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स्मार्ट सिटी की दौड़ में आगे लाने का प्रयास
ब्यूरो/अमर उजाला/करनाल
Updated Sun, 25 Dec 2016 12:14 AM IST
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स्मार्ट सिटी की प्रतियोगिता में दो बार पिछड़ चुका करनाल इस बार दौड़ में तेजी से दौड़ेगा। स्मार्ट सिटी प्रपोजल के लिए काफी समय से कंसलटेंट को ढूंढ रहे नगर निगम की तलाश अब पूरी हो गई है। शनिवार को निगम ने एक कंसलटेंट का चयन कर लिया है। इस मसले को लेकर शुक्रवार को दिल्ली स्थित हरियाणा भवन में दिनभर चली उच्च अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक में फैसला लिया गया है। बैठक में राष्ट्रीय स्तर की एजेंसी क्रिसिल के नाम पर मुहर लगा दी गई है।
बता दें कि निगम को यह प्रस्ताव 31 मार्च, 2017 तक शहरी विकास मंत्रालय को जमा कराना है। इससे पहले, नगर निगम करनाल की ओर से दो बार स्मार्ट सिटी का प्रस्ताव तैयार करके भेजा था, लेकिन दोनों बार करनाल इस प्रतियोगिता में पिछड़ गया। हालांकि, निगम की ओर से इन दोनों प्रस्तावों पर लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन अधिकारियों के तमाम प्रयासों के बावजूद करनाल स्मार्ट सिटी की सूची में नहीं आ सका। अब तीसरी बार करनाल इस प्रतियोगिता के लिए तैयार है। नगर निगम करनाल के आयुक्त डॉ. आदित्य दहिया ने बताया कि इसके लिए निगम काफी दिनों से नेशनल स्तरीय कंसलटेंट एजेंसी की तलाश में था। शुक्रवार को इस मामले को लेकर दिल्ली के हरियाणा भवन में अधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें क्रिसिल कंपनी को कंसलटेंट चुना गया है। उन्होंने बताया कि कंसलटेंट की नियुक्ति के लिए सरकार की तरफ से टेंडर आमंत्रित किए गए थे, क्योंकि सरकारी स्तर पर ही अच्छे व ऐसे कंसलटेंट हैं, जिन्होंने पहले स्मार्ट सिटी के लिए कार्य किया है। कमेटी में शहरी स्थानीय निकाय हरियाणा के प्रधान सचिव आनंद मोहन शरण, निदेशक शेखर विद्यार्थी, उपायुक्त करनाल मनदीप सिंह बराड़, नगर निगम आयुक्त डॉ. आदित्य दहिया, लोक निर्माण विभाग (भवन एवं सड़कें) के अधीक्षण अभियंता, हुडा के अधीक्षण अभियंता, जिला नगर योजनाकार, निगम के अधीक्षण अभियंता व कार्यकारी अभियंता, शहरी निकाय विभाग मुख्यालय से आए सहायक नगर योजनाकार अथवा इनके प्रतिनिधि शामिल थे। कमेटी की बैठक में प्रत्येक बिंदुओ पर विस्तृत चर्चा व अध्ययन किया गया। इसमें 80 मार्क्स क्वालिफिकेशन के थे तथा 20 नंबर फाइनेशियल प्रपोजल यानी कितने खर्चे पर कार्य करेंगे, के लिए थे। सारे नियमों व कैलकुलेशन के बाद क्रिसिल एजेंसी को सही मानकर उसके चुनाव की घोषणा की गई।
अब कंपनी करेगी पूरे करनाल पर स्टडी
नवनियुक्त कंसलटेंट जनवरी, 2017 से ही अपना कार्य करना शुरू कर देगा। स्मार्ट सिटी का मतलब ऐसे शहरों से है, जहां पानी और बिजली की पर्याप्त व्यवस्था हो। साथ ही साफ-सफाई और कचरा प्रबंधन, परिवहन के बेहतरीन साधन, तकनीकी कनेक्टिविटी, ई-गवर्नेंस, नागरिकों की सुरक्षा तथा शासन में नागरिकों की भागीदारी जैसी कई सुविधाएं मौजूद हों। आयुक्त ने बताया कि नए कंसलटेंट सबसे पहले शहर की पूरी स्टडी करेंगे। यहां के नक्शे देखेंगे और सबकुछ देखने के बाद उन कमी-बेशी को देखा जाएगा, जिनसे करनाल पिछले दौर में स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल होने से रह गया था।
