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Karnal News: अंतरिक्ष परी के पिता का निधन, बेटी के नाम पर बने मेडिकल कॉलेज में किया गया देहदान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 04 Oct 2023 02:39 AM IST
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Space angel's father passes away, body donated to medical college named after daughter
फोटो-1001
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अंतरिक्ष परी के पिता का निधन, बेटी के नाम पर बने मेडिकल कॉलेज में किया गया देहदान
94 साल की उम्र में ली अंतिम सांस, निर्मल कुटिया में किया गया अरदास व पाठ
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। दुनिया में करनाल का नाम रोशन करने वाली अंतरिक्ष परी कल्पना चावला के पिता बनारसी लाल चावला का सोमवार की रात करीब ढाई बजे शहर के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह 94 वर्ष के साथ थे। उनका शव पहले उनके आवास सीएचडी सिटी ले जाया गया, जहां मंगलवार की सुबह उनके पार्थिव शरीर को निर्मल कुटिया लाया गया, जहां संत बाबा राम सिंह ने अरदास व पाठ किया। यहां उनके वसीयत के मुताबिक कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज ले जाकर उनका देहदान किया गया।

बनारसी लाल चावला का जन्म जुलाई 1929 में शेखूपुरा, किले पिंड (अब पाकिस्तान में) लब्भा मल चावला के घर हुआ था। पाकिस्तान के बंटवारे के दौरान उनका परिवार करनाल के मॉडल टाउन में आकर बस गया। यहां पूरा परिवार उद्योगों से जुड़ा और बड़ा औद्योगिक घराना बन गया। बनारसी लाल के बड़े भाई अमरीक देव जी ने संतमत अपनाया और निर्मल कुटिया से जुड़ गए। करनाल में ही बनारसी लाल के चार संतानें हुईं, जिसमें सबसे बड़ी बेटी सुनीता चावला, फिर बेटा संजय चावला, फिर बेटी दीपा चावला और सबसे छोटी कल्पना चावला थी। कल्पना चावला अंतरिक्ष के अकल्पनीय संसार में खो चुकी है, जबकि दो अन्य बेटियां दिल्ली में तो बेटा सीएचडी सिटी करनाल में रहता है। बनारसी लाल चावला के करीबी प्रितपाल सिंह पन्नू, नरेंद्र सिंह और निर्मल धाम के प्रबंधक राजेश गुप्ता ने बताया कि पिछले 10 दिनों से उनके स्वास्थ्य में गिरावट महसूस हो रही थी। इसके बाद उन्हें शहर के एक निजी चिकित्सालय में भर्ती कराया था, वहां के बाद तीन दिन अमृतधारा अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां सोमवार-मंगलवार की रात 2.30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से शहर में शोक की लहर दौड़ गई। परिजन व रिश्तेदार अंतिम दर्शन के लिए पहुंचने लगे। विदित हो कि 2014 में उन्होंने वसीयत की थी कि उनकी मृत्यु के बाद उनके शरीर को कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज को दान दिया जाए, ताकि बच्चों के लिए प्रेरणा बन सके, उनके शरीर से बच्चे सीख सकें। उनकी इच्छा के अनुसार, उनके शव को कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज के शरीर रचना विभाग को विधिवत तरीके से दान कर दिया गया।
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