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Karnal News: पानी छिड़क गेहूं को राशन डिपो पर भेजा
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- घीड़ स्टेट वेयर हाउस के गोदाम से आया था गेहूं, डिपो धारक बोला नहीं हो रही कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। खराजपुर गांव के राशन डिपो पर विभाग की ओर से भीगा हुआ गेहूं भेज दिया गया, जो कि खराब हालत में है। डिपो होल्डर ने इसकी शिकायत तुरंत अधिकारियों को कर दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। खराजपुर डिपो होल्डर रजनी के पति ने बताया कि 27 जनवरी को उसके डिपो पर गेहूं आया था। जब उसने इसे भीगा देखा तो इसकी जानकारी अधिकारी को दी। अधिकारी ने उसे निरीक्षक के पास भेज दिया।
निरीक्षक ने जांच की तो गेहूं गीला पाया। जिसमें नमी की मात्रा 18 के करीब है। इसके बाद पता चला कि यह गेहूं घीड़ गांव में स्टेट वेयर हाउस के गोदाम से आया है। जब वह गोदाम पर पहुंचा तो वहां गेहूं के कई चट्टे भीगे थे। वहां पर मौजूद अधिकारी ने पहले तो कहा कि उसने स्प्रे किया था, लेकिन बाद में उसने माना कि गेहूं के कट्टों पर पानी डाला गया था। इसके साथ ही एफसीआई के अधिकारी ने भी मिलीभगत से बिना गेहूं की जांच किए उसे राशन डिपो पर पहुंचा दिया। इस मामले की जानकारी उसने सभी अधिकारियों को दी, लेकिन किसी ने कार्रवाई नहीं की।
नहीं बदले भीगे गेहूं
विकास ने बताया कि अधिकारियों ने उसे आश्वासन दिया था कि जो गेहूं भीगा है। वह उसे बदलवा देंगे, लेकिन गेहूं नहीं बदला गया। अब वह लोगों को कैसे राशन बांटें। करीब 235 क्विंटल गेहूं है जो भीगा हुआ है। अधिकारी इस मामले में कार्रवाई करने के बजाए आरोपी को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।
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गेहूं की चोरी कर छिड़क देते हैं पानी
गेहूं पर पानी छिड़कने का यह पहला मामला नहीं है। लंबे समय से यह खेल चल रहा है। जिस गोदाम में गेहूं रखा जाता है, उसकी निगरानी करने वाले अधिकारी पहले परखी मारकर गेहूं की चोरी करते हैं। फिर जब उस गोदाम के गेहूं को डिपो पर भेजना होता है तो एक से दो दिन पहले गेहूं पर पानी का छिड़काव कर देते हैं ताकि जो गेहूं कट्टे से निकाला है उसका वजन पानी के कारण पूरा हो जाए। हालांकि एफसीआई के अधिकारी गेहूं के सैंपल लेकर जांच करते हैं, लेकिन वह भी इन भ्रष्ट अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर बिना सैंपल लिए राशन को डिपो पर भेज देते हैं। यही कारण है कि डिपो पर गेहूं सड़ा गला मिलता है।
खराजपुर स्थित राशन डिपो पर भीगा हुआ गेहूं आने की जानकारी मिली थी। संबंधित एजेंसी को गेहूं बदलवाने के लिए कहा गया था। यदि गेहूं नहीं बदला है तो उसे जल्द बदलवा दिया जाएगा।
अनील कुमार, डीएफएससी करनाल
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। खराजपुर गांव के राशन डिपो पर विभाग की ओर से भीगा हुआ गेहूं भेज दिया गया, जो कि खराब हालत में है। डिपो होल्डर ने इसकी शिकायत तुरंत अधिकारियों को कर दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। खराजपुर डिपो होल्डर रजनी के पति ने बताया कि 27 जनवरी को उसके डिपो पर गेहूं आया था। जब उसने इसे भीगा देखा तो इसकी जानकारी अधिकारी को दी। अधिकारी ने उसे निरीक्षक के पास भेज दिया।
निरीक्षक ने जांच की तो गेहूं गीला पाया। जिसमें नमी की मात्रा 18 के करीब है। इसके बाद पता चला कि यह गेहूं घीड़ गांव में स्टेट वेयर हाउस के गोदाम से आया है। जब वह गोदाम पर पहुंचा तो वहां गेहूं के कई चट्टे भीगे थे। वहां पर मौजूद अधिकारी ने पहले तो कहा कि उसने स्प्रे किया था, लेकिन बाद में उसने माना कि गेहूं के कट्टों पर पानी डाला गया था। इसके साथ ही एफसीआई के अधिकारी ने भी मिलीभगत से बिना गेहूं की जांच किए उसे राशन डिपो पर पहुंचा दिया। इस मामले की जानकारी उसने सभी अधिकारियों को दी, लेकिन किसी ने कार्रवाई नहीं की।
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नहीं बदले भीगे गेहूं
विकास ने बताया कि अधिकारियों ने उसे आश्वासन दिया था कि जो गेहूं भीगा है। वह उसे बदलवा देंगे, लेकिन गेहूं नहीं बदला गया। अब वह लोगों को कैसे राशन बांटें। करीब 235 क्विंटल गेहूं है जो भीगा हुआ है। अधिकारी इस मामले में कार्रवाई करने के बजाए आरोपी को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।
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गेहूं की चोरी कर छिड़क देते हैं पानी
गेहूं पर पानी छिड़कने का यह पहला मामला नहीं है। लंबे समय से यह खेल चल रहा है। जिस गोदाम में गेहूं रखा जाता है, उसकी निगरानी करने वाले अधिकारी पहले परखी मारकर गेहूं की चोरी करते हैं। फिर जब उस गोदाम के गेहूं को डिपो पर भेजना होता है तो एक से दो दिन पहले गेहूं पर पानी का छिड़काव कर देते हैं ताकि जो गेहूं कट्टे से निकाला है उसका वजन पानी के कारण पूरा हो जाए। हालांकि एफसीआई के अधिकारी गेहूं के सैंपल लेकर जांच करते हैं, लेकिन वह भी इन भ्रष्ट अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर बिना सैंपल लिए राशन को डिपो पर भेज देते हैं। यही कारण है कि डिपो पर गेहूं सड़ा गला मिलता है।
खराजपुर स्थित राशन डिपो पर भीगा हुआ गेहूं आने की जानकारी मिली थी। संबंधित एजेंसी को गेहूं बदलवाने के लिए कहा गया था। यदि गेहूं नहीं बदला है तो उसे जल्द बदलवा दिया जाएगा।
अनील कुमार, डीएफएससी करनाल