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कंसलटेंट को शहरवासी देंगे सुझाव
आयुक्त ने बताया कि आगामी एक जनवरी से कंसलटेंट के कार्य की शुरुआत होते ही यहां के लोग स्मार्ट सिटी को लेकर नगर निगम में अपने-अपने सुझाव भी देंगे। निगम के अधीक्षण अभियंता डीआर भास्कर इस कार्य के नोडल अधिकारी रहेंगे, जो पार्षदों व लोगों से अधिक से अधिक चर्चा करके एक ड्राफ्ट तैयार करेंगे। कंसलटेंट एजेंसी के कार्य में 3 विशेषज्ञ भी साथ रहेंगे, इनमें एक प्राइवेट अर्बन प्लानर, म्यूनिसिपल फाइनेंसर एक्सपर्ट तथा ई-गवर्नेंस एक्सपर्ट (आईटी) शामिल होंगे। इनके अलावा देशभर से 10 विशेषज्ञ इनको स्मार्ट सिटी के बारे में करनाल आकर समय-समय पर अपने उपयोगी विचार देते रहेंगे।
अप्रैल में होगी परीक्षा
जैसे ही प्रारूप तैयार होगा, सरकार के स्तर पर इसका अध्ययन किया जाएगा और इसकी अंतिम अनुमति मुख्य सचिव स्तर पर दी जाएगी। इसके बाद, अप्रैल महीने में स्मार्ट सिटी की प्रतियोगिताएं दोबारा करवाई जाएंगी और मई-2017 में करनाल के स्मार्ट सिटी हो जाने की घोषणा हो जाएगी। डॉ. आदित्य दहिया ने बताया कि स्मार्ट सिटी के लिए जो-जो खास रहेगा, उसमें पिछली बार की कमी-बेशी का टीम विशेषज्ञ अलग से अध्ययन करेंगे। स्मार्ट सिटी के विकास के लिए इस बार कितना खर्चा आएगा, उसके लिए नगर निगम संसाधन कहां से जुटाएगा। इसके अतिरिक्त शहर के इतिहास को देखकर उसी के अनुरूप ही नए पार्क आदि बनाए जाएंगे। देश के हो चुके टॉप 20 स्मार्ट सिटी को देखकर उनकी अच्छी बातों का अनुकरण किया जाएगा।
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बता दें कि निगम को यह प्रस्ताव 31 मार्च, 2017 तक शहरी विकास मंत्रालय को जमा कराना है। इससे पहले, नगर निगम करनाल की ओर से दो बार स्मार्ट सिटी का प्रस्ताव तैयार करके भेजा था, लेकिन दोनों बार करनाल इस प्रतियोगिता में पिछड़ गया। हालांकि, निगम की ओर से इन दोनों प्रस्तावों पर लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन अधिकारियों के तमाम प्रयासों के बावजूद करनाल स्मार्ट सिटी की सूची में नहीं आ सका। अब तीसरी बार करनाल इस प्रतियोगिता के लिए तैयार है। नगर निगम करनाल के आयुक्त डॉ. आदित्य दहिया ने बताया कि इसके लिए निगम काफी दिनों से नेशनल स्तरीय कंसलटेंट एजेंसी की तलाश में था। शुक्रवार को इस मामले को लेकर दिल्ली के हरियाणा भवन में अधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें क्रिसिल कंपनी को कंसलटेंट चुना गया है। उन्होंने बताया कि कंसलटेंट की नियुक्ति के लिए सरकार की तरफ से टेंडर आमंत्रित किए गए थे, क्योंकि सरकारी स्तर पर ही अच्छे व ऐसे कंसलटेंट हैं, जिन्होंने पहले स्मार्ट सिटी के लिए कार्य किया है। कमेटी में शहरी स्थानीय निकाय