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Karnal News: विशेषज्ञों की कमी से तिल्ली के ऑपरेशन बंद

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 23 Feb 2026 12:42 AM IST
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Spleen operations stopped due to lack of specialists
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। मेडिकल कॉलेज और सिविल अस्पताल में काॅर्डियोलॉजिस्ट व हेमेटोलॉजिस्ट की अनुपस्थिति के कारण तिल्ली (स्प्लीन) के ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। मामलों को पीजीआई चंडीगढ़ या रोहतक रेफर किया जा रहा है।
थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों के लिए तिल्ली का ऑपरेशन जरूरी होता है। मेडिकल कॉलेज में छह सर्जन और पांच शिशु रोग विशेषज्ञ हैं। सिविल अस्पताल में दो सर्जन और एक शिशु रोग विशेषज्ञ कार्यरत हैं। काॅर्डियोलॉजिस्ट और हेमेटोलॉजिस्ट की नियुक्ति नहीं होने से ऑपरेशन टाले या रेफर किए जा रहे हैं। जिले में 120 से अधिक थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे पंजीकृत हैं। इन बच्चों को नियमित रक्त चढ़ाना पड़ता है। बार-बार ट्रांसफ्यूजन के कारण शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ती है, जिससे तिल्ली का आकार बढ़ जाता है। बड़ी तिल्ली खून को तेजी से नष्ट करती है और 18-20 दिन में लगने वाला रक्त 12-15 दिन में ही चढ़ाना पड़ता है। ऐसे मामलों में सर्जरी आवश्यक हो जाती है।
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अभिभावकों का कहना है कि कई-कई बार अस्पताल के चक्कर लगाने के बाद भी केवल ऑपरेशन की तारीख या रेफरल ही मिलता है। बाहर इलाज कराने में लाखों रुपये का खर्च आता है जो सामान्य परिवारों के लिए संभव नहीं।
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मॉड्यूलर ओटी और आईसीयू की कमी

सिविल अस्पताल में मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर की सुविधा उपलब्ध नहीं है। जटिल सर्जरी के लिए जरूरी आधुनिक उपकरण और विशेष निगरानी व्यवस्था का अभाव है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना कार्डियोलॉजिस्ट और हेमेटोलॉजिस्ट की मौजूदगी के ऐसे ऑपरेशन जोखिम भरे हो सकते हैं। इसी कारण मरीजों को पीजीआई या अन्य बड़े संस्थानों में रेफर किया जा रहा है।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि संबंधित विशेषज्ञों की नियुक्ति के लिए उच्च स्तर पर पत्राचार किया गया है। थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के मामलों में विशेष सावधानी जरूरी होती है, क्योंकि ऑपरेशन के दौरान असामान्य ब्लीडिंग और हृदय संबंधी जटिलताओं का खतरा रहता है।
सीएमओ डॉ. पूनम चौधरी ने बताया कि जिन मरीजों को जटिल सर्जरी की जरूरत होती है, उन्हें बेहतर सुविधा वाले केंद्रों पर भेजा जाता है ताकि किसी प्रकार का जोखिम न हो।


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तिल्ली का कार्य

तिल्ली पेट के ऊपरी बाएं हिस्से में स्थित होती है। यह रक्त को छानने और संक्रमण से लड़ने में मदद करती है। कुछ बीमारियों में इसका आकार बढ़ जाता है और सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है।
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