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कोरोना से शिक्षा पर संकट, कक्षा पहली की आठ हजार घटी छात्र संख्या
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गगन तलवार
करनाल। कोरोना ने शिक्षा व्यवस्था पर भी बहुत बड़ी चोट पहुंचाई है। करीब डेढ़ साल से स्कूल बंद होने के कारण पढ़ाई में बच्चों का आधार ही नहीं बन पा रहा है, खासकर नर्सरी से केजी और प्राइमरी तक के बच्चों में। क्योंकि आनलाइन पढ़ाई में बच्चे उतना नहीं सीख पा रहे, जितना स्कूल या शिक्षक के साथ रहकर सीखते थे। इस कारण जिले में पहली कक्षा की छात्र संख्या में पिछले दस साल के मुकाबले करीब आठ हजार तक की कमी आई है। इस बार 485 राजकीय स्कूलों में पहली कक्षा में केवल 3126 विद्यार्थियों का ही दाखिला हुआ है। जबकि पिछले 10 साल के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो हर साल 11 हजार तक दाखिले केवल पहली कक्षा में ही हुए।
शिक्षा विभाग के सर्वे में इसके पीछे दो मुख्य वजह सामने आई हैं, पहली यह कि अभिभावक कोरोना की तीसरी लहर के अंदेशे के कारण बच्चों को घर से बाहर नहीं भेजना चाहते वहीं दूसरा कारण नर्सरी से केजी तक के ऐसे बच्चे जिन्होंने पिछले दो साल में ही प्ले स्कूल में दाखिला लिया था, कोरोना के कारण उनकी पढ़ाई ऑनलाइन हुई। ऐसे में अभी तक उन्हें पेंसिल पकड़ने या क्लास रूम के डेकोरम को समझने का मौका तक नहीं मिला। अभिभावक ऐसे कमजोर बेस वाले बच्चे को भी स्कूल नहीं भेजना चाह रहे। इधर शिक्षा विभाग ने बच्चों का दाखिला कराने की योजना बनाई है। इसके लिए शिक्षक घर-घर जाकर अभिभावकों को भी प्रेरित करेंगे।
प्ले एवं निजी स्कूल नहीं देते एसएलसी तो अटक रहे दाखिले
पहली कक्षा में घटती छात्र संख्या में एक वजह यह भी सामने आई है कि निजी और प्ले स्कूल छोटे बच्चों के एसएलसी नहीं दे रहे। राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राज्य संरक्षक एवं कुटेल स्कूल के शिक्षक दीपक गोस्वामी का कहना है कि ऐसे बच्चों का एमआईएस पर पंजीकरण है। इसलिए दाखिले के लिए एसएलसी चाहिए। माइग्रेंट बच्चों के पास दस्तावेज भी पूरे नहीं हैं। उनके कुटेल स्कूल आधे से ज्यादा बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र और एसएलसी न मिलने के कारण दाखिला नहीं हो पा रहा।
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टोली देगी हर घर दस्तक, घर पर पढ़ाने का भी विचार
जिले के 485 स्कूलों में पहली कक्षा की छात्र संख्या को पूरा करने के लिए इन स्कूलों के शिक्षकों की विभाग ने विशेष ड्यूटी लगाई है। ये शिक्षक शहर और गांव के हर घर तक दस्तक देंगे। अभिभावकों को प्रेरित कर बच्चों के दाखिले कराएंगे। हमारा प्रयास रहेगा कि ऐसे छोटे बच्चों को शिक्षक घर जाकर पढ़ाए ताकि इनका आधार मजबूत हो।
-रोहताश वर्मा, डीईईओ करनाल
किस साल इतने हुए पहली कक्षा में दाखिले-
वर्ष दाखिले
2021 3126
2020 11046
2019 11500
2018 11799
2017 11726
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करनाल। कोरोना ने शिक्षा व्यवस्था पर भी बहुत बड़ी चोट पहुंचाई है। करीब डेढ़ साल से स्कूल बंद होने के कारण पढ़ाई में बच्चों का आधार ही नहीं बन पा रहा है, खासकर नर्सरी से केजी और प्राइमरी तक के बच्चों में। क्योंकि आनलाइन पढ़ाई में बच्चे उतना नहीं सीख पा रहे, जितना स्कूल या शिक्षक के साथ रहकर सीखते थे। इस कारण जिले में पहली कक्षा की छात्र संख्या में पिछले दस साल के मुकाबले करीब आठ हजार तक की कमी आई है। इस बार 485 राजकीय स्कूलों में पहली कक्षा में केवल 3126 विद्यार्थियों का ही दाखिला हुआ है। जबकि पिछले 10 साल के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो हर साल 11 हजार तक दाखिले केवल पहली कक्षा में ही हुए।
शिक्षा विभाग के सर्वे में इसके पीछे दो मुख्य वजह सामने आई हैं, पहली यह कि अभिभावक कोरोना की तीसरी लहर के अंदेशे के कारण बच्चों को घर से बाहर नहीं भेजना चाहते वहीं दूसरा कारण नर्सरी से केजी तक के ऐसे बच्चे जिन्होंने पिछले दो साल में ही प्ले स्कूल में दाखिला लिया था, कोरोना के कारण उनकी पढ़ाई ऑनलाइन हुई। ऐसे में अभी तक उन्हें पेंसिल पकड़ने या क्लास रूम के डेकोरम को समझने का मौका तक नहीं मिला। अभिभावक ऐसे कमजोर बेस वाले बच्चे को भी स्कूल नहीं भेजना चाह रहे। इधर शिक्षा विभाग ने बच्चों का दाखिला कराने की योजना बनाई है। इसके लिए शिक्षक घर-घर जाकर अभिभावकों को भी प्रेरित करेंगे।
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प्ले एवं निजी स्कूल नहीं देते एसएलसी तो अटक रहे दाखिले
पहली कक्षा में घटती छात्र संख्या में एक वजह यह भी सामने आई है कि निजी और प्ले स्कूल छोटे बच्चों के एसएलसी नहीं दे रहे। राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राज्य संरक्षक एवं कुटेल स्कूल के शिक्षक दीपक गोस्वामी का कहना है कि ऐसे बच्चों का एमआईएस पर पंजीकरण है। इसलिए दाखिले के लिए एसएलसी चाहिए। माइग्रेंट बच्चों के पास दस्तावेज भी पूरे नहीं हैं। उनके कुटेल स्कूल आधे से ज्यादा बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र और एसएलसी न मिलने के कारण दाखिला नहीं हो पा रहा।
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टोली देगी हर घर दस्तक, घर पर पढ़ाने का भी विचार
जिले के 485 स्कूलों में पहली कक्षा की छात्र संख्या को पूरा करने के लिए इन स्कूलों के शिक्षकों की विभाग ने विशेष ड्यूटी लगाई है। ये शिक्षक शहर और गांव के हर घर तक दस्तक देंगे। अभिभावकों को प्रेरित कर बच्चों के दाखिले कराएंगे। हमारा प्रयास रहेगा कि ऐसे छोटे बच्चों को शिक्षक घर जाकर पढ़ाए ताकि इनका आधार मजबूत हो।
-रोहताश वर्मा, डीईईओ करनाल
किस साल इतने हुए पहली कक्षा में दाखिले-
वर्ष दाखिले
2021 3126
2020 11046
2019 11500
2018 11799
2017 11726