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करनाल में रेल रोको आंदोलन का सुषमा स्वराज ने किया था नेतृत्व

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 08 Aug 2019 02:30 AM IST
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shusma swaraj in karnal
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करनाल लोकसभा को अपनी राजनीतिक जमीन के रूप में तैयार करने के लिए पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज बहुत सक्रिय रहीं थीं। उन्होंने यहां की जनता की आवाज को हवा दी और जनहित के कई आंदोलनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। नेतृत्व करने के साथ ही गिरफ्तारी भी दी और पुलिस की लाठियां भी खाईं। उनके जीवन से जुड़ी कुछ यादें पूर्व उद्योग मंत्री शशीपाल मेहता ने साझा की हैं। उन्होंने बताया कि एक बार करनाल में बड़ा आंदोलन हुआ था। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री ताऊ देवीलाल और सुषमा स्वराज भी शामिल थीं। पुराना जीटी रोड पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े गए। पुलिस ने लाठीचार्ज किया। जिसमें कई आंदोलनकारियों को चोटें आईं। पुलिस ने बल प्रयोग कर प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया। उस समय ताऊ देवीलाल और सुषमा स्वराज को गिरफ्तार कर पुलिस चौकी ले जाया गया था। तब वह अपने घर से सुषमा स्वराज के लिए खाना बनवाकर ले गए थे।
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मेहता ने बताया कि करनाल विधानसभा से जयप्रकाश गुप्ता विधायक थे। तब सुषमा स्वराज की अगुवाई में करनाल में रेल रोको आंदोलन किया गया था। कार्यकर्ताओं के साथ सुषमा स्वराज रेल की पटरी पर बैठी थीं। वहां लाठीचार्ज हुआ और पुलिस ने सभी को पटरी से हटा दिया। उसके बाद वह रेलवे स्टेशन के विश्राम गृह में आए। जहां से वह अपनी वैन में 16 लोगों को बैठाकर पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस लाए थे। उनमें सुषमा स्वराज भी थीं। करनाल की जनता सुषमा स्वराज से प्रभावित थीं लेकिन तब उनकी पार्टी संघर्ष के दौर में थी। 1980, 84 व 89 में भाजपा ने उन्हें करनाल लोकसभा से टिकट दिया लेकिन वह जीत नहीं पाई थीं।
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सबके सुख-दुख की थीं साथी
पूर्व उद्योग मंत्री शशीपाल मेहता ने पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के निधन पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि सुषमा स्वराज बहुत ही मिलनसार स्वभाव की थीं। उन्होंने तीनों बार चुनाव में उनकी जी-जान से मदद की थी। सुख-दुख में वह उनके घर आया करती थीं। उनकी चुनावी बैठकों में वह मौजूद रहते थे। उनके बीमार होने का पता चलने पर वह उनसे मिलने भी गए थे।
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ऊर्जावान और तेजस्वी नेत्री की हुई क्षति
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के पूर्व मानद सचिव अशोक सुखीजा का कहना है कि सुषमा स्वराज ऊर्जावान, तेजस्वी और सौम्य स्वभाव की नेता थीं। उनके जाने से जो क्षति हुई है उसकी पूर्ति नहीं हो सकती। हरियाणा की बेटी को श्रद्घांजलि देते हैं। वह कहा करतीं थीं कि बेशक करनाल की जनता ने उन्हें नहीं जीताया पर प्यार बहुत दिया।

एक प्रखर वक्ता थीं सुषमा स्वराज
करनाल। पूर्व सांसद स्व. पंडित चिरंजीलाल शर्मा के पुत्र, विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष एवं विधायक कुलदीप शर्मा ने सुषमा स्वराज के निधन पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि वह छात्र जीवन से सुषमा स्वराज को जानते हैं। चंडीगढ़ में पंजाब विश्वविद्यालय में पढ़ते थे तो वहां उन्होंने सुषमा स्वराज को अच्छे वक्ता के रूप में देखा था। वह प्रखर वक्ता और एक राजनीतिज्ञ थीं। उन्होंने अपने जीवन में देश में अलग पहचान बनाई। राजनीतिक मतभेद विचारधारा के होते हैं लेकिन सुषमा स्वराज के प्रति एक सहज सम्मान उमड़ता था। उनके देहांत से वह बहुत दुखी हैं।
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