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Karnal News: मसालों ने बरखा की जिंदगी में घोली मिठास
Sat, 04 Apr 2026 12:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sat, 04 Apr 2026 12:15 AM IST
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बरखा
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। सीमित शिक्षा और संसाधनों के बावजूद अगर हौसला मजबूत हो तो सफलता की राह खुद बन जाती है। इसका उदाहरण हैं बरखा। वह 12वीं पास हैं। घर की चहारदीवारी से निकलकर प्रशिक्षण लिया और मसाले तैयार करने का लघु उद्योग शुरू किया। मसालों ने उनके जीवन में मिठास घोल दी। अब वह आर्थिक रूप से मजबूत हैं। हर माह करीब 15 हजार रुपये की आमदनी कर रही हैं।
उन्होंने बताया कि वह ऐसे परिवार से हैं जहां पर महिलाओं को केवल घर तक ही सीमित कर दिया जाता है। कुछ करने की चाह थी तो घर से कदम निकाले। वर्ष 2014 में चांदनी स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। संस्था में कोषाध्यक्ष बनीं। प्रशिक्षण लिया। अन्य महिलाओं को प्रशिक्षण दिया। उन्हें लेनदेन करना सिखाया। वर्ष 2017 में मसाले बनाने का लघु उद्योग स्थापित किया।
बरखा ने बताया कि समूह की महिलाओं के साथ मिलकर गांव में छोटे स्तर पर शुरू किए कारखाने में आठ से दस प्रकार के मसाले और शरबत, बिस्कुट, मुरब्बा और कई प्रकार की सॉस बनाई जाती है। ज्यादा पूंजी थी और न ही व्यापार का कोई अनुभव। शुरुआत में पड़ोस और जान-पहचान वालों को मसाले बेचती थी। धीरे-धीरे उनके मसालों की गुणवत्ता और स्वाद की चर्चा बढ़ने लगी। मांग भी बढ़ती गई।
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उन्होंने बताया कि एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) के तहत भी प्रशिक्षण लिया। इसमें उनको व्यापार शुरू करने, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग की जानकारी दी गई थी। इस प्रशिक्षण के बाद उन्होंने अपने मसालों को ब्रांड के रूप में तैयार किया। पैकिंग और लेबलिंग में सुधार कर उत्पाद को बाजार के अनुरूप बनाया।
25 महिलाओं को दे रहीं रोजगार
बरखा ने अपने कारखाने को एमएसएमई में पंजीकृत करवाया है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में केवल 70 हजार रुपये के ऋण से शुरुआत की थी। अब 25 महिलाओं को रोजगार देती हैं। सभी खर्चे निकालने के बाद हर माह करीब 15 हजार रुपये की कमाई कर रही हैं। परिवार की आर्थिक मदद भी कर पा रही हैं। बोलीं कि भविष्य में अपने कारोबार को और बड़ा करेंगी।
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करनाल। सीमित शिक्षा और संसाधनों के बावजूद अगर हौसला मजबूत हो तो सफलता की राह खुद बन जाती है। इसका उदाहरण हैं बरखा। वह 12वीं पास हैं। घर की चहारदीवारी से निकलकर प्रशिक्षण लिया और मसाले तैयार करने का लघु उद्योग शुरू किया। मसालों ने उनके जीवन में मिठास घोल दी। अब वह आर्थिक रूप से मजबूत हैं। हर माह करीब 15 हजार रुपये की आमदनी कर रही हैं।
उन्होंने बताया कि वह ऐसे परिवार से हैं जहां पर महिलाओं को केवल घर तक ही सीमित कर दिया जाता है। कुछ करने की चाह थी तो घर से कदम निकाले। वर्ष 2014 में चांदनी स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। संस्था में कोषाध्यक्ष बनीं। प्रशिक्षण लिया। अन्य महिलाओं को प्रशिक्षण दिया। उन्हें लेनदेन करना सिखाया। वर्ष 2017 में मसाले बनाने का लघु उद्योग स्थापित किया।
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बरखा ने बताया कि समूह की महिलाओं के साथ मिलकर गांव में छोटे स्तर पर शुरू किए कारखाने में आठ से दस प्रकार के मसाले और शरबत, बिस्कुट, मुरब्बा और कई प्रकार की सॉस बनाई जाती है। ज्यादा पूंजी थी और न ही व्यापार का कोई अनुभव। शुरुआत में पड़ोस और जान-पहचान वालों को मसाले बेचती थी। धीरे-धीरे उनके मसालों की गुणवत्ता और स्वाद की चर्चा बढ़ने लगी। मांग भी बढ़ती गई।
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उन्होंने बताया कि एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) के तहत भी प्रशिक्षण लिया। इसमें उनको व्यापार शुरू करने, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग की जानकारी दी गई थी। इस प्रशिक्षण के बाद उन्होंने अपने मसालों को ब्रांड के रूप में तैयार किया। पैकिंग और लेबलिंग में सुधार कर उत्पाद को बाजार के अनुरूप बनाया।
25 महिलाओं को दे रहीं रोजगार
बरखा ने अपने कारखाने को एमएसएमई में पंजीकृत करवाया है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में केवल 70 हजार रुपये के ऋण से शुरुआत की थी। अब 25 महिलाओं को रोजगार देती हैं। सभी खर्चे निकालने के बाद हर माह करीब 15 हजार रुपये की कमाई कर रही हैं। परिवार की आर्थिक मदद भी कर पा रही हैं। बोलीं कि भविष्य में अपने कारोबार को और बड़ा करेंगी।