हरियाणा के प्रधान सचिव आनंद मोहन शरण, निदेशक शेखर विद्यार्थी, उपायुक्त करनाल मनदीप सिंह बराड़, नगर निगम आयुक्त डॉ. आदित्य दहिया, लोक निर्माण विभाग (भवन एवं सड़कें) के अधीक्षण अभियंता, हुडा के अधीक्षण अभियंता, जिला नगर योजनाकार, निगम के अधीक्षण अभियंता व कार्यकारी अभियंता, शहरी निकाय विभाग मुख्यालय से आए सहायक नगर योजनाकार अथवा इनके प्रतिनिधि शामिल थे। कमेटी की बैठक में प्रत्येक बिंदुओ पर विस्तृत चर्चा व अध्ययन किया गया। इसमें 80 मार्क्स क्वालिफिकेशन के थे तथा 20 नंबर फाइनेशियल प्रपोजल यानी कितने खर्चे पर कार्य करेंगे, के लिए थे। सारे नियमों व कैलकुलेशन के बाद क्रिसिल एजेंसी को सही मानकर उसके चुनाव की घोषणा की गई।
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अब कंपनी करेगी पूरे करनाल पर स्टडी
नवनियुक्त कंसलटेंट जनवरी, 2017 से ही अपना कार्य करना शुरू कर देगा। स्मार्ट सिटी का मतलब ऐसे शहरों से है, जहां पानी और बिजली की पर्याप्त व्यवस्था हो। साथ ही साफ-सफाई और कचरा प्रबंधन, परिवहन के बेहतरीन साधन, तकनीकी कनेक्टिविटी, ई-गवर्नेंस, नागरिकों की सुरक्षा तथा शासन में नागरिकों की भागीदारी जैसी कई सुविधाएं मौजूद हों। आयुक्त ने बताया कि नए कंसलटेंट सबसे पहले शहर की पूरी स्टडी करेंगे। यहां के नक्शे देखेंगे और सबकुछ देखने के बाद उन कमी-बेशी को देखा जाएगा, जिनसे करनाल पिछले दौर में स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल होने से रह गया था।
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कंसलटेंट को शहरवासी देंगे सुझाव
आयुक्त ने बताया कि आगामी एक जनवरी से कंसलटेंट के कार्य की शुरुआत होते ही यहां के लोग स्मार्ट सिटी को लेकर नगर निगम में अपने-अपने सुझाव भी देंगे। निगम के अधीक्षण अभियंता डीआर भास्कर इस कार्य के नोडल अधिकारी रहेंगे, जो पार्षदों व लोगों से अधिक से अधिक चर्चा करके एक ड्राफ्ट तैयार करेंगे। कंसलटेंट एजेंसी के कार्य में 3 विशेषज्ञ भी साथ रहेंगे, इनमें एक प्राइवेट अर्बन प्लानर, म्यूनिसिपल फाइनेंसर एक्सपर्ट तथा ई-गवर्नेंस एक्सपर्ट (आईटी) शामिल होंगे। इनके अलावा देशभर से 10 विशेषज्ञ इनको स्मार्ट सिटी के बारे में करनाल आकर समय-समय पर अपने उपयोगी विचार देते रहेंगे।
अप्रैल में होगी परीक्षा
जैसे ही प्रारूप तैयार होगा, सरकार के स्तर पर इसका अध्ययन किया जाएगा और इसकी अंतिम अनुमति मुख्य सचिव स्तर पर दी जाएगी। इसके बाद, अप्रैल महीने में स्मार्ट सिटी की प्रतियोगिताएं दोबारा करवाई जाएंगी और मई-2017 में करनाल के स्मार्ट सिटी हो जाने की घोषणा हो जाएगी। डॉ. आदित्य दहिया ने बताया कि स्मार्ट सिटी के लिए जो-जो खास रहेगा, उसमें पिछली बार की कमी-बेशी का टीम विशेषज्ञ अलग से अध्ययन करेंगे। स्मार्ट सिटी के विकास के लिए इस बार कितना खर्चा आएगा, उसके लिए नगर निगम संसाधन कहां से जुटाएगा। इसके अतिरिक्त शहर के इतिहास को देखकर उसी के अनुरूप ही नए पार्क आदि बनाए जाएंगे। देश के हो चुके टॉप 20 स्मार्ट सिटी को देखकर उनकी अच्छी बातों का अनुकरण किया जाएगा।