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साहब! आठवीं के बाद बेटियां छोड़ रहीं पढ़ाई
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल
Updated Wed, 04 Jun 2014 11:35 PM IST
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करनाल। शिक्षा विभाग के आरटीई के दावे स्कूलों की कमी के चलते खोखले साबित हो रहे हैं। अधिकतर गांव प्राथमिक व मिडल स्कूल तक ही सीमित हैं। जिसको लेकर गांव प्योंत के सैकड़ों ग्रामीणों ने शिक्षा संघर्ष समिति के बैनर तले सरकारी स्कूल को अपग्रेड कराने के लिए डीसी के माध्यम से सीएम व शिक्षामंत्री को ज्ञापन भेजा।
उन्होंने आश्वासन दिया कि एक सप्ताह के अंदर उचित निर्णय लिया जाएगा। संघर्ष समिति के कार्यकर्ता सुरेंद्र पाल ने बताया कि गांव प्योंत में सीनियर सेकेंडरी स्कूल न होने की वजह से बच्चों को दूर दराज के क्षेत्र में पढ़ने के लिए जाना पड़ता है। प्योंत करनाल से 22 किलोमीटर दूरी पर असंध मेन रोड पर स्थित है। इस गांव की आबादी लगभग 6500 है। यहां 2600 वोटर हैं।
36 साल से स्कूल अपग्रेड नहीं हुआ
सन 1978 में इस स्कूल को प्राथमिक पाठशाला से मिडल बनाया गया था। 36 साल बीत जाने के बाद भी आज भी वहीं पर खड़ा है। गांव के अधिकतर बच्चों को जुंडला व करनाल में आठवीं कक्षा के बाद की शिक्षा प्राप्त करते हैं। ग्रामिणों ने बताया कि गांव चिड़ाव की आबादी इस गांव से बहुत कम है और उसे अपग्रेड करते हुए सीनियर सेकेंडरी का दर्जा दिया जा चुका है। उन्होंने दावा किया कि उनका स्कूल सभी शर्तें पूरी करता है।
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अधिकतर सरकारी स्कूलों में गरीब परिवार के लोग पढ़ते हैं। सीनियर सेकेंडरी स्कूल न होने की वजह से लड़कियां आठवीं पास करते ही मजबूरन उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ता है, क्योंकि आज भी ग्रामीण क्षेत्र में लोग लड़कियों को गांव से बाहर शिक्षा के लिए नहीं जाने देते। अच्छी शिक्षा न मिलने के कारण बच्चों में हीन भावना पैदा हो रही है। इस स्कूल के अपग्रेड हो जाने से आप पास के गांव को भी फायदा मिलेगा। इस अवसर पर राजेंद्र मैहरा, बलवान सिंह, पाला राम, मामूराम, चांदराम, रामकुमार, पाल, राजपति, भरपाई, सवित्री, बबली, रणधीर, सुंदर लाल, नरेश व बलदेव उपस्थित रहे।
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उन्होंने आश्वासन दिया कि एक सप्ताह के अंदर उचित निर्णय लिया जाएगा। संघर्ष समिति के कार्यकर्ता सुरेंद्र पाल ने बताया कि गांव प्योंत में सीनियर सेकेंडरी स्कूल न होने की वजह से बच्चों को दूर दराज के क्षेत्र में पढ़ने के लिए जाना पड़ता है। प्योंत करनाल से 22 किलोमीटर दूरी पर असंध मेन रोड पर स्थित है। इस गांव की आबादी लगभग 6500 है। यहां 2600 वोटर हैं।
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36 साल से स्कूल अपग्रेड नहीं हुआ
सन 1978 में इस स्कूल को प्राथमिक पाठशाला से मिडल बनाया गया था। 36 साल बीत जाने के बाद भी आज भी वहीं पर खड़ा है। गांव के अधिकतर बच्चों को जुंडला व करनाल में आठवीं कक्षा के बाद की शिक्षा प्राप्त करते हैं। ग्रामिणों ने बताया कि गांव चिड़ाव की आबादी इस गांव से बहुत कम है और उसे अपग्रेड करते हुए सीनियर सेकेंडरी का दर्जा दिया जा चुका है। उन्होंने दावा किया कि उनका स्कूल सभी शर्तें पूरी करता है।
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अधिकतर सरकारी स्कूलों में गरीब परिवार के लोग पढ़ते हैं। सीनियर सेकेंडरी स्कूल न होने की वजह से लड़कियां आठवीं पास करते ही मजबूरन उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ता है, क्योंकि आज भी ग्रामीण क्षेत्र में लोग लड़कियों को गांव से बाहर शिक्षा के लिए नहीं जाने देते। अच्छी शिक्षा न मिलने के कारण बच्चों में हीन भावना पैदा हो रही है। इस स्कूल के अपग्रेड हो जाने से आप पास के गांव को भी फायदा मिलेगा। इस अवसर पर राजेंद्र मैहरा, बलवान सिंह, पाला राम, मामूराम, चांदराम, रामकुमार, पाल, राजपति, भरपाई, सवित्री, बबली, रणधीर, सुंदर लाल, नरेश व बलदेव उपस्थित रहे।