबीएसई बोर्ड छठीं से आठवीं तक की कक्षा के बच्चों को ऑनलाइन टेक्नोलॉजी के खतरों से बचाने के लिए डिजिटल नागरिकता पर स्किल मॉड्यूल शुरू करने जा रहा है ताकि विद्यार्थी सुरक्षित तरीके से प्रोद्योगिकी का प्रयोग करना सीख सकें। - डॉ. राजन लांबा, अध्यक्ष, सहोदय स्कूल कांप्लेक्स
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करनाल। सीबीएसई ने बच्चों को डिजिटल नागरिक बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। बोर्ड छठीं से आठवीं तक की कक्षा के बच्चों को ऑनलाइन टेक्नोलॉजी के खतरों से बचाने के लिए डिजिटल नागरिकता पर स्किल मॉड्यूल शुरू करने जा रहा है। इसके पाठ्यक्रम में डिजिटल शिष्टाचार, साइबर सुरक्षा, साइबर बुलिंग, इंटरनेट के उपयोग को शामिल किया गया है।
पाठ्यक्रम को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि सभी विषयों के शिक्षक आसानी से समझ सकें और छात्रों को जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनने के लिए प्रशिक्षित कर सकें। स्कूलों के प्रधानाचार्यों और शिक्षकों को समझाने के लिए 14 जून को ऑनलाइन ओरियंटेशन सत्र आयोजित किया जाएगा।
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सीबीएसई के विशेषज्ञों का कहना है कि आज की दुनिया में छात्र कम उम्र में ही ऑनलाइन तकनीक के संपर्क में आ रहे हैं। कोरोना के कारण दो साल तक ऑनलाइन पढ़ाई हुई है, इसलिए डिजिटल दुनिया समय की जरूरत है। इसके लिए बोर्ड ने शिक्षकों से फीडबैक भी लिया जिसमें पाया गया कि ऑनलाइन दुनिया सुरक्षित रूप से तलाशने में छात्रों को मदद की जरुरत होती है।
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शिक्षा विशेषज्ञाें के अनुसार युवाओं को जिम्मेदार और सुरक्षित डिजिटल नागरिक बनाने के लिए सशक्त करने की आवश्यकता है। जिससे वे सुरक्षित तरीके से प्रौद्योगिकी का उपयोग करना सीख सकें।
विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए सीबीएसई नई-नई तकनीकों का प्रयोग करता रहा है। अब सीबीएसई बोर्ड छठीं से आठवीं तक की कक्षा के बच्चों को ऑनलाइन टेक्नोलॉजी के खतरों से बचाने के लिए डिजिटल नागरिकता पर स्किल मॉड्यूल शुरू करने जा रहा है ताकि विद्यार्थी सुरक्षित तरीके से प्रोद्योगिकी का प्रयोग करना सीख सकें। - डॉ. राजन लांबा, अध्यक्ष, सहोदय स्कूल कांप्लेक